डी.ए.वी. कॉलेज, जालंधर के स्नातकोत्तर वाणिज्य एवं प्रबंधन विभाग द्वारा ‘शैक्षणिक एवं व्यावसायिक उत्कृष्टता पुरस्कार समारोह’ का आयोजन किया गया। इस समारोह का उद्देश्य विद्यार्थियों की शैक्षणिक तथा व्यावसायिक क्षेत्रों में प्राप्त विशिष्ट उपलब्धियों का सम्मान करना था। यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के परिश्रम, दृढ़ संकल्प एवं उत्कृष्टता की निरंतर साधना को पहचान देने वाला एक महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुआ तथा संस्थान की शैक्षणिक उन्नति के प्रति प्रतिबद्धता को भी और अधिक सुदृढ़ करता है।

समारोह का शुभारंभ विशिष्ट अतिथियों के औपचारिक स्वागत के साथ हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अनूप कुमार, वरिष्ठ उप-प्राचार्य डॉ. कुॅंवर राजीव, उप-प्राचार्या प्रो. सोनिका दानिया, वाणिज्य विभागाध्यक्ष एवं रजिस्ट्रार प्रो. अशोक कपूर तथा डिप्टी रजिस्ट्रार प्रो. मनीष खन्ना की गरिमामयी उपस्थिति रही। बड़ी संख्या में संकाय सदस्यों, विद्यार्थियों तथा आमंत्रित अतिथियों की उपस्थिति ने समारोह को अत्यंत भव्य एवं उत्साहपूर्ण बना दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक ‘डी.ए.वी. गान’ के साथ हुई, जिसने उपस्थित जनसमूह में एकता, सांस्कृतिक गौरव तथा संस्था के प्रति अपनत्व की भावना को प्रबल किया। यह समारोह वाणिज्य मंच के तत्वावधान में सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ, जो विभाग में शैक्षणिक तथा सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों के आयोजन में निरंतर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है।

इसके पश्चात प्रो. अशोक कपूर ने प्रेरणादायी संबोधन दिया। उन्होंने शैक्षणिक एवं व्यावसायिक सफलता प्राप्त करने हेतु अनुशासन, समर्पण तथा सतत परिश्रम के महत्व पर विशेष बल दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने लक्ष्यों के प्रति सजग रहने तथा चुनौतियों को सीखने एवं आगे बढ़ने का अवसर मानने के लिए प्रेरित किया।

अपने संबोधन में प्राचार्य डॉ. अनूप कुमार ने महाविद्यालय की शैक्षणिक उत्कृष्टता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संस्था का उद्देश्य केवल शिक्षा प्रदान करना ही नहीं, बल्कि सक्षम, कर्तव्यनिष्ठ एवं उत्तरदायी नागरिकों का निर्माण करना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों को उच्च लक्ष्य निर्धारित करने, दृढ़ बने रहने तथा दीर्घकालिक सफलता के लिए शैक्षणिक एवं व्यावसायिक दोनों ही क्षेत्रों में सक्रिय सहभागिता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।

समारोह के दौरान एक विस्तृत प्रस्तुति के माध्यम से विभाग की उपलब्धियों, महत्वपूर्ण पड़ावों तथा प्रगति को प्रदर्शित किया गया। इस प्रस्तुति ने विभाग के निरंतर विकास, शैक्षणिक सुदृढ़ता एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से उजा़गर किया। साथ ही विद्यार्थियों की सफलता की प्रेरक कहानियों को भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण पुरस्कार वितरण समारोह रहा, जिसमें वाणिज्य विभाग के विद्यार्थियों को उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उन विद्यार्थियों को विशेष रूप से पुरस्कृत किया गया, जिन्होंने चार्टर्ड लेखाकार तथा कंपनी सचिवता जैसी प्रतिष्ठित व्यावसायिक परीक्षाओं की प्रारंभिक एवं मध्यवर्ती परीक्षाएँ सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की थीं। इसके अतिरिक्त, जिन विद्यार्थियों ने 7.5 से अधिक अर्धवार्षिक श्रेणी अंक प्राप्त किए थे, उन्हें भी उनकी निरंतर शैक्षणिक प्रगति एवं उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया।

इसके साथ ही महाविद्यालय में सर्वाधिक वेतनमान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को भी विशेष सम्मान प्रदान किया गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि वे अपने भविष्य के निर्माण एवं रोजगार प्राप्ति की दिशा में अत्यंत सफल रहे हैं। इसके अतिरिक्त, जिन विद्यार्थियों ने विभिन्न प्रकार की व्यावसायिक परीक्षाओं में भाग लिया था, उनके निरंतर प्रयास एवं व्यावसायिक विकास के प्रति उनकी दृढ़ निष्ठा की भी सराहना की गई।

कार्यक्रम का समापन वाणिज्य मंच के अध्यक्ष तथा प्रशिक्षण एवं नियोजन प्रकोष्ठ के अधिष्ठाता डॉ. मानव अग्रवाल द्वारा प्रस्तुत औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने समारोह को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी गणमान्य अतिथियों, संकाय सदस्यों, आयोजकों तथा विद्यार्थियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।

समारोह का समापन जलपान के साथ हुआ, जिससे उपस्थित जनसमूह को आपसी संवाद, अनुभव सांझा करने तथा उपलब्धि एवं गर्व की सामूहिक भावना का आनंद लेने का अवसर प्राप्त हुआ। यह कार्यक्रम सभी के लिए प्रेरणास्रोत बना तथा विद्यार्थियों को अपने शैक्षणिक एवं व्यावसायिक जीवन में निरंतर उत्कृष्टता प्राप्त करने हेतु प्रेरित करता रहा।

इस अवसर पर प्रो. मनीष अरोड़ा, प्रो. निधि अग्रवाल, डॉ. राजवंत कौर, डॉ. एकजोत कौर, प्रो. ईशा सहगल, डॉ. कोमल सोनी, डॉ. हीना अरोड़ा, डॉ. कोमल नारंग तथा डॉ. संजीव धवन भी विद्यार्थियों को शुभाशीष प्रदान करने हेतु उपस्थित रहे।