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थाली में भोजन, होठों पर भजन जीवन का दिव्य संतुलन– नवजीत भारद्वाज*

जालंधर:- मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में सामुहिक निशुल्क दिव्य हवन यज्ञ एवं नवरात्रि के शुभ अवसर पर माता सिद्धिदात्री जी के निमित हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया।
सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमान समीर कपूर एवं मोनिका कपूर से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन ,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई।
सिद्ध माँ बगलामुखी धाम में आयोजित साप्ताहिक दिव्य हवन-यज्ञ के पावन अवसर पर प्रेरक प्रवक्ता नवजीत भारद्वाज ने अपने ओजस्वी और भावपूर्ण प्रवचनों से श्रद्धालुओं को माँ के चरणों से जोड़ते हुए भक्ति के गूढ़ रहस्यों को सरल शब्दों में समझाया।
नवरात्रों के दौरान निरंतर चल रहे हवन-यज्ञ के बीच उन्होंने एक अत्यंत सरल, किंतु गहन विषय *“भोजन और भजन”* पर चिंतन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि ये दोनों शब्द भले ही साधारण प्रतीत होते हैं, लेकिन इनके भीतर जीवन का सम्पूर्ण दर्शन छिपा हुआ है। एक शरीर का पोषण करता है, तो दूसरा आत्मा को संवारता है।
नवजीत भारद्वाज जी ने अत्यंत रोचक ढंग से समझाया कि “भोजन” और “भजन” दोनों की शुरुआत ‘भ’ से होती है, लेकिन एक में मात्रा है और दूसरे में नहीं। भोजन के ‘भ’ पर मात्रा का अर्थ है कि यह सीमित है—जितना खाएंगे, उतना ही शरीर को ऊर्जा मिलेगी, लेकिन एक सीमा के बाद वही भोजन बोझ बन जाता है। यह हमें सिखाता है कि शरीर की आवश्यकताएं सीमित हैं।
वहीं, भजन के ‘भ’ पर कोई मात्रा नहीं है, क्योंकि भजन असीम है, अनंत है। जितना अधिक भजन किया जाए, उतनी ही मन में शांति, भक्ति और संतोष की वृद्धि होती है।
उन्होंने कहा कि आज का मनुष्य भोजन के पीछे तो बहुत भाग रहा है—स्वाद, विविधता और सुविधा की तलाश में भजन को भूलता जा रहा है। यही कारण है कि आज पेट तो भरा है, लेकिन मन खाली है; घर बड़े हो गए हैं, लेकिन दिल छोटे हो गए हैं। सुविधाएं बढ़ी हैं, पर शांति कहीं खो गई है।
नवजीत भारद्वाज जी ने स्पष्ट किया कि भोजन के बिना शरीर नहीं चल सकता, लेकिन भजन के बिना जीवन नहीं संभल सकता। जब मनुष्य केवल भोजन पर केंद्रित होता है, तो वह भोग में उलझ जाता है, और जब भजन को अपने जीवन में शामिल करता है, तो वही जीवन योग का रूप ले लेता है।
उन्होंने कहा कि धार्मिक पर्वों, सत्संगों और मंदिरों में होने वाला भजन-कीर्तन केवल ध्वनि नहीं होता, बल्कि वह वातावरण, ऊर्जा और मन:स्थिति को परिवर्तित करने की शक्ति रखता है। भजन मनुष्य को ईश्वर से जोड़ता है, और जब यह जुड़ाव हो जाता है, तो जीवन की दिशा ही बदल जाती है।
प्रवचन के अंत में उन्होंने संतुलित जीवन का सूत्र देते हुए कहा—
*“थाली में भोजन हो और होठों पर भजन हो,*
*हाथों में कर्म हो और हृदय में परमात्मा का स्मरण हो।”*
उन्होंने कहा कि यदि दिन की शुरुआत और अंत भगवान के नाम से हो, तो जीवन अपने आप सफल और सार्थक बन जाता है।
अंत में उन्होंने संदेश दिया कि भोजन शरीर को जीवित रखता है, लेकिन भजन जीवन को दिव्य बना देता है। इसलिए भोजन भी करें, पर भजन को कभी न भूलें। जब ये दोनों साथ चलते हैं, तभी जीवन में सच्चा सुख, शांति और आनंद प्राप्त होता है।
इस अवसर पर श्वेता भारद्वाज, राकेश प्रभाकर,सरोज बाला, विक्की अग्रवाल, अमरेंद्र कुमार शर्मा, प्रदीप , दिनेश सेठ,सौरभ भाटिया,विवेक अग्रवाल, जानू थापर,दिनेश चौधरी,नरेश,कोमल,वेद प्रकाश, मुनीष मैहरा, ऋषभ कालिया, कमलजीत,बलजिंदर सिंह,अजीत कुमार , नरेंद्र ,रोहित भाटिया,बावा जोशी,राकेश शर्मा, अमरेंद्र सिंह, विनोद खन्ना, नवीन , प्रदीप, सुधीर, सुमीत,मनीष शर्मा,दानिश, रितु, कुमार,गौरी केतन शर्मा,सौरभ ,शंकर, संदीप,रिंकू,प्रदीप वर्मा, गोरव गोयल, मनी ,नरेश,अजय शर्मा,दीपक , किशोर,प्रदीप , प्रवीण,राजू, गुलशन शर्मा,संजीव शर्मा, रोहित भाटिया,मुकेश, रजेश महाजन ,अमनदीप शर्मा, गुरप्रीत सिंह, विरेंद्र सिंह, अमन शर्मा, वरुण, नितिश,रोमी, भोला शर्मा,दीलीप, लवली, लक्की, मोहित , विशाल , अश्विनी शर्मा , रवि भल्ला, भोला शर्मा, जगदीश, नवीन कुमार, निर्मल,अनिल,सागर,दीपक,दसोंधा सिंह, प्रिंस कुमार, पप्पू ठाकुर, दीपक कुमार, नरेंद्र, सौरभ,दीपक कुमार, नरेश,दिक्षित, अनिल, कमल नैयर, अजय, भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।

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