
जालंधर:- मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में श्री शनि देव महाराज जी के निमित्त सामुहिक निशुल्क दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया।
सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमान से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन ,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई।
सिद्ध मां बगलामुखी धाम में दिव्य हवन की पावन अग्नि प्रज्वलित थी। वातावरण मंत्रों की गूंज से आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा था। इसी पवित्र क्षण में प्रवक्ता नवजीत भारद्वाज ने उपस्थित भक्तों को एक ऐसा संदेश दिया, जिसने हर हृदय को भीतर तक स्पर्श किया।
उन्होंने महाभारत का एक मार्मिक प्रसंग सुनाते हुए कर्ण और श्रीकृष्ण के संवाद का उल्लेख किया। कर्ण, जिनका जीवन जन्म से ही संघर्षों और उपेक्षा से भरा था, उन्होंने श्रीकृष्ण के सामने अपनी पीड़ा व्यक्त की। उनके शब्द केवल प्रश्न नहीं थे, बल्कि अन्याय, अपमान और अकेलेपन की गूंज थे।
कर्ण ने कहा, ‘‘मुझे जन्म के साथ ही त्याग दिया गया, शिक्षा से वंचित रखा गया, श्राप और अपमान मिले। फिर भी यदि मैं उस व्यक्ति के साथ खड़ा हूं जिसने मुझे सम्मान दिया, तो क्या मैं गलत हूं?’’
नवजीत भारद्वाज ने समझाया कि यह प्रश्न केवल कर्ण का नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति का है जिसने जीवन में कभी न कभी अन्याय सहा है।
श्रीकृष्ण ने करुणा और मुस्कान के साथ उत्तर दिया, ‘‘जीवन किसी के साथ पूर्ण न्याय नहीं करता। मेरा जन्म कारागार में हुआ, बचपन से ही मृत्यु मेरे पीछे थी, मुझे भी संघर्ष और ताने मिले। लेकिन यह सब यह तय नहीं करता कि हम कौन हैं। हमारे कर्म और हमारा मार्ग ही हमारी पहचान बनाते हैं।’’
उन्होंने भावुक स्वर में कहा, ‘‘ दुख तुम्हारी पहचान नहीं है, तुम्हारे निर्णय तुम्हारी पहचान हैं।’’ जीवन में हर किसी को सब कुछ नहीं मिलता, कभी सम्मान की कमी होती है, कभी प्रेम अधूरा रह जाता है, तो कभी न्याय भी नहीं मिल पाता। लेकिन इन अभावों के बावजूद अधर्म का मार्ग चुनना कभी उचित नहीं होता।
उन्होंने आगे कहा, ‘‘धर्म आसान रास्ता नहीं है। धर्म वह दीपक है जो अंधकार में भी जलता रहता है, जबकि अधर्म वह मार्ग है जो क्षणिक सुख देकर अंतत: विनाश की ओर ले जाता है।’’
अंत में उन्होंने सभी भक्तों से आग्रह किया, जब जीवन कठिन हो जाए, जब परिस्थितियां आपको तोडऩे लगें, तब भी ईश्वर पर विश्वास बनाए रखें। क्योंकि सच्ची परीक्षा वहीं होती है, जहाँ खोने का भय होता है, और सच्ची जीत वहीं मिलती है, जहाँ इंसान धर्म का साथ नहीं छोड़ता।
नवजीत भारद्वाज ने बताया कि
*मां बगलामुखी जयंती के उपलक्ष में सांध्य फेरी 19 अप्रैल रविवार शाम को* मंदिर परिसर से चलकर गुलमोहर सिटी का भ्रमण करके दोबारा मंदिर परिसर में संपन्न होगी।
इस अवसर पर श्वेता भारद्वाज, निर्मल शर्मा, राकेश प्रभाकर,पूनम प्रभाकर ,सरोज बाला, समीर कपूर, विक्की अग्रवाल, अमरेंद्र कुमार शर्मा, प्रदीप , दिनेश सेठ,सौरभ भाटिया,जानू थापर,दिनेश चौधरी,नरेश,कोमल,ऋषभ कालिया,उदय ,अजीत कुमार , नरेंद्र ,रोहित भाटिया,बावा जोशी,राकेश शर्मा,नवीन , प्रदीप, सुधीर, सुमीत, मनीष शर्मा,परमजीत सिंह, दानिश, रितु, कुमार, मनी ,नरेश,अजय शर्मा,दीपक , किशोर,प्रदीप , प्रवीण,राजू, गुलशन शर्मा,संजीव शर्मा, रोहित भाटिया,मुकेश, रजेश महाजन,लवली, लक्की, मोहित , विशाल, रवि भल्ला, जगदीश, नवीन कुमार, निर्मल,अनिल,सागर,दीपक, प्रिंस कुमार, पप्पू ठाकुर, दीपक कुमार, नरेंद्र, सौरभ,दीपक कुमार, नरेश,दिक्षित, अनिल, कमल नैयर, अजय सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।