

जालंधर: एक ऐसा व्यक्तित्व, जिसने न तलवार उठाई और न रही किसी सेना की कमान संभाली, फिर भी सत्य और अहिंसा से पूरी दुनाय को नया रास्ता दिखाया। आप समझ गए होंगे कि हम किसकी बात कर रहे हैं…। यह नाम है मोहनदास करमचंद गांधी। जिनका जीवन केवल देश की आजादी की लड़ाई तक सीमित नहीं था, बल्कि उनके विचार आज भी करोड़ों लोगों को सच बोलने, अन्याय के खिलाफ खड़े होने और शांति के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देते हैं। हर साल 2 अक्टूबर को उनकी जयंती अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में भी जानी जाती है।इस दिन जगह-जगह कार्यक्रमों और श्रद्धांजलि देने के दौरान स्पीच देकर गांधीजी के विचारों को याद किया जाता है।



