
दिल्ली: पासपोर्ट को लेकर छिड़ी बहस के बीच विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है, नागरिकता का प्रमाण नहीं ऐसे में विदेश मंत्रालय के इस बयान के बाद पासपोर्ट की अहमियत और इसकी कानूनी स्थिति को लेकर आम लोगों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं आइए इससे जुड़े 4 बड़े सवालों के सटीक जवाब बेहद सरल भाषा में जानते हैं भारत का संविधान देश के नागरिकों को ‘दोहरी नागरिकता’ रखने की अनुमति नहीं देता इसका मतलब है कि कोई भी व्यक्ति एक ही समय में भारत और किसी दूसरे देश का नागरिक नहीं रह सकता. जैसे ही आप किसी विदेशी देश की नागरिकता स्वीकार करते हैं, आपकी भारतीय नागरिकता कानूनन खत्म हो जाती है यही कारण है कि विदेशी नागरिकता मिलते ही भारतीय पासपोर्ट को तुरंत सरेंडर करना अनिवार्य होता है विदेश मंत्रालय और बॉम्बे हाई कोर्ट के पुराने फैसलों के अनुसार, पासपोर्ट मुख्य रूप से विदेश में आपकी राष्ट्रीयता को दर्शाता है, लेकिन यह नागरिकता का अंतिम या अकाट्य प्रमाण नहीं है फिर भी पुलिस वेरिफिकेशन इसलिए जरूरी है क्योंकि पासपोर्ट एक बेहद संवेदनशील और अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज है पुलिस जांच का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि आवेदन करने वाले व्यक्ति का कोई गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड तो नहीं है, या वह देश की सुरक्षा के लिए खतरा तो नहीं है