
समग्र शिक्षा और सांस्कृतिक समृद्धि के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करते हुए, सी टी यूनिवर्सिटी ने मस्ताने थिएटर ग्रुप द्वारा प्रस्तुत विचारोत्तेजक नाटक ‘मंटो दे अफ़साने’ का सफल आयोजन किया। यह प्रस्तुति महान साहित्यकार सआदत हसन मंटो की कालजयी रचनाओं को मंच पर जीवंत करने का एक सशक्त प्रयास रही। यह केवल एक नाट्य प्रस्तुति नहीं थी, बल्कि समाज के सामने एक ऐसा आईना थी, जिसने यह याद दिलाया कि मंटो द्वारा दशकों पहले उठाए गए प्रश्न आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।
भारतीय उपमहाद्वीप के महानतम साहित्यकारों में गिने जाने वाले सआदत हसन मंटो ने विभाजन की त्रासदी, नफ़रत, पूर्वाग्रह, हिंसा, विस्थापन और मानवीय मूल्यों के पतन को अपनी लेखनी के माध्यम से निर्भीकता से प्रस्तुत किया। उनकी कहानियाँ राजनीतिक सीमाओं से परे जाकर मानव स्वभाव की जटिलताओं, सामाजिक पाखंड और हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज़ को सामने लाती हैं। ‘मंटो दे अफ़साने’ ने इन्हीं अमर रचनाओं के माध्यम से विद्यार्थियों और दर्शकों को करुणा, न्याय, सहानुभूति और मानवीय मूल्यों पर गंभीरता से विचार करने के लिए प्रेरित किया।
रंगमंच को शिक्षा, संवाद और सामाजिक जागरूकता का प्रभावशाली माध्यम मानते हुए, सी टी यूनिवर्सिटी लगातार ऐसे मंच उपलब्ध करा रही है, जहाँ साहित्य और प्रदर्शन कला सीखने का सशक्त माध्यम बन सकें। ‘मंटो दे अफ़साने’ के आयोजन के माध्यम से विश्वविद्यालय ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि वह ऐसे जिम्मेदार नागरिक तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो कला का सम्मान करने के साथ-साथ आलोचनात्मक सोच और भावनात्मक संवेदनशीलता भी विकसित करें।
अक्स मेहराज और सोनी ढिल्लों के निर्देशन में प्रस्तुत इस नाटक ने प्रभावशाली अभिनय, सशक्त संवाद और भावपूर्ण मंचन के जरिए मंटो की रचनाओं की गहराई को जीवंत किया। नाटक में सांप्रदायिक सौहार्द, लैंगिक समानता, नैतिकता, विस्थापन, संघर्ष, मानवता और नफ़रत के बीच चलने वाले द्वंद्व जैसे विषयों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया, जिससे दर्शकों को कठिन सामाजिक सच्चाइयों का सामना करने और सह-अस्तित्व तथा न्याय के महत्व को समझने का अवसर मिला।
इस प्रस्तुति में जसप्रीत कौर, अमनदीप कौर, सुखजीत कौर, फिरदौस यास्मीन, परनीत कौर, पुनीत कौर, रमनजोत कौर, काबिल, दिलवरजोत सिंह, रोहित सहित कई प्रतिभाशाली कलाकारों ने अभिनय किया। संगीत निर्देशन अमनदीप ने किया, जबकि वेशभूषा में बंसी कौर और मोंगा जनरल स्टोर का सहयोग रहा। मेकअप की जिम्मेदारी सिमरन गिल ने निभाई।
इस अवसर पर कुलपति डॉ. नितिन टंडन ने कहा, “सी टी यूनिवर्सिटी में हमारा मानना है कि शिक्षा केवल कक्षाओं तक सीमित नहीं है। रंगमंच एक ऐसा सशक्त माध्यम है, जो विद्यार्थियों में संवेदनशीलता, आलोचनात्मक सोच और सामाजिक जागरूकता विकसित करता है। ‘मंटो दे अफ़साने’ के माध्यम से विद्यार्थियों ने साहित्य को उसके सबसे प्रभावशाली रूप में अनुभव किया, जिसने उन्हें इतिहास, मानवता और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों पर विचार करने के लिए प्रेरित किया।”
वहीं, डायरेक्टर डीएसडब्ल्यू इंजी. दविंदर सिंह ने कहा, “हमारा प्रयास विद्यार्थियों को ऐसे अनुभव प्रदान करना है, जो उनके बौद्धिक और भावनात्मक विकास में समान रूप से सहायक हों। ‘मंटो दे अफ़साने’ केवल एक नाट्य प्रस्तुति नहीं, बल्कि एक ऐसा अनुभव था जिसने करुणा, समावेशिता और सआदत हसन मंटो की साहित्यिक विरासत की आज भी बनी हुई प्रासंगिकता पर सार्थक संवाद को प्रेरित किया।”
‘मंटो दे अफ़साने’ जैसी पहलों के माध्यम से सी टी यूनिवर्सिटी शिक्षा में कला और संस्कृति को प्रभावी रूप से शामिल करते हुए साहित्यिक विरासत को संरक्षित करने और विद्यार्थियों को संवेदनशील, सामाजिक रूप से जागरूक तथा जिम्मेदार वैश्विक नागरिक बनने के लिए निरंतर प्रेरित कर रही है।
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