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125 दिनों की रोजगार गारंटी: राज्य सरकारों के लिए वित्तीय लाभ, जवाबदेही और भ्रष्टाचार-मुक्त व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम

लुधियाना: एस. आर. लाधर, पूर्व IAS एवं अध्यक्ष, भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा (पंजाब) ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार द्वारा 100 दिनों के स्थान पर 125 दिनों की रोजगार गारंटी योजना लागू करना तथा इसके अंतर्गत प्रशासनिक खर्च की सीमा को 6% से बढ़ाकर 9% करना राज्य सरकारों के लिए सीधा वित्तीय लाभ है, न कि कोई नुकसान।उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अतिरिक्त 3% राशि राज्य सरकारों के पास ही रहेगी, जिससे पंचायत सचिवों के वेतन, कार्यालयी खर्च, रिकॉर्ड प्रबंधन, डिजिटल सिस्टम और फील्ड-स्तर की निगरानी को मजबूत किया जा सकेगा। इसलिए राज्य सरकारों को इस योजना का स्वागत करना चाहिए, न कि बिना तथ्यों के इसकी आलोचना करनी चाहिए। श्री लाधर ने कहा कि ₹1,51,282 करोड़ के बजट प्रावधान में से लगभग ₹13,000 करोड़ प्रशासनिक खर्चों के लिए रखे गए हैं, जो व्यवस्था को सुव्यवस्थित, जवाबदेह और प्रभावी बनाने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने बताया कि योजना की निगरानी के लिए केंद्रीय एवं राज्य स्तरीय परिषदों की स्थापना की जा रही है, जिससे नीति निर्माण, क्रियान्वयन और परिणामों की समीक्षा में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी। साथ ही, योजना में राज्य सरकार की हिस्सेदारी (State Share) होने से सरकारों की जिम्मेदारी और बढ़ेगी तथा भ्रष्टाचार की संभावना में कमी आएगी। श्री लाधर ने कहा कि यह योजना केंद्र-राज्य सहयोग का एक आदर्श मॉडल है, जिससे रोजगार सृजन के साथ-साथ प्रशासनिक सुधार भी संभव होंगे। उन्होंने कहा कि जो राज्य सरकारें इस योजना का विरोध कर रही हैं, वे वास्तव में गरीबों के हितों के विरुद्ध खड़ी हैं। अंत में उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार सिर्फ वादे नहीं, बल्कि संसाधनों, निगरानी और जवाबदेही के साथ योजनाएं लागू करती है, ताकि लाभ वास्तविक हकदार तक पहुँचे और व्यवस्था भ्रष्टाचार-मुक्त बने। नई योजना को लागू करने से पहले केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने पंजाब सहित अन्य राज्यों में जाकर मनरेगा श्रमिकों से संवाद किया, जिसके बाद इस योजना को लागू करने हेतु संसद में विधेयक प्रस्तुत करने का निर्णय लिया गया। श्री लाधर ने कहा कि नई योजना “जी राम जी” रोजगार के दिनों में वृद्धि, राज्य सरकारों को वित्तीय सहायता तथा प्रणाली को भ्रष्टाचार-मुक्त बनाने की दिशा में एक सुव्यवस्थित और सराहनीय कदम है। केंद्र सरकार का यह निर्णय प्रशंसनीय है।

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