
कमजोर की आह से डरें, क्योंकि अन्याय पर ईश्वर कभी मौन नहीं रहता : नवजीत भारद्वाज

जालंधर:- मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में श्री शनिदेव महाराज जी के निमित सामुहिक निशुल्क दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया।
सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमान रोहित गौतम,योगिता गौतम से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन ,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई।
सिद्ध मां बगलामुखी धाम के प्रेरक प्रवक्ता नवजीत भारद्वाज जी ने दिव्य हवन यज्ञ के अवसर पर उपस्थित मां भक्तों को प्रवचनों की अमृत वर्षा करते हुए संत शिरोमणि कबीरदास जी के जीवन दर्शन और उनकी शिक्षाओं से अवगत करवाया। उन्होंने कहा कि संत कबीरदास जी की वाणी केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने वाली ऐसी आध्यात्मिक धरोहर है, जो आज भी समाज को सत्य, करुणा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
नवजीत भारद्वाज जी ने संत कबीरदास जी के प्रसिद्ध दोहे—
*”कबीरा दुर्बल न सताइए, जाकी मोटी हाय।*
*मुई खाल की सांस सौं, सार भस्म हो जाय॥”*
का भावार्थ समझाते हुए कहा कि इस दोहे में मनुष्य के लिए बहुत गहरी सीख छिपी हुई है। किसी कमजोर, असहाय या जरूरतमंद व्यक्ति को कभी अपनी ताकत, पद, धन अथवा प्रतिष्ठा के अहंकार में आकर परेशान नहीं करना चाहिए। कमजोर व्यक्ति भले ही अपनी पीड़ा को शब्दों में व्यक्त न कर पाए, लेकिन उसके हृदय से निकली आह और आंखों से बहने वाले आंसू परमात्मा तक अवश्य पहुंचते हैं।
उन्होंने कहा कि संसार में ताकतवर होना बड़ी बात नहीं, बल्कि अपनी ताकत का उपयोग किसी कमजोर की रक्षा और सहायता के लिए करना वास्तविक महानता है। जो व्यक्ति दूसरों के दुख को समझता है और जरूरतमंद के सम्मान की रक्षा करता है, वही सच्चे अर्थों में धर्म का पालन करता है।
नवजीत भारद्वाज जी ने कहा कि मनुष्य को यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि समय और कर्म का हिसाब अवश्य होता है। किसी के साथ किया गया अन्याय, अपमान और अत्याचार कभी व्यर्थ नहीं जाता। ईश्वर की न्याय व्यवस्था में देर हो सकती है, लेकिन अन्याय करने वाला अपने कर्मों के परिणाम से बच नहीं सकता।
उन्होंने मां भक्तों को संदेश देते हुए कहा कि संत कबीरदास जी का यह दोहा किसी को भयभीत करने के लिए नहीं, बल्कि मानवता को जगाने के लिए है। घर, परिवार, कारोबार, कार्यालय और राजनीति सहित जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में दूसरों के प्रति प्रेम, दया और सम्मान का भाव रखना चाहिए।
अंत में उन्होंने कहा कि जहां अहंकार होता है, वहां अन्याय जन्म लेता है और जहां करुणा होती है, वहां ईश्वर का वास होता है। कमजोर का सहारा बनना ही सच्ची भक्ति और मानवता की सबसे बड़ी पहचान है।
इस अवसर पर अजीत कुमार,सरोज बाला,राकेश प्रभाकर,पूनम प्रभाकर ,सरोज बाला, समीर कपूर, विक्की अग्रवाल,जानू थापर, ऋषभ कालिया,नरेंद्र,राकेश शर्मा, अमरेंद्र सिंह,नवीन,प्रदीप, सुधीर, सुमीत,मनीष शर्मा, दानिश, रितु, कुमार,गौरी केतन शर्मा,सौरभ ,शंकर, संदीप,रिंकू,प्रदीप वर्मा, गोरव गोयल, मनी,दीलीप, लवली, लक्की, मोहित , विशाल , अश्विनी शर्मा , रवि भल्ला, भोला शर्मा, जगदीश, नवीन कुमार, निर्मल,अनिल,सागर सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।
हवन यज्ञ के उपरांत लंगर भंडारे का आयोजन किया गया।



