जालंधर:- मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में श्री शनिदेव महाराज जी के निमित सामुहिक निशुल्क दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया।
सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमान मनोज कुमार से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन ,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई।

सिद्ध माँ बगलामुखी धाम में आयोजित दिव्य हवन-यज्ञ के पावन अवसर पर प्रेरक प्रवक्ता नवजीत भारद्वाज जी ने प्रभु भक्तों को अध्यात्मिक प्रवचनों के माध्यम से प्रभु चरणों से जोड़ते हुए कहा कि संत-महात्मा बार-बार एक बात समझाते हैं कि मनुष्य की कमाई केवल उसकी मेहनत से नहीं होती। मेहनत तो बहुत लोग करते हैं, परंतु बरकत हर किसी की कमाई में नहीं होती। असली बरकत तब आती है जब उस मेहनत पर गुरु और परमात्मा की कृपा होती है। जिस घर में गुरु की कृपा होती है, वहां अन्न की कमी नहीं रहती, काम-धंधे में उन्नति होती है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।

*नवजीत भारद्वाज जी ने कहा कि संतों ने महान परंपरा दी है दसवंत। दसवंत का अर्थ है कि जो भी कमाई हमें मिलती है, उसमें से दसवां हिस्सा गुरु, धर्म और सेवा के कार्यों में लगाना। यह कोई कर या बोझ नहीं है, बल्कि यह हमारे दिल की श्रद्धा और कृतज्ञता का प्रतीक है। यह उस एहसास का नाम है कि जो कुछ भी हमें मिला है, वह केवल हमारा नहीं है; उसमें गुरु की कृपा और परमात्मा की दया भी शामिल है।*

नवजीत भारद्वाज जी ने कहा कि जब कोई मनुष्य अपनी कमाई में से दसवंत निकालता है, तो वह केवल धन नहीं देता, बल्कि अपने अंदर के अहंकार को भी गुरु के चरणों में अर्पित करता है। उस समय उसका मन पवित्र होता है, उसके जीवन में सेवा का भाव जागता है और उसकी कमाई में ऐसी बरकत आती है कि थोड़ा भी बहुत बन जाता है।
नवजीत भारद्वाज जी ने प्रभु भक्तों को समझाते हुए कहा कि कई बार देखा गया है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से दसवंत निकालता है, उसके जीवन में कभी अभाव नहीं आता। गुरु उसकी लाज रख लेते हैं और उसके घर को खुशियों से भर देते हैं। लेकिन इसके विपरीत जो मनुष्य सब कुछ गुरु की कृपा से पाकर भी केवल अपने लिए ही जोड़ता रहता है, जो कभी गुरु के नाम पर कुछ नहीं निकालता, वह धीरे-धीरे उस कृपा से दूर होने लगता है।
नवजीत भारद्वाज जी कहते है कि *जो इंसान गुरु के लिए दसवंत नहीं निकालता, वह इंसान दोनों जहान में परवान नहीं होता।* अर्थ यह है कि ऐसा मनुष्य न तो इस संसार में सच्ची शांति और सम्मान प्राप्त कर पाता है, और न ही परलोक में उसे स्वीकार्यता मिलती है। क्योंकि जीवन का असली धर्म केवल कमाना नहीं, बल्कि बांटना और सेवा करना है।
नवजीत भारद्वाज जी कहते है कि गुरु हमें सिखाते हैं कि मनुष्य का हाथ केवल लेने के लिए नहीं, बल्कि देने के लिए भी होना चाहिए। जब हम दूसरों के लिए, धर्म के लिए और सेवा के लिए कुछ अर्पित करते हैं, तब हमारा जीवन सार्थक बनता है। यही भावना हमें स्वार्थ से निकालकर परमार्थ की राह पर ले जाती है। इसलिए संतों की सीख है; कमाई चाहे कम हो या ज्यादा, पर उसमें से दसवंत जरूर निकालो। उसे सेवा, धर्म और मानवता के कार्यों में लगाओ। तभी गुरु की कृपा बनी रहेगी, कमाई में बरकत आएगी, घर में सुख-शांति रहेगी, और जीवन इस लोक और परलोक दोनों में सफल होगा।
*मां बगलामुखी धाम के सेवादार नवजीत ने बताया की रविवार 15 मार्च रविवार को मां बगलामुखी धाम में निःशुल्क ” कायरोप्रैक्टिक चिकित्सा ” मेडिकल कैंप का आयोजन किया जा रहा है सभी श्रद्धालुओं एवं क्षेत्रवासियों स निवेदन है कि इस अवसर का लाभ उठाएं।*
इस अवसर पर रोहित गौतम,योगिता गौतम,राकेश प्रभाकर,मनी राम ,समीर कपूर, विक्की अग्रवाल, अमरेंद्र कुमार शर्मा,बलराज सिंहान, ऋषभ कालिया, नरेंद्र ,रोहित भाटिया, नवीन , प्रदीप, सुधीर, सुमीत,मनीष शर्मा,दानिश,सौरभ ,शंकर,मनी ,नरेश,अजय शर्मा,दीपक , किशोर,प्रदीप , प्रवीण,राजू,वरुण, नितिश,रोमी,दीलीप, लवली, लक्की, रवि भल्ला,प्रिंस कुमार, सौरभ,दीपक कुमार भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।