

चंडीगढ़, 20 अगस्त:
“ई.डी. ने पंजाब के डी.जी.पी. को कोई राजनीतिक पत्र नहीं भेजा है, बल्कि पी.एम.एल.ए. की धारा 66(2) के तहत जांच के दौरान प्राप्त सामग्री भेजी है और स्पष्ट रूप से कहा है कि इस सामग्री से संज्ञेय अपराध किए जाने के संकेत मिलते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार कहा है कि जब किसी सूचना से संज्ञेय अपराध का खुलासा होता है, तो न्यायालय द्वारा निर्धारित सिद्धांतों के अधीन एफ.आइ.आर. दर्ज करना कानून आवश्यक है। पंजाब पुलिस द्वारा पिछले 13 दिनों से ई.डी. के रेफरेंस को लंबित रखा जाना उसकी कार्रवाई करने की इच्छाशक्ति पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इसलिए हम पूरे मामले की स्वतंत्र सी.बी.आई. जांच की मांग करते हैं,” यह बात पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी, पंजाब के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विजय सांपला ने चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कही।
सांपला ने कहा कि ई.डी. का यह रेफरेंस एक मामले की जांच के दौरान जुटाई गई सामग्री पर आधारित है, जिसमें आपराधिक साजिश, भ्रष्टाचार, गोपनीय सरकारी सूचनाओं के अनधिकृत लीक, तबादलों एवं नियुक्तियों में हस्तक्षेप, सरकारी नीतियों और टेंडरों में हेरफेर, अवैध आर्थिक लाभ तथा अन्य संज्ञेय अपराधों से जुड़े गंभीर आरोपों का उल्लेख है।
उन्होंने कहा, “यह मामला इसलिए और गंभीर हो जाता है क्योंकि ई.डी. की जांच सामग्री में मुख्यमंत्री कार्यालय से ओ.एस.डी. के रूप में जुड़े राजबीर घुम्मन का उल्लेख है और सरकारी कामकाज से जुड़े मामलों में नितिन गोहल के साथ उनके कथित समन्वय का भी जिक्र है। इस सामग्री में तबादलों एवं नियुक्तियों से लेकर सरकारी नीतियों, टेंडरों, गोपनीय सूचनाओं, जमीन से जुड़े मामलों, लाइसेंस और कथित वित्तीय लाभ तक कई तरह के मुद्दों का उल्लेख है। इससे एक मूलभूत सवाल उठता है कि मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े व्यक्ति के आसपास कथित तौर पर इतना व्यापक नेटवर्क कैसे काम करता रहा और मुख्यमंत्री को इसकी जानकारी तक नहीं हुई?”
उन्होंने कहा कि अब मुख्यमंत्री को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। “अगर भगवंत मान को वास्तव में इन कथित गतिविधियों की कोई जानकारी नहीं थी और उनके पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है, तो उन्हें स्वयं सी.बी.आई. जांच की मांग करनी चाहिए। वे पंजाब के गृह मंत्री भी हैं और पंजाब पुलिस राज्य सरकार के अधीन कार्य करती है। ऐसी परिस्थितियों में जनता का विश्वास कायम रखने और सच्चाई सामने लाने के लिए स्वतंत्र केंद्रीय जांच आवश्यक है।”
सांपला ने ई.डी. द्वारा मांगी गई एफ.आइ.आर. तत्काल दर्ज करने, सभी डिजिटल, दस्तावेजी और वित्तीय साक्ष्यों को सुरक्षित रखने तथा पूरे मामले की समयबद्ध सी.बी.आई. जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि जांच में नितिन गोहल, राजबीर घुम्मन तथा ई.डी. की सामग्री में नामित अन्य सभी व्यक्तियों की भूमिकाओं की भी जांच होनी चाहिए।
“भगवंत मान बार-बार दावा करते रहे हैं कि उनकी सरकार ईमानदारी और पारदर्शिता के लिए प्रतिबद्ध है। अब इसे साबित करने का समय है। पंजाब को निष्पक्ष जांच चाहिए, स्पष्टीकरण नहीं; एफ.आइ.आर. चाहिए, राजनीतिक बहाने नहीं; और सच्चाई चाहिए—चाहे वह सच्चाई कुछ भी हो,” सांपला ने कहा।



