पंजाबशिक्षा और संस्कृति

एच.एम.वी. में ‘बीज से विरासत पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन

हंसराज महिला महाविद्यालय, जालंधर के इको क्लब, एन.एस.एस., डी.डी. पंत बॉटनिकल सोसाइटी एवं पर्यावरण क्लब द्वारा इंस्टीट्यूशंस इनोवेशन काउंसिल के सहयोग से ‘बीज से विरासत: सीड बॉल्स एवं देशज जैव-विविधताÓ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यशाला एनवायरनमेंटल इन्फॉर्मेशन, अवेयरनेस, कैपेसिटी बिल्डिंग एंड लाइवलीहुड प्रोग्राम, पंजाब स्टेट काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी, चंडीगढ़ के सहयोग से तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में आयोजित की गई। महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. एकता खोसला ने अतिथियों को प्लांटर्स भेंट कर हार्दिक स्वागत किया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रकृति, पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास के संदेश के साथ की। अपने संबोधन में उन्होंने पृथ्वी के संरक्षण की तत्काल आवश्यकता तथा जीवन को बनाए रखने में जैव-विविधता के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने उपस्थित छात्राओं को संदेश देते हुए कहा कि पृथ्वी को हरा-भरा बनाए रखना प्रत्येक व्यक्ति की जिमेदारी है और हम सभी की भूमिका पौधों को लगाने एवं उनका संरक्षण करने में महत्वपूर्ण है। उन्होंने बीज रोपण को आस्था और विश्वास से जोड़ते हुए कहा कि बीज बोना अपने आप में आशा और उज्ज्वल भविष्य में विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने अपनी इच्छा व्यक्त की कि आने वाली पीढ़ियों को आज दिखाई दे रही पर्यावरणीय समस्याओं का सामना न करना पड़े तथा विद्यार्थियों से वृक्षारोपण और बीज रोपण को एक बार की गतिविधि न मानकर जीवनभर की आदत बनाने का आह्वान किया। आईक्यूएसी कोआर्डिनेटर डॉ. अंजना भाटिया ने जैव-विविधता सूचकांक की अवधारणा और पृथ्वी के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि स्वस्थ जैव-विविधता किसी भी पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता और उसकी पर्यावरणीय चुनौतियों से उबरने की क्षमता को मजबूत करती है। उन्होंने बीज को स्वयं जीवन का वाहक बताते हुए समझाया कि प्रत्येक बीज में भविष्य के पौधों और संपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र को विकसित करने की क्षमता निहित होती है। उन्होंने प्रतिभागियों को सीड बॉल बनाने की जापानी तकनीक से भी परिचित करवाया तथा बताया कि यह प्राकृतिक खेती एवं वनस्पति पुनर्स्थापना की एक ऐसी विधि है, जिसके माध्यम से मिट्टी को अधिक प्रभावित किए बिना वनस्पति को पुनर्जीवित किया जा सकता है। ग्रीन स्पैरो प्रोजेक्ट की निदेशक सुश्री रमनप्रीत कौर ने सीड बॉल बनाने की तकनीक का विस्तृत एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। उन्होंने सीड बॉल के लिए उपयुक्त बीजों तथा आवश्यक सामग्री, जैसे मिट्टी, कपोस्ट और चिकनी मिट्टी (क्ले) के बारे में जानकारी दी। उन्होंने प्रतिभागियों को चरणबद्ध तरीके से सीड बॉल तैयार करने की विधि समझाई और उन्हें स्वयं सीड बॉल बनाने का व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया। ईआईएसीपी की आई.टी. आफिसर सुश्री अलीशा ने कार्यशाला के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों तथा स्थानीय समुदाय में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों को व्यक्तिगत स्तर पर वनीकरण एवं पौधारोपण की पहल करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि व्यक्तिगत स्तर पर किए गए छोटे-छोटे प्रयास जब सामूहिक रूप से किए जाते हैं, तो वे बड़े पैमाने पर पर्यावरणीय परिवर्तन ला सकते हैं। कार्यशाला के दौरान सीड बैंक के महत्व पर एक विशेष सत्र भी आयोजित किया गया। इसमें देशज एवं पारंपरिक पौधों की प्रजातियों के संरक्षण में सीड बैंकों की भूमिका के बारे में जानकारी दी गई। इस अवसर पर सीड बैंक सामग्री की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसके माध्यम से स्थानीय बीज विविधता को संरक्षित करने के महत्व को प्रदर्शित किया गया। यह बताया गया कि स्थानीय बीजों का संरक्षण दीर्घकालीन खाद्य सुरक्षा, पारिस्थितिक सुरक्षा तथा जैव-विविधता के संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। डॉ. कंचन संधू, एसोसिएट प्रोफेसर, कृषि विज्ञान केंद्र, जालंधर, पीएयू लुधियाना ने बीजों के महत्व, उनके पोषण मूल्य तथा दैनिक जीवन में उनके उपयोग पर एक ज्ञानवर्धक व्यायान दिया। उन्होंने बताया कि आधुनिक जीवनशैली में बीजों के अत्यधिक पोषण मूल्य को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। उन्होंने विशेष रूप से मिलेट्स के पोषण संबंधी गुणों और स्वस्थ एवं सतत आहार में उनकी बढ़ती उपयोगिता पर प्रकाश डाला तथा प्रतिभागियों को अपने दैनिक पारिवारिक भोजन में पौष्टिक बीजों और मिलेट्स को शामिल करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. अंजना भाटिया एवं डॉ. रमनदीप कौर द्वारा किया गया। इस अवसर पर सभी प्रतिभागियों द्वारा मिशन लाइफ की शपथ भी ली गई, जिसमें पर्यावरण-अनुकूल एवं जिमेदार जीवनशैली अपनाने के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की गई। कार्यशाला में एक रोचक एवं व्यावहारिक हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित किया गया। सुश्री रमनप्रीत कौर ने वर्मी-कपोस्ट, देशज बीजों और क्ले की सहायता से सीड बॉल तैयार करने का प्रदर्शन किया, जिसके बाद प्रतिभागियों ने स्वयं सीड बॉल तैयार किए। सुश्री हरप्रीत कौर ने प्राकृतिक रूप से गिरे हुए पाइनस कोन का रचनात्मक उपयोग करते हुए पाइनस कोन सजावटी वस्तुएँ बनाने का प्रशिक्षण दिया। इस गतिविधि के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों के पुन: उपयोग एवं सतत जीवनशैली का संदेश दिया गया। कार्यशाला में सरदार अजीत सिंह सोसायटी, नगर निगम के स्वयं सहायता समूह के सदस्यों तथा एच.एम.वी. की छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर सीड बॉल्स, पाइनस कोन डेकोर तथा सीड बैंक सामग्री की प्रदर्शनी भी लगाई गई। प्रदर्शनी ने प्रतिभागियों को जैव-विविधता संरक्षण, सतत पर्यावरणीय गतिविधियों तथा प्राकृतिक संसाधनों के रचनात्मक पुन: उपयोग के व्यावहारिक उदाहरणों से परिचित कराया। कार्यशाला में प्रतिभागियों ने अत्यंत उत्साह एवं सक्रियता से भाग लिया। यह कार्यक्रम पर्यावरण जागरूकता, जैव-विविधता संरक्षण, पारंपरिक ज्ञान, पोषण जागरूकता, रचनात्मकता एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण का प्रभावी संगम सिद्ध हुआ और पूर्णत: सफल रहा। इस अवसर पर डॉ. सीमा मरवाहा, डीन अकादमिक, डॉ. श्वेता प्रभारी डी.डी. पंत बॉटनिकल सोसाइटी, डॉ. नीरू भारती, डॉ. राखी मेहता, डॉ. जतिंदर, डॉ. रमा, डॉ. उर्वशी, श्री आशीष, श्री सुमित, डॉ. शैलेन्द्र, डॉ. साक्षी, डॉ. शुचि, डॉ. दीप्ति, श्री रवि तथा एनएसएस प्रोग्राम आफिसर सुश्री हरमनु की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

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