
सीटी ग्रुप परिसर में श्रद्धा और उल्लास से गणेश उत्सव का जश्न

जालंधर। सीटी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के शाहपुर स्थित कैंपस में गणेश चतुर्थी का पर्व श्रद्धा, उत्साह और पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ मनाया गया। दो दिवसीय समारोह में विद्यार्थियों और स्टाफ ने मिलकर भगवान गणेश का स्वागत किया तथा उनके आशीर्वाद की कामना की।
समारोह का शुभारंभ भगवान गणेश की भव्य आगमन यात्रा से हुआ। ढोल-ताशों की धुन, संगीत और नृत्य के बीच विद्यार्थियों ने ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयघोष के साथ बप्पा का स्वागत किया। विद्यार्थी पूरे उत्साह के साथ यात्रा में शामिल हुए और भगवान गणेश की प्रतिमा को परिसर तक लेकर आए। इसके बाद पूजा-अर्चना और मंत्रोच्चारण के बीच विधिवत रूप से गणेश प्रतिमा की स्थापना की गई।
पूरे उत्सव के दौरान विद्यार्थियों ने भगवान गणेश की सेवा-संभाल के साथ विभिन्न धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाई। शाम को आयोजित भजन संध्या में विद्यार्थियों और स्टाफ ने भक्तिमय भजनों की प्रस्तुति दी। भजनों और सामूहिक गायन से पूरा परिसर आध्यात्मिक वातावरण से भर गया।
अगले दिन भगवान गणेश की विदाई यात्रा का आयोजन किया गया। आरती और भजनों के साथ शुरू हुई इस यात्रा में विद्यार्थियों और स्टाफ ने नाचते-गाते तथा ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयघोष के साथ बप्पा को भावपूर्ण विदाई दी। इसके बाद पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमा का विसर्जन किया गया। इस पहल के माध्यम से धार्मिक आस्था और परंपरा के साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया गया।
समारोह में प्रो. डॉ. मनबीर सिंह, मैनेजिंग डायरेक्टर, सीटी ग्रुप एवं प्रो-चांसलर, सीटी यूनिवर्सिटी; तनिका सिंह, ज्वाइंट मैनेजिंग डायरेक्टर; हरप्रीत सिंह, वाइस चेयरमैन; एडवोकेट मनजिंदर कौर, को-वाइस चेयरपर्सन, सीटी ग्रुप; तथा डॉ. जयाशिष सेठी, डायरेक्टर कैंपस विशेष रूप से उपस्थित रहे।
इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़ना विद्यार्थियों के समग्र विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के साथ-साथ सामूहिकता, अनुशासन और पर्यावरणीय जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करते हैं।
‘गणपति बप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या’ के जयघोष के साथ गणेश उत्सव का समापन हुआ। समारोह ने परिसर में भक्ति, सांस्कृतिक गौरव, एकता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश छोड़ा।



