
पंजाब के नौजवानों का भविष्य दांव पर है—नशे पर राजनीति नहीं, केंद्र सरकार से जवाब चाहिए : परगट सिंह

जालंधर, 28 सितंबर, 2026
पंजाब में बढ़ते नशे के संकट पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव, पूर्व कैबिनेट मंत्री और विधायक पद्मश्री परगट सिंह ने केंद्र की भाजपा सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा किसी राजनीतिक दल को कटघरे में खड़ा करने से कहीं बड़ा है। यह पंजाब के नौजवानों, पंजाब के परिवारों और देश की राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल है।
परगट सिंह ने कहा कि पंजाब के लोग वर्षों से नशे के खिलाफ लड़ रहे हैं। सरकारें आती-जाती रही हैं, लेकिन आज भी सबसे बड़ा सवाल वही है—नशा पंजाब तक पहुंच कैसे रहा है और उस पूरी सप्लाई चेन को तोड़ने की जिम्मेदारी किसकी है?
उन्होंने कहा कि जब सीमा पार से ड्रोन के माध्यम से नशीले पदार्थ पंजाब में पहुंचने की बात सामने आती है, तो केंद्र सरकार को केवल बरामदगी और गिरफ्तारी के आंकड़े बताने के बजाय पूरे नेटवर्क की तस्वीर देश के सामने रखनी चाहिए। केंद्र सरकार स्वयं पंजाब सीमा पर ड्रोन विरोधी प्रणालियों की तैनाती और BSF, वायुसेना तथा स्थानीय पुलिस के बीच सूचना साझा करने की व्यवस्था की जानकारी संसद में दे चुकी है।
परगट सिंह ने केंद्र सरकार से सीधे सवाल किया:
पहला—अगर सरकार के पास आधुनिक एंटी-ड्रोन तकनीक, BSF और अन्य सुरक्षा एजेंसियां मौजूद हैं, तो ड्रोन के जरिए होने वाली तस्करी की पूरी श्रृंखला को प्रभावी ढंग से रोकने में अभी तक क्या कमी रह गई है?
दूसरा—ड्रोन को detect, track और neutralise करने के लिए सरकार ने तकनीक और manpower को लेकर क्या स्पष्ट रणनीति बनाई है? केवल ड्रोन बरामद करना पर्याप्त नहीं है। यह पता लगाना भी जरूरी है कि उन्हें कौन संचालित कर रहा है, उनके पीछे कौन है और पंजाब में consignments किस नेटवर्क के माध्यम से पहुंच रही हैं।
तीसरा—केंद्रीय खुफिया एजेंसियों की जिम्मेदारी क्या है? यदि नशे का नेटवर्क पंजाब से आगे हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और दूसरे राज्यों तक फैला हुआ है, तो उस पूरे interstate network को identify करने और dismantle करने के लिए कौन-सी coordinated strategy काम कर रही है?
उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल सीमा पर शुरू और पंजाब में खत्म नहीं होती। यह एक विस्तृत supply chain है, जिसमें सीमा पार के स्रोत, ड्रोन नेटवर्क, परिवहन, स्थानीय वितरण, वित्तीय नेटवर्क और संगठित अपराध शामिल हो सकते हैं। केंद्र सरकार के अपने ढांचे में NCB को केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच coordination, intelligence collection तथा drug trafficking से जुड़े financial assets को target करने की जिम्मेदारी दी गई है।
परगट सिंह ने इसी संदर्भ में पूछा, “क्या केंद्रीय एजेंसियों ने इस पूरे नेटवर्क की financial investigation की है? Drug money की money trail, shell companies, benami assets और proceeds of crime तक पहुंचने के लिए ED, NCB, Customs और अन्य केंद्रीय एजेंसियों के बीच वास्तविक coordination कितना प्रभावी है?”
उन्होंने कहा कि अगर किसी नेटवर्क का पैसा पकड़ा नहीं जाता, उसके financiers तक नहीं पहुंचा जाता और उसकी संपत्ति जब्त नहीं होती, तो केवल छोटे स्तर के आरोपियों की गिरफ्तारी से नशे का कारोबार खत्म नहीं होगा।
उन्होंने ports को लेकर भी केंद्र सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा। “अगर देश के अलग-अलग ports पर illegal consignments की तस्करी रोकना केंद्रीय एजेंसियों की जिम्मेदारी का हिस्सा है, तो पंजाब तक पहुंचने वाले interstate routes और supply chains को trace करने के लिए कौन-सा integrated mechanism काम कर रहा है?”
परगट सिंह ने BSF के अधिकार क्षेत्र को लेकर भी केंद्र से जवाब मांगा। पंजाब सहित कुछ सीमावर्ती राज्यों में अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे क्षेत्र में BSF का क्षेत्राधिकार केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किया गया है और केंद्र ने संसद में इसे trans-border crime से निपटने के लिए राज्य पुलिस के साथ coordination के संदर्भ में बताया है।
उन्होंने पूछा, “जब केंद्र ने सीमा क्षेत्र में BSF की भूमिका और jurisdiction को मजबूत किया है, तो उस व्यवस्था की performance और accountability का स्वतंत्र मूल्यांकन कब किया जाएगा? पंजाब के लोगों को यह जानने का अधिकार है कि सीमा पार नशे की तस्करी रोकने में व्यवस्था कहां सफल हुई और कहां विफल।”
परगट सिंह ने इस पूरे संकट को केवल पंजाब की कानून-व्यवस्था का विषय मानने से भी इनकार किया। उन्होंने कहा कि सीमा पार तस्करी, narco-terrorism, अंतरराज्यीय संगठित अपराध और drug financing का संबंध राष्ट्रीय सुरक्षा से है। केंद्र सरकार स्वयं संसद में विदेशी तत्वों द्वारा पंजाब और जम्मू-कश्मीर की ओर narcotics push किए जाने और इससे narco-terrorism के खतरे का उल्लेख कर चुकी है।
उन्होंने कहा, “अगर केंद्र सरकार इसे national-security issue मानती है, तो फिर पंजाब के साथ इस लड़ाई को केवल एक राज्य का कानून-व्यवस्था का मुद्दा क्यों माना जाए?”
परगट सिंह ने जेलों और संगठित अपराध के nexus पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि यदि gangster और organised crime networks नशे के कारोबार से जुड़े हुए हैं, तो jail intelligence, prison security और central-state intelligence coordination को मजबूत करने के लिए क्या integrated mechanism लागू किया गया है।
उन्होंने Operation Sindoor के बाद बदलते security environment और technology के बढ़ते इस्तेमाल का उल्लेख करते हुए कहा कि social-media platforms, encrypted communication और digital networks का इस्तेमाल करने वाले drug traffickers और financiers की निगरानी भी आधुनिक anti-narcotics strategy का हिस्सा होनी चाहिए।
“आज अपराधी तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। सरकार की प्रतिक्रिया भी उसी स्तर की होनी चाहिए। केवल पुराने तरीकों से नई चुनौती का मुकाबला नहीं किया जा सकता,” उन्होंने कहा।
परगट सिंह ने पंजाब सरकार की भूमिका को लेकर भी स्पष्ट कहा कि राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। पुलिसिंग, स्थानीय distribution networks, उपचार, rehabilitation और ground-level enforcement पंजाब सरकार की जिम्मेदारियां हैं। लेकिन उन्होंने कहा कि राज्य और केंद्र को एक-दूसरे पर दोष डालने के बजाय एक single, accountable command-and-coordination framework के तहत काम करना चाहिए।
उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान से भी सवाल किया कि क्या पंजाब सरकार ने केंद्र की एजेंसियों के साथ मिलकर नशे की पूरी supply chain का district-wise और network-wise assessment किया है? उन्होंने कहा कि पंजाब के परिवारों को राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि measurable action और परिणाम चाहिए।
परगट सिंह ने कहा कि BJP और AAP दोनों को इस मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठना होगा। “केंद्र सीमा और राष्ट्रीय नेटवर्क की जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकता और पंजाब सरकार स्थानीय enforcement और rehabilitation की जिम्मेदारी से। पंजाब के नौजवानों की जिंदगी को political blame game का हिस्सा नहीं बनाया जा सकता।”
उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग सरकारों से केवल एक सवाल पूछ रहे हैं—“नशा बेचने वाले छोटे व्यक्ति तक कार्रवाई कब पहुंचेगी, यह नहीं; उस नशे को पंजाब तक पहुंचाने वाले पूरे नेटवर्क तक कार्रवाई कब पहुंचेगी?”
परगट सिंह ने कहा कि कांग्रेस पंजाब के युवाओं और परिवारों की आवाज को मजबूती से उठाती रहेगी और केंद्र तथा राज्य दोनों सरकारों से स्रोत से लेकर अंतिम वितरण तक पूरी drug supply chain की जवाबदेही तय करने की मांग करती रहेगी।
उन्होंने कहा, “पंजाब को नारों की नहीं, परिणामों की जरूरत है। हमारे नौजवान किसी राजनीतिक अभियान का विषय नहीं हैं। उनका भविष्य हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। केंद्र सरकार को अब जवाब देना होगा—सीमा से लेकर drug money तक, ड्रोन से लेकर organised networks तक, आखिर पूरी supply chain को तोड़ने की जवाबदेही किसकी है?”
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में विशेष रूप से राजिंदर बेरी, जिला अध्यक्ष, कांग्रेस कमेटी जालंधर; डॉ. नवजोत दहिया, हलका इंचार्ज, नकोदर; अवतार सिंह जूनियर (बावा हैनरी), विधायक, जालंधर नॉर्थ; ईशान त्यागी, मीडिया कोऑर्डिनेटर, ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी; करण सुमन, वाइस प्रेसिडेंट, जिला कांग्रेस (अर्बन), जालंधर; एवं एडवोकेट हरनीत सिंह लाली उपस्थित रहे।
परगट सिंह ने कहा कि कांग्रेस पंजाब के युवाओं और परिवारों की आवाज को मजबूती से उठाती रहेगी और केंद्र तथा राज्य दोनों सरकारों से स्रोत से लेकर अंतिम वितरण तक पूरी drug supply chain की जवाबदेही तय करने की मांग करती रहेगी।
उन्होंने कहा, “पंजाब को नारों की नहीं, परिणामों की जरूरत है। हमारे नौजवान किसी राजनीतिक अभियान का विषय नहीं हैं। उनका भविष्य हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। केंद्र सरकार को अब जवाब देना होगा—सीमा से लेकर drug money तक, ड्रोन से लेकर organised networks तक, आखिर पूरी supply chain को तोड़ने की जवाबदेही किसकी है?”
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में विशेष रूप से राजिंदर बेरी, जिला अध्यक्ष, कांग्रेस कमेटी जालंधर; डॉ. नवजोत दहिया, हलका इंचार्ज, नकोदर; अवतार सिंह जूनियर (बावा हैनरी), विधायक, जालंधर नॉर्थ; ईशान त्यागी, मीडिया कोऑर्डिनेटर, ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी; करण सुमन, वाइस प्रेसिडेंट, जिला कांग्रेस (अर्बन), जालंधर; एवं एडवोकेट हरनीत सिंह लाली उपस्थित रहे।
जारीकर्ता :
कार्यालय, विधायक पद्मश्री परगट सिंह
सचिव, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री



