
गोल्डन रेश्यो और इसकी गणितीय विशेषताओं’ पर विस्तार व्याख्यान

जालंधर: डी.ए.वी. कॉलेज, जालंधर के गणित विभाग द्वारा बंसी लाल गणितीय सोसायटी के सहयोग से डी.बी.टी. स्टार कॉलेज योजना के अंतर्गत 29 सितंबर 2026 को ‘गोल्डन रेश्यो और इसकी गणितीय विशेषताओं’ विषय पर एक विस्तार व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आई.आई.टी. पटना के प्रोफेसर डॉ. ओम प्रकाश मुख्य वक्ता एवं स्रोत-विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित रहे।
यह कार्यक्रम प्राचार्य डॉ. अनूप कुमार के कुशल नेतृत्व तथा गणित विभाग के अध्यक्ष प्रो. मोनीश अरोड़ा के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ तिलक समारोह एवं डी.ए.वी. गान से हुआ। इसके पश्चात सभी गणमान्य अतिथियों का पौधे भेंट कर स्वागत किया गया। प्रो. मोनीश अरोड़ा ने उपस्थित अतिथियों एवं विद्यार्थियों का औपचारिक स्वागत किया।
कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. कुँवर राजीव ने अपने उद्घाटन संबोधन में मुख्य वक्ता डॉ. ओम प्रकाश का स्वागत किया तथा विद्यार्थियों को निरंतर सीखने और अपने ज्ञान का विस्तार करने के लिए प्रेरित किया। बंसी लाल गणितीय सोसायटी की अध्यक्ष प्रो. जसमीन कौर ने मुख्य वक्ता का परिचय प्रस्तुत किया।
विस्तार व्याख्यान में ‘गोल्डन रेश्यो और इसकी गणितीय विशेषताओं’ तथा वास्तविक जीवन में इसके विभिन्न उपयोगों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। व्याख्यान के माध्यम से विद्यार्थियों को गणितीय सिद्धांतों को व्यावहारिक संदर्भों से जोड़ने का अवसर मिला। विषय की रोचक एवं व्यावहारिक प्रस्तुति ने विद्यार्थियों की गणित के प्रति जिज्ञासा को बढ़ाने के साथ-साथ उनकी विषयगत समझ को भी समृद्ध किया।
इस अवसर पर गणित विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. डॉ. पी. के. शर्मा तथा डी.बी.टी. के समग्र समन्वयक प्रो. डॉ. पुनीत पुरी भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. सीमा शर्मा, प्रो. साहिल नागपाल एवं प्रो. रंजीता गुगलानी की आयोजन समिति का विशेष योगदान रहा।
कार्यक्रम का मंच संचालन बी.एससी. प्रथम वर्ष की छात्रा नियति ने किया। अंत में गणित विभाग के डी.बी.टी. समन्वयक डॉ. आशु बहल ने औपचारिक धन्यवाद ज्ञापित किया।
यह व्याख्यान विद्यार्थियों के लिए विषय-विशेषज्ञ से प्रत्यक्ष रूप से सीखने, गणितीय अवधारणाओं को गहराई से समझने तथा व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करने का महत्वपूर्ण अवसर सिद्ध हुआ। इससे विद्यार्थियों में गणित के प्रति जिज्ञासा, अनुभव-आधारित अधिगम तथा कक्षा-कक्ष से परे विषय को समझने की प्रवृत्ति को प्रोत्साहन मिला। साथ ही, उन्हें प्रतिष्ठित संस्थान के विशेषज्ञ के साथ संवाद करने और गणित की सैद्धांतिक अवधारणाओं के व्यावहारिक पक्ष को समझने का अवसर भी प्राप्त हुआ



