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आदमपुर में श्री गुरु रविदास महाराज जी के 650वें प्रकाश पर्व को समर्पित ड्रोन शो की शानदार प्रस्तुति

आदमपुर, 12 अक्तूबर : श्री गुरु रविदास महाराज जी के 650वें प्रकाश पर्व को समर्पित पंजाब सरकार द्वारा करवाए जा रहे विशेष समारोहों की श्रृंखला के अंतर्गत सोमवार को आदमपुर में शानदार ड्रोन शो करवाया गया।

दशहरा ग्राउंड में करवाए गए इस शो के दौरान 500 ड्रोनों ने एक साथ आसमान में उड़ते हुए विभिन्न आकृतियां रचकर श्री गुरु रविदास महाराज जी के जीवन, दर्शन और महान विचारधारा को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया।

इस अवसर पर पंजाब राज्य सहकारी कृषि विकास बैंक के चेयरमैन पवन कुमार टीनू और संत प्रदीप दास जी महाराज (कठार वाले) द्वारा विशेष रूप से शिरकत की गई।

इस अवसर पर संबोधन करते हुए चेयरमैन पवन कुमार टीनू ने कहा कि श्री गुरु रविदास महाराज जी की शिक्षाएं आज भी पूरी मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री भगवंत सिंह मान की अगुवाई वाली पंजाब सरकार द्वारा ड्रोन शो के माध्यम से संगत को श्री गुरु रविदास महाराज जी के जीवन, बाणी और महान शिक्षाओं से जोड़ने का अनूठा उपक्रम किया गया है।

उन्होंने कहा कि श्री गुरु रविदास महाराज जी ने पूरी मानवता को समानता, भाईचारा, मेहनत, सच्चे आचरण और साझेदारी का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा आधुनिक तकनीक और रोशनी के संगम के माध्यम से श्री गुरु रविदास महाराज जी के महान संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।

श्री टीनू ने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा श्री गुरु रविदास महाराज जी के 650वें प्रकाश पर्व को पूरी श्रद्धा और बड़े स्तर पर मनाने के लिए विभिन्न समारोह करवाए जा रहे हैं, जिनमें कीर्तन दरबार, शैक्षणिक संस्थानों में सेमिनार, विशेष वैनों के माध्यम से डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन, मैराथन और अन्य उपक्रम शामिल है। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा गुरु जी की बाणी को दुनिया के कोने-कोने में पहुंचाने के लिए डेरा सचखंड बल्लां के पास 10 एकड़ से अधिक क्षेत्र में श्री गुरु रविदास जी बाणी अध्ययन केंद्र भी विकसित किया जा रहा है।

इससे पहले तप अस्थान श्री खुरालगढ़ साहिब से संत बाबा केवल सिंह, संत बाबा नरेश सिंह, संत बाबा सुखदेव सिंह, बाबा बलविंदर सिंह और बाबा दीपक सिंह द्वारा शब्द कीर्तन से संगत को निहाल किया गया।

इस अवसर पर एस.डी.एम. लाल विश्वास बैंस के अलावा बड़ी संख्या में संगत भी मौजूद थी।

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