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नानक बुरा भला कहे न कोई।जे को बुरा करे ता मन न लोई।

जालंधर:- मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में मां बगलामुखी जी के निमित सामुहिक दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया।
सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमान लवप्रीत से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन ,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई।

सिद्ध मां बगलामुखी धाम के प्रेरक प्रवक्ता नवजीत भारद्वाज जी ने दिव्य हवन यज्ञ पर उपस्थित प्रभु भक्तों को गुरुबाणी के प्रसिद्ध श्लोक का अनुसरण करते हुए कहा कि
*नानक बुरा भला कहे न कोई* ।
*जे को बुरा करे ता मन न लोई।*
*मुखहु अल्लाही भला कहाई।*
*दिलहु बड़ा फुरमई॥*
नवजीत भारद्वाज जी ने अर्थात् समझाते हुए कहा कि श्री गुरु नानक देव जी की यह पावन वाणी मानव जीवन के लिए एक गहन नैतिक और आध्यात्मिक संदेश प्रस्तुत करती है। आज के तनावपूर्ण और मतभेदों के वातावरण में यह वाणी और भी अधिक प्रासंगिक हो जाती है। श्री गुरु नानक देव जी स्पष्ट करते हैं कि किसी को बुरा-भला कहना न केवल दूसरे को आहत करता है, बल्कि स्वयं के मन को भी अशुद्ध करता है। यदि कोई व्यक्ति हमारे साथ बुरा व्यवहार करता है, तो भी उस नकारात्मकता को अपने मन में स्थान नहीं देना चाहिए। द्वेष, क्रोध और प्रतिशोध की भावना आत्मिक उन्नति में बाधक बनती है। सच्चा संयम वही है, जिसमें मन शांत और विवेकपूर्ण बना रहे।
नवजीत भारद्वाज जी इस वाणी के एक महत्वपूर्ण पक्ष प्रभु भक्तों को समझाते है कि धर्म केवल बाहरी आडंबर तक सीमित नहीं होना चाहिए। यदि मुख से ईश्वर का नाम लिया जाए, परंतु हृदय में कटुता और अहंकार भरा हो, तो ऐसा धर्म अधूरा है। श्री गुरु नानक देव जी प्रेम, क्षमा और उदारता को ही सच्चे धर्म की पहचान मानते हैं।
नवजीत भारद्वाज जी ने प्रभु भक्तों को गहराई से समझाते हुए प्रसिद्ध प्रसंग सुनाया कि एक दिन कुछ बच्चे बेर तोडऩे के लिए पेड़ पर पत्थर मार रहे थे। दुर्भाग्यवश, उन्हीं में से एक पत्थर उछलकर महाराजा रणजीत सिंह के सिर पर जा लगा। उपस्थित लोग क्रोधित हो उठे और बच्चे को दंड देने की बात करने लगे। परंतु महाराजा का उत्तर सभी को चकित कर देने वाला था। उन्होंने बच्चे को सजा देने के बजाय अनाज और स्वर्ण मुद्राएँ भेंट कीं और कहा— *यदि एक बेजान बेर का पेड़ पत्थर खाने के बाद भी मीठे फल देता है, तो मैं एक जीवित राजा होकर पत्थर मारने वाले को दंड कैसे दे सकता हूँ? मेरा कर्तव्य तो उस पेड़ से भी बड़ा होना चाहिए।* यह कथन केवल एक राजा की उदारता नहीं, बल्कि राजधर्म और मानव धर्म का उच्चतम उदाहरण है।
नवजीत भारद्वाज जी ने प्रवचनों पर विराम लगाते हुए कहा कि ईश्वर एक है और उसे पाने का मार्ग सभी के प्रति समान भाव, निर्मल चिंतन और विशाल हृदय में निहित है। जब मनुष्य अपने दिल को बड़ा करता है और दूसरों की भूलों को क्षमा करना सीखता है, तभी वह वास्तव में ईश्वर के निकट पहुँचता है।

इस अवसर पर श्वेता भारद्वाज,सरोज बाला, समीर कपूर, अमरेंद्र कुमार शर्मा,सौरभ मरवाहा, मुनीष मैहरा,रिंकू सैनी, कमलजीत,धर्मपालसिंह, अमरजीत सिंह, उदय ,अजीत कुमार , नरेंद्र ,रोहित भाटिया,बावा जोशी,राकेश शर्मा, अमरेंद्र सिंह, विनोद खन्ना, नवीन , प्रदीप, सुधीर, सुमीत ,जोगिंदर, मनीष शर्मा, डॉ गुप्ता,सुक्खा अमनदीप,परमजीत सिंह, दानिश, रितु, कुमार,गौरी केतन शर्मा,सौरभ ,शंकर, संदीप,रिंकू,प्रदीप वर्मा, गोरव गोयल, मनी ,नरेश,अजय शर्मा,दीपक , किशोर,प्रदीप , प्रवीण,राजू, गुलशन शर्मा,संजीव शर्मा, रोहित भाटिया,मुकेश, रजेश महाजन ,अमनदीप शर्मा, गुरप्रीत सिंह, विरेंद्र सिंह, अमन शर्मा, ऐडवोकेट शर्मा,वरुण, नितिश,रोमी, भोला शर्मा,दीलीप, लवली, लक्की, मोहित , विशाल , अश्विनी शर्मा , रवि भल्ला, भोला शर्मा, जगदीश, नवीन कुमार, निर्मल,अनिल,सागर,दीपक,दसोंधा सिंह, प्रिंस कुमार, पप्पू ठाकुर, दीपक कुमार, नरेंद्र, सौरभ,दीपक कुमार, नरेश,दिक्षित, अनिल, कमल नैयर, अजय,बलदेव सिंह सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।

हवन यज्ञ उपरांत लंगर भंडारे का आयोजन किया गया।

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