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डॉ. पार्था बिस्वास, माननीय सदस्य, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने किया सीटी यूनिवर्सिटी का दौरा

सीटी यूनिवर्सिटी में भारत सरकार के राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) के माननीय सदस्य डॉ. पार्था बिस्वास ने विश्वविद्यालय का दौरा किया। उनके साथ नवीन रोहिला, निजी सचिव, एवं परमिंदर सिंह, निदेशक, बतौर राज्य अतिथि उपस्थित रहे।

इस दौरे का मुख्य उद्देश्य संवैधानिक सुरक्षा प्रावधानों, सामाजिक न्याय, समान अवसरों तथा समाज के सभी वर्गों के विद्यार्थियों के लिए समावेशी शैक्षणिक वातावरण के महत्व पर जागरूकता बढ़ाना रहा।

इस अवसर पर सीटी यूनिवर्सिटी के प्रो-चांसलर डॉ. मनबीर सिंह ने कहा, “डॉ. पार्था बिसवास का सीटी यूनिवर्सिटी में स्वागत करना हमारे लिए गौरव की बात है। सामाजिक न्याय, संवैधानिक अधिकारों और समावेशी विकास पर उनके विचार हमारे विद्यार्थियों को जिम्मेदार नागरिक बनने तथा समाज के विकास में सार्थक योगदान देने के लिए प्रेरित करेंगे। सीटी यूनिवर्सिटी प्रत्येक विद्यार्थी को समान अवसर और ऐसा वातावरण प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है, जहां वह सीख सके, आगे बढ़ सके और अपनी क्षमता के अनुरूप उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सके।”

सीटी यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. नितिन टंडन ने कहा, “डॉ. पार्था बिसवास के साथ हुई बातचीत ने विद्यार्थियों और अकादमिक समुदाय को समानता, सशक्तिकरण और सामाजिक जिम्मेदारी के संबंध में महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रदान किया। ऐसे प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों के दौरे शैक्षणिक संस्थानों और संवैधानिक निकायों के बीच सार्थक संवाद को बढ़ावा देते हैं और विद्यार्थियों को अधिक न्यायपूर्ण समाज के निर्माण में अपनी भूमिका समझने में मदद करते हैं।”

डॉ. पार्था बिसवास ने जागरूकता, समानता और सशक्तिकरण का दिया संदेश

अपने संबोधन में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, भारत सरकार के माननीय सदस्य डॉ. पार्था बिसवास ने सीटी यूनिवर्सिटी द्वारा शिक्षा एवं विद्यार्थी विकास के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने शिक्षा, संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूकता, समान अवसर और सशक्तिकरण को समावेशी विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने विद्यार्थियों को अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहने तथा शिक्षा को व्यक्तिगत विकास और सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विद्यार्थियों के लिए ऐसा वातावरण तैयार किया जाना चाहिए, जो गरिमा, समानता, सम्मान और सभी के लिए अवसर पर आधारित हो।

यह दौरा विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों एवं अकादमिक समुदाय के साथ सार्थक संवाद के साथ संपन्न हुआ और समावेशी शिक्षा, सामाजिक न्याय एवं राष्ट्र निर्माण के प्रति साझा प्रतिबद्धता को और मजबूत किया।
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