

जालंधर : संगीत को बढ़ावा देने और बच्चों को कला के प्रति जागरूक करने के लिए केंद्रीय विद्यालय 2 जालंधर कैंट में सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र के सहयोग से निःशुल्क संगीत एवं नृत्य कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को स्वर, सप्तक, लय, ताल, संगीत के विभिन्न आयामों तथा नियमित रियाज़ के महत्व के बारे में रोचक एवं संवादात्मक ढंग से जानकारी प्रदान की गई। विद्यार्थियों ने विभिन्न गतिविधियों में भाग लिया तथा संगीत से संबंधित अपने प्रश्न भी पूछे। विद्यार्थियों को बताया गया कि संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि एकाग्रता, आत्म-अभिव्यक्ति, रचनात्मकता एवं व्यक्तित्व विकास का प्रभावशाली साधन भी है। इसके साथ ही संगीत के क्षेत्र में उपलब्ध विभिन्न शैक्षणिक एवं रोजगार संबंधी संभावनाओं के बारे में भी जानकारी दी गई।इसके साथ ही जालंधर में ध्यान कक्ष स्कूल के प्रारंभ होने की जानकारी विद्यार्थियों एवं उपस्थित लोगों के साथ साझा की गई। उन्होंने ध्यान कक्ष स्कूल के उद्देश्य तथा बच्चों के समग्र विकास में ध्यान, समानता और सकारात्मक सोच के महत्व के बारे में जानकारी दी। यह स्कूल पूरी तरह से निःशुल्क है और इसमें किसी भी प्रकार की फीस नहीं ली जाएगी। ध्यान कक्ष में प्रवेश के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं है—बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर आयु वर्ग का व्यक्ति इसमें प्रवेश लेकर ध्यान, सकारात्मक सोच, समानता एवं मानवीय मूल्यों से जुड़ी शिक्षा प्राप्त कर सकता है ।संगीत की कक्षा प्रोफेसर गीतिका द्वारा ली गई,नृत्य का प्रशिक्षण ऋतिका मेहरा द्वारा प्रदान किया गया। तबले पर जसमेलराम ने संगत करते हुए विद्यार्थियों को ताल एवं लय की जानकारी दी।
कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को सत्युग दर्शन संगीत कला केंद्र के Advanced Courses के बारे में विस्तृत जानकारी केंद्र की इंचार्ज मीना सिक्का द्वारा दी गई। उन्होंने विद्यार्थियों को कला के क्षेत्र में आगे सीखने और अपनी प्रतिभा को निखारने के अवसरों से अवगत कराया।



