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पंजाब ललित कला अकादमी,चंडीगढ़ ललित कला अकादमी एवं एपीजे एजुकेशन के संयुक्त सौजन्य से पहली बार पंजाब एवं चंडीगढ़ की 70 महिला कलाकारों की कलाकृतियों पर आधारित डॉ सत्यपॉल आर्ट गैलरी विरसा विहार में वार्षिक कला प्रदर्शनी का भव्य आगाज़

पंजाब ललित कला अकादमी,चंडीगढ़ ललित कला अकादमी एवं एपीजे एजुकेशन के संयुक्त सौजन्य से पहली बार पंजाब एवं चंडीगढ़ की 70 महिला कलाकारों की कलाकृतियों पर आधारित डॉ सत्यपॉल आर्ट गैलरी विरसा विहार में वार्षिक कला प्रदर्शनी का भव्य आगाज़ किया गया।एपीजे एजुकेशन की निदेशक डॉ सुचरिता शर्मा ने मुख्य अतिथि श्री आदित्य एस वारियर (IPS) डिप्टी कमिश्नर आफ पुलिस (सिटी),विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित पीकेएफ के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री आलोक सोंधी, पंजाब आर्ट काउंसिल के अध्यक्ष,प्रतिष्ठित कवि, सुविख्यात कलाकार श्री स्वर्णजीत सिंह सावी, चंडीगढ़ ललित कला अकादमी के अध्यक्ष श्री भीम मल्होत्रा,प्रैजीडैंट श्री सुमीत दुआ, एपीजे कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट्स जालंधर की प्राचार्य डॉ नीरजा ढींगरा का हार्दिक अभिनंदन करते हुए बताया कि एपीजे एजुकेशन के संस्थापक अध्यक्ष डॉ सत्यपॉल जी ललित कलाओं के विकास को लेकर बहुत ही संवेदनशील एवं जागरूक थे और उनका प्रयास इन कलाओं को जन-जन तक पहुंचा कर एक ऐसे संसार की रचना करना था जिसमें सब एक-दूसरे की भावनाओं को समझ सके और दुःख,सुख में एक दूसरे का साथ दे सके।आज उनकी सुपुत्री श्रीमती सुषमा पाल बर्लिया जोकि एपीजे एजुकेशन एवं एपीजे सत्या एंड स्वर्ण ग्रुप की अध्यक्ष हैं तथा एपीजे सत्या यूनिवर्सिटी के चांसलर पद को सुशोभित कर रही है वह भी अपने पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए हमेशा से ही भारत की ललित कलाओं के संरक्षण एवं संवर्द्धन में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही है और इस कला प्रदर्शनी का आयोजन भी उन्हीं की प्रेरणा,प्रोत्साहन एवं दूरदर्शिता का परिणाम है। एपीजे एजुकेशन जालंधर की निदेशक डॉ सुचरिता शर्मा ने बताया कला के विविध रूपों पेंटिंग्स, स्कल्पचर्स, मिक्स मीडिया वीडियो इंस्टॉलेशन, ग्राफिक्स, एवं हैंड एंब्रॉयडरी का आनंद कला प्रेमी ले सकेंगे, उन्होंने कहा कि यह कलाकृतियां जहां एक तरफ प्रकृति की छटा बिखेर रही हैं वहां दूसरी तरफ समसामयिक मुद्दों को भी महिला कलाकारों ने अपनी कलाकृतियों के माध्यम से अभिव्यक्त करने का बाखूबी प्रयास किया है। उन्होंने कहा मुझे यह बताते हुए हार्दिक प्रसन्नता हो रही है कि प्रदर्शनी में एक विशेष क्षेत्र दिव्यांग महिला कलाकारों के लिए भी रखा गया है जिसमें रहनुमा रानी, वैशाली, रक्तिमा,पल्लवी एवं सोनम जैन ने इस कला प्रदर्शनी में अपनी कल्पनाशीलता का बहुत सुंदर परिचय दिया है। इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए मुख्य अतिथि श्री आदित्य ने बताया कि कला प्रदर्शनी में पुलिस विभाग में कार्यरत व्यक्ति को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाना अपने आप में उसे न केवल गौरवान्वित करने वाला है बल्कि दो विभिन्न दिशाओं में उन्नत रूपों को एक जगह लाकर एक नई ही उड़ान भरने की कोशिश करना है जोकि निश्चित रूप से समाज को भी लाभान्वित करने वाली होगी,श्री स्वर्णजीत सिंह सावी ने कहा की नारी अपने जिन भावों को व्यक्तिगत रूप से व्यक्त नहीं कर पाती उसको वह कला के किसी भी रूप में बाखूबी व्यक्त करती है इससे न हम केवल नारी मन की गहराई को समझ पाते हैं बल्कि उसके अस्तित्व की खूबसूरती भी हमारे सामने अभिव्यक्त होती है।श्री भीम मल्होत्रा जी ने अपने भाव व्यक्त करते हुए कहा विशेष रूप से जालंधर के कला प्रेमियों के लिए यह एक सुनहरी अवसर होगा जब वह कला के विभिन्न रूपों की प्रदर्शनी एक ही छत के नीचे देख सकेंगे, उन्होंने कहा कि दो अकादमियों को एक ही छत के नीचे इकट्ठे लाने में एपीजे एजुकेशन का महत्वपूर्ण योगदान रहा है और जिस तरह से पंजाब एवं चंडीगढ़ के विभिन्न जिलों की नारी कलाकारों को यहां अवसर दिया गया है उसको देखना निश्चित रूप से हमारे लिए गर्व का विषय है।इस अवसर पर श्री आलोक सोंधी जी ने कहा यह कला प्रदर्शनी हमें याद करवाती है कि पंजाब केवल कृषि प्रधान प्रदेश ही नहीं है बल्कि यहां ललित कलाओं की भी समृद्ध परंपरा रही है और यह प्रदर्शनी निश्चित रूप से हमें हमारी विरासत की याद दिलाती है।
डॉ नीरजा ढींगरा ने उपस्थित अतिथिवृंद का हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी के सहयोग से ही यह कला प्रदर्शनी सफल बनती है, उन्होंने कहा मेरा विश्वास है कि भविष्य में भी ऐसी कला प्रदर्शनियां लगती ही रहेगी और लोगों के मार्गदर्शन का एक जरिया बनेंगी। उन्होंने बताया कि 11 सितंबर 2026 से शुरू हुई यह कला प्रदर्शनी 14 सितंबर 2026 तक सुबह 10:00 से शाम 7:00 तक कला प्रेमियों के लिए खुली रहेगी। डॉक्टर सुचारिता शर्मा ने इस कला प्रदर्शन को सफल बनाने में अपने सहयोग देने के लिए श्री अनिल गुप्ता और श्री बासुदेव बिश्वास के प्रयासों की भरपूर सराहना की।

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