

जालंधर:- मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में मां बगलामुखी जी के निमित्त सामुहिक निशुल्क दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया।
सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमान अविनाश सोंधी से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन ,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई।
सिद्ध माँ बगलामुखी धाम में आयोजित दिव्य हवन यज्ञ के दौरान पूरा धाम आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति की अलौकिक आभा से सराबोर हो उठा। यज्ञ कुंड में प्रज्वलित पावन अग्नि, वैदिक मंत्रों की गूंज और माँ बगलामुखी के जयकारों के बीच उपस्थित श्रद्धालु गहन श्रद्धा और भक्ति में लीन दिखाई दिए। वातावरण इतना दिव्य था मानो प्रत्येक कण में माँ बगलामुखी की कृपा का स्पंदन अनुभव हो रहा हो। इस अवसर पर धाम के पीठ उपासक नवजीत भारद्वाज ने बाबा फरीद जी के पावन वचनों
*फरीदा काले मैडे कपड़े, काला मैडा वेसु।*
*गुनही भरिआ मैं फिरां, लोकु कहै दरवेसु।*
का उल्लेख करते हुए कहा कि बाबा फरीद जी ने इन पंक्तियों के माध्यम से से हमें बाहरी दिखावे और अंदर की सच्चाई का अंतर समझाते हैं। बाबा फरीद जी कहते हैं मेरे कपड़े काले हैं, मेरा वेश भी काला है। लोग मुझे दरवेश कहते हैं, लेकिन मेरा मन तो अभी भी गुणों और अवगुणों से भरा हुआ है।
नवजीत भारद्वाज जी कहते है कि यह पंक्तियां केवल कपड़ों के रंग की बात नहीं करती, बल्कि मन के रंग की बात करती है। हमने बाहर से धार्मिक रूप धारण कर लिया, माथे पर तिलक लगा लिया, हाथ में माला पकड़ ली, धार्मिक स्थानों पर जाने लगे लेकिन अगर मन में अहंकार, क्रोध, ईर्ष्या, छल और किसी के प्रति बुरा भाव है, तो प्रभु की नजर में हमारा असली रूप क्या है? परमात्मा हमारे कपड़े नहीं देखते, वह तो हमारा हृदय देखते हैं।
नवजीत भारद्वाज जी माँ भक्तों को धार्मिक गहराई से समझाते हुए कहा कि सच्चा दरवेश वह नहीं जिसके कपड़े साधु जैसे हों। सच्चा दरवेश वह है जिसका मन सरल हो। जिसकी वाणी मीठी हो। जिसके कर्मों में दया हो। जिसके हृदय में क्षमा हो और जिसके अंदर हर जीव के लिए प्रेम हो।
प्रवचन के दौरान नवजीत भारद्वाज जी ने भगवान जगन्नाथ की परम भक्त कर्माबाई का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि कर्माबाई को कठिन पूजा-पाठ के नियमों का ज्ञान नहीं था, लेकिन उनके हृदय में भगवान के प्रति अपार प्रेम था। वह रोज प्रेमपूर्वक बाजरे की खिचड़ी बनाकर भगवान को अपने बच्चे की तरह खिलाती थीं। मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ उनके इसी निष्कपट प्रेम से प्रसन्न होकर स्वयं उनकी कुटिया में खिचड़ी खाने आते थे। उन्होंने कहा कि कर्माबाई की कथा हमें सिखाती है कि भगवान को दिखावा नहीं, भक्त का सच्चा भाव चाहिए। पूजा की विधि से अधिक महत्वपूर्ण मन की पवित्रता है।
प्रवचन के समापन पर उन्होंने कहा कि कपड़ों का रंग चाहे कोई भी हो, बस मन का रंग प्रभु के प्रेम में रंग जाना चाहिए। क्योंकि *दुनिया हमें दरवेश कहे या न कहे, जब परमात्मा हमारे दिल को देख कर कह दे, ‘‘यह मेरा है’’* *तो समझिए जीवन की सबसे बड़ी कमाई मिल गई।*
नवजीत भारद्वाज ने बताया कि *मां बगलामुखी जी को रविवार 16 अगस्त को 56 भोग* लगाएं जा रहें हैं उन्होंने ने सभी मां भक्तों को समारोह में सादर सपरिवार आमंत्रित किया।
इस अवसर पर श्वेता भारद्वाज,राकेश प्रभाकर,पूनम प्रभाकर,समीर कपूर,जानू थापर,ऋषभ कालिया, उदय ,अजीत कुमार , नरेंद्र ,रोहित भाटिया,राकेश शर्मा, नवीन , प्रदीप, सुधीर,मनीष शर्मा, डॉ गुप्ता,दानिश, रितु, कुमार,गौरी केतन शर्मा,सौरभ ,शंकर, संदीप,रिंकू,प्रदीप वर्मा, गोरव गोयल, मनी ,नरेश,अजय शर्मा,दीपक , किशोर,प्रदीप , प्रवीण,राजू,संजीव शर्मा, रोहित भाटिया,मुकेश, रजेश महाजन ,अमनदीप शर्मा, गुरप्रीत सिंह, विरेंद्र सिंह, अमन शर्मा,वरुण, नितिश,रोमी, भोला शर्मा,दीलीप, लवली, लक्की, रवि भल्ला,जगदीश, नवीन कुमार, निर्मल,अनिल,सागर,दीपक,दसोंधा सिंह, प्रिंस कुमार,दीपक कुमार, नरेंद्र, सौरभ, नरेश,दिक्षित,अजय सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।



