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मुरादनगर में फ़र्ज़ी दवाई बनाने वाले एक और गिरोह का भंडाफोड़

गाजियाबाद : मुरादनगर में पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर अपनी तिजोरियां भर रहा था। लिवर को ठीक करने के लिए दुनिया भर में मशहूर दवा ‘Liv-52’ के नाम पर यह गैंग बड़े पैमाने पर नकली गोलियां बनाकर बाजार में खपा रहा था। पुलिस की स्वॉट टीम और मुरादनगर पुलिस ने एक संयुक्त ऑपरेशन चलाकर पांच जालसाजों को रंगे हाथ दबोचा है, जो लंबे समय से फर्जी दस्तावेजों के दम पर यह गोरखधंधा चला रहे थे। इस गिरोह का काम करने का तरीका बेहद शातिर था। असली कंपनी ने जब पुलिस को सूचना दी कि उनके नाम से नकली दवाइयां बेची जा रही हैं, तो जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। ये आरोपी बाहर की लैब से साधारण गोलियां बनवाते थे और फिर अलग-अलग जगहों से छपवाए गए नकली रैपर, डिब्बे और ढक्कन का इस्तेमाल कर उन्हें हूबहू असली जैसा पैक कर देते थे। इतना ही नहीं, पुलिस को झांसा देने के लिए इन्होंने फर्जी GST नंबर और नकली ड्रग लाइसेंस तक बनवा रखे थे।पकड़े गए आरोपियों ने कबूला कि एक डिब्बी तैयार करने में उन्हें महज 35 से 40 रुपये का खर्च आता था, जिसे वे बाजार में 100 रुपये या उससे अधिक में बेचते थे। विशेषज्ञों का कहना है कि Liv-52 का इस्तेमाल फैटी लिवर और पाचन सुधारने के लिए किया जाता है, लेकिन इन नकली गोलियों के सेवन से मरीजों का लिवर ठीक होने के बजाय पूरी तरह खराब हो सकता था। पुलिस ने छापेमारी के दौरान 50 हजार नकली टैबलेट, हजारों की संख्या में खाली डिब्बियां, ढक्कन और पैकिंग का सामान बरामद किया है।

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