दिल्ली: भारत की मुफ्त यूपीआई भुगतान प्रणाली में अब तक का सबसे बड़ा नीतिगत बदलाव होने की संभावना है। केंद्र सरकार ने संसद में ‘पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट’ में संशोधन के लिए प्रस्ताव पेश किया है, जिससे भविष्य में चुनिंदा यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट शुल्क लगाने का रास्ता साफ हो सकता है।वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए इस संशोधन के तहत फिलहाल कोई तत्काल शुल्क लागू नहीं किया गया है, बल्कि एक कानूनी ढांचा तैयार किया जा रहा है। चर्चा के अनुसार, 2000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर 0.3 प्रतिशत से 0.5 प्रतिशत तक का ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ लगाया जा सकता है।राहत की बात यह है कि इस शुल्क का बोझ आम उपभोक्ताओं पर पड़ने की संभावना नहीं है। यह शुल्क केवल उन व्यापारियों पर लागू होने की उम्मीद है जिनका सालाना टर्नओवर 1.5 करोड़ रुपये से अधिक है। इसका मतलब है कि आपके पास की छोटी दुकानों और छोटे कारोबारियों के लिए यूपीआई लेनदेन पहले की तरह ही मुफ्त बना रहेगा