डॉ. बी. आर. अंबेडकर राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) जालंधर और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जम्मू ने 21 जुलाई 2026 को संयुक्त पीएचडी कार्यक्रम शुरू करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस कार्यक्रम के तहत शोधार्थियों को संयुक्त डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (पीएचडी) डिग्री प्रदान की जाएगी।
इस समझौते पर एनआईटी जालंधर के निदेशक प्रो. बिनोद कुमार कनौजिया और आईआईटी जम्मू के निदेशक प्रो. मनोज सिंह गौर ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर प्रो. रमन बेदी, डीन (शैक्षणिक), एनआईटी जालंधर, सहित दोनों संस्थानों के अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे। इस सहयोग का उद्देश्य दोनों संस्थानों के बीच शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करना, बहुविषयक शोध को बढ़ावा देना तथा शोधार्थियों को दोनों संस्थानों की विशेषज्ञता, शोध सुविधाओं और शैक्षणिक संसाधनों का लाभ उपलब्ध कराना है।
इस कार्यक्रम के तहत पीएचडी शोधार्थियों का पंजीकरण एनआईटी जालंधर और आईआईटी जम्मू, दोनों संस्थानों में होगा। वे दोनों संस्थानों के शिक्षकों के संयुक्त मार्गदर्शन में अपना शोध कार्य करेंगे। कार्यक्रम के अनुसार, प्रत्येक शोधार्थी को सामान्यत कम से कम 12 महीने मेजबान संस्थान में बिताने होंगे। इस दौरान उन्हें वहां की प्रयोगशालाओं, शोध सुविधाओं, शैक्षणिक सेवाओं और व्यावसायिक विकास से जुड़ी सुविधाओं का लाभ मिलेगा। यह संयुक्त पीएचडी कार्यक्रम सभी शोध क्षेत्रों में उपलब्ध होगा। इसके लिए संबंधित विषय में उपयुक्त विशेषज्ञता रखने वाले शिक्षक और स्वीकृत शोध प्रस्ताव होना आवश्यक होगा।
यह समझौता संयुक्त शोध को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश तय करता है। इसके तहत संयुक्त शोध मार्गदर्शन, बौद्धिक संपदा (इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी) का प्रबंधन, शोध नैतिकता, शोधार्थियों की शैक्षणिक प्रगति की निगरानी तथा दोनों संस्थानों की सुविधाओं के उपयोग से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। यह कार्यक्रम संयुक्त शोध को बढ़ावा देगा, शोधार्थियों और शिक्षकों को एक-दूसरे के संस्थान में कार्य करने के अधिक अवसर देगा तथा दोनों संस्थानों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करेगा।
इस अवसर पर एनआईटी जालंधर के निदेशक प्रो. बिनोद कुमार कनौजिया ने कहा, आईआईटी जम्मू के साथ यह सहयोग गुणवत्तापूर्ण शोध और शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। संयुक्त पीएचडी कार्यक्रम से शोधार्थियों को दोनों संस्थानों की विशेषज्ञता और संसाधनों का लाभ मिलेगा।