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पी सी एम एस डी कॉलेज फॉर विमेन, जालंधर के महिला सशक्तिकरण सेल ने ‘सुरक्षा, सहमति और आत्म-सम्मान: सीमा तय करना जानना’ विषय पर एक गेस्ट लेक्चर आयोजित किया~

महिला सशक्तिकरण सेल ने पी सी एम एसडी कॉलेज फॉर विमेन, जालंधर के मनोविज्ञान विभाग के साथ मिलकर “सुरक्षा, सहमति और आत्म-सम्मान: सीमा तय करना जानना” विषय पर एक ज्ञानवर्धक गेस्ट लेक्चर आयोजित किया।

सांझ राहत केंद्र के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को व्यक्तिगत सुरक्षा, सहमति, आत्म-सम्मान और स्वस्थ सीमाओं को पहचानने व उन्हें बनाए रखने के महत्व के बारे में जागरूक करना था।

इस सत्र में सांझ राहत केंद्र के विशेषज्ञों की एक प्रतिष्ठित टीम शामिल हुई, जिनके काउंसलिंग और मनोसामाजिक सहायता (psychosocial support) के अनुभव ने चर्चा को काफी गहराई प्रदान की। कार्यक्रम में चंडीगढ़-मोहाली की हेड काउंसलर और इंचार्ज काउंसलर सुश्री हरलीन कौर शामिल थीं। उनके साथ सांझ राहत केंद्र, सिविल अस्पताल, जालंधर की काउंसलर सुश्री तनवीर कौर और उसी केंद्र की काउंसलर सुश्री गुरसिमरन कौर भी मौजूद थीं।

विशेषज्ञों ने छात्रों के साथ सहमति, शारीरिक स्वायत्तता (bodily autonomy), व्यक्तिगत सीमाओं और आत्म-सम्मान के महत्व पर सार्थक बातचीत की। सत्र में इस बात पर जोर दिया गया कि सुरक्षा का अर्थ केवल खतरे का न होना ही नहीं है, बल्कि असुविधा को पहचानने, अपनी सीमाएं बताने और समय पर मदद मांगने की क्षमता भी है। वक्ताओं ने छात्रों को ऐसे व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाने के महत्व के प्रति जागरूक किया जो उनकी गरिमा या भलाई को नुकसान पहुंचाता है, और उन्हें मुश्किल स्थितियों का सामना जागरूकता, आत्मविश्वास और सही जानकारी के आधार पर लिए गए फैसलों के साथ करने के लिए प्रोत्साहित किया।

काउंसलिंग टीम ने सांझ राहत केंद्र द्वारा उपलब्ध सहायता प्रणालियों के बारे में भी बताया, जिसमें काउंसलिंग और मनोसामाजिक सहायता, संकट के समय मदद (crisis intervention), मामले का आकलन, सुरक्षा योजना बनाना और जरूरत पड़ने पर चिकित्सा, पुलिस और कानूनी अधिकारियों के साथ उचित समन्वय और रेफरल शामिल हैं। छात्रों को सांझ राहत केंद्र के बारे में जानकारी दी गई और उन्हें उन तरीकों से परिचित कराया गया जिनके माध्यम से परेशानी का सामना कर रही महिलाएं सहायता और पेशेवर मार्गदर्शन प्राप्त कर सकती हैं।

यह लेक्चर जागरूकता कार्यक्रम की पारंपरिक सीमाओं से आगे बढ़कर छात्रों को आत्म-सम्मान को आत्म-समर्थन (self-advocacy) के एक सक्रिय रूप के रूप में देखने के लिए प्रोत्साहित करने वाला रहा। इस बातचीत ने सोचने-समझने के लिए एक सुरक्षित और जानकारीपूर्ण माहौल दिया, जिससे छात्र यह समझ पाए कि सीमाएँ तय करना टकराव नहीं, बल्कि अपनी गरिमा, अपनी मर्ज़ी और अपनी भलाई को बनाए रखने का तरीका है। इस तरह, इस प्रोग्राम ने संस्थान के उस संकल्प को और मज़बूत किया जिसके तहत कैंपस में ऐसा माहौल बनाया जा रहा है जहाँ जागरूकता से आत्मविश्वास और सशक्तिकरण से काम करने की प्रेरणा मिलती है।

यह प्रोग्राम महिलाओं पर केंद्रित उन पहलों के प्रति संस्थान की लगातार प्रतिबद्धता को दिखाता है, जो युवा महिलाओं को जागरूकता, मुश्किलों का सामना करने की क्षमता और कठिन हालात से निपटने का आत्मविश्वास देती हैं।

अध्यक्ष श्री नरेश बुधिया, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट श्री विनोद दादा, मैनेजिंग कमेटी के अन्य सदस्य और प्रिंसिपल डॉ. पूजा पराशर ने सेल और उसके इंचार्ज डॉ. रेनू सिंह और श्रीमती शिखा पुरी की तारीफ़ की। उन्होंने ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने के लिए उनकी सराहना की जो शिक्षा को क्लासरूम से आगे ले जाते हैं और ज़िम्मेदार, आत्मविश्वासी और सशक्त व्यक्ति तैयार करते हैं। डॉ. आबरू शर्मा, डॉ. संदीप कौर, डॉ. अंजू बाला, श्रीमती प्रियंका और सुश्री गोपिका भी इस कार्यक्रम में शामिल हुईं।

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