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चाकू लगने के बावजूद कैसे संभाला और कैसे बचाई 174 लोगों की जान , जाने

दिल्ली: दुबई से तेल अवीव जा रही ‘फ्लाईदुबई’ की उड़ान को दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश कर रहे सह-पायलट का मुकाबला कर ‘नायक’ के तौर पर उभरे भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार के मित्र और पेशे से डॉक्टर जिनीत शाह ने कहा कि चाकू लगने के बावजूद अपनी ”मसल मेमोरी” के कारण वह एक बड़ी दुर्घटना को टालने में कामयाब रहे। मुंबई के घाटकोपर इलाके में पायलट के परिवार के पड़ोसी और मूत्र रोग विशेषज्ञ जिनीत शाह ने कहा, ‘स्मित सच में बहुत अच्छे, दयालु और परिपक्व इंसान हैं।’ उन्होंने कहा, ”मैं काफी समय से उनके संपर्क में था लेकिन हाल में वह दुबई चले गए इसलिए नियमित बातचीत नहीं हो पाती थी। हालांकि, जब भी वे यहां अपने माता-पिता से मिलने आते थे तो हमारी बात होती थी।’ शाह ने कहा, ‘स्मित एक अच्छे पिता और बहुत जिम्मेदार इंसान हैं। उनके परिवार में दो बच्चे समेत चार सदस्य हैं।’ डॉक्टर ने बताया कि स्मित में तुरंत फैसले लेने की काबिलियत थी। वह पायलटों को प्रशिक्षण देते हैं और उनकी अपनी अकादमी भी है; शायद इसीलिए उन्हें पता था कि आपात स्थिति में क्या करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘मसल मेमोरी की वजह से ही वह चाकू लगने के बावजूद हालात को संभाल पाए और 174 लोगों की जान बचा सके।’ मसल मेमोरी’ एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें बार-बार अभ्यास करने के कारण हमारा दिमाग और मांसपेशियां किसी काम को इस तरह सीख जाते हैं कि हम उसे बिना ज्यादा सोचे-समझे स्वत: करने लगते हैं। पायलट की अब एक नायक की तरह सराहना की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘कैप्टन स्मित मच्छार एक नायक हैं। बेहद खतरनाक स्थिति में और गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने दूसरों की जान बचाने के लिए अपार साहस और अटूट संकल्प का परिचय दिया। भारत को कैप्टन मच्छार पर गर्व है।

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