
डी.ए.वी. यूनिवर्सिटी में ‘बियॉन्ड द बुक्स: नेविगेटिंग लाइब्रेरीज़ ई-रिसोर्सेज’ विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित

डी.ए.वी. यूनिवर्सिटी, जालंधर द्वारा शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों को डिजिटल लाइब्रेरी संसाधनों तथा शोध डेटाबेस के प्रभावी उपयोग की जानकारी देने के उद्देश्य से ‘बियॉन्ड द बुक्स: नेविगेटिंग लाइब्रेरीज़ ई-रिसोर्सेज’ विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह वर्कशॉप यूनिवर्सिटी के नॉलेज रिसोर्स सेंटर और इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस सेल द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित की गई।
वर्कशॉप के उद्घाटन समारोह में यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार प्रो. एस. के. अरोड़ा, लाइब्रेरी एडवाइजरी कमेटी के चेयरमैन प्रो. के. एन. कौल, नॉलेज रिसोर्स सेंटर की प्रभारी एवं सदस्य सचिव श्रीमती मनिंदर कौर सूद, इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस सेल की निदेशक डॉ. सपना सेठी तथा लाइब्रेरी एडवाइजरी कमेटी के सदस्य डॉ. यशबीर सिंह, डॉ. आशुतोष शर्मा, डॉ. धर्मेंद्र जगलान और डॉ. संदीप कुमार के अलावा विभिन्न डीन एवं कोऑर्डिनेटर उपस्थित रहे।
इस अवसर पर संबोधित करते हुए रजिस्ट्रार प्रो. (डॉ.) एस. के. अरोड़ा ने कहा कि आधुनिक यूनिवर्सिटी में लाइब्रेरी अकादमिक उत्कृष्टता का वातावरण तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए लाइब्रेरी में उपलब्ध संसाधनों तथा उनके सही उपयोग की जानकारी होना आवश्यक है। ऐसी कार्यशालाएं संस्था में शोध के वातावरण को मजबूत करने के साथ-साथ अकादमिक समुदाय को डिजिटल संसाधनों के अधिक से अधिक उपयोग के लिए प्रोत्साहित करती हैं।
इस अवसर पर डॉ. आशुतोष शर्मा, एसोसिएट प्रोफेसर, कृषि विज्ञान विभाग एवं लाइब्रेरी एडवाइजरी कमेटी के सदस्य ने दो दिवसीय कार्यशाला की रूपरेखा के बारे में जानकारी दी।
कार्यशाला के पहले दिन माईलॉफ्ट, परलेगो और प्रोक्वेस्ट रिसर्च लाइब्रेरी के संबंध में तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। माईलॉफ्ट पर सत्र माईलॉफ्ट के वरिष्ठ प्रशिक्षण प्रबंधक श्री वैभव गोयल ने लिया। उन्होंने वर्चुअल लाइब्रेरी की अवधारणा और विभिन्न स्थानों से पुस्तकालय संसाधनों तक आसानी से पहुंच बनाने के बारे में जानकारी दी। उन्होंने डिजिटल तकनीक और शोध के बदलते तरीकों के साथ स्वयं को अपडेट रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
परलेगो पर सत्र परलेगो कंटेंट टेक्नोलॉजी सर्विसेज के प्रशिक्षण प्रबंधक श्री शुभम सिंह ने लिया। उन्होंने इसके ई-बुक डेटाबेस तथा पढ़ाई और शोध में इसके उपयोग के बारे में जानकारी दी। प्रोक्वेस्ट रिसर्च लाइब्रेरी पर सत्र कंटेंट टेक्नोलॉजी सर्विसेज के उत्तर भारत के वरिष्ठ जोनल प्रमुख श्री अरुण कालिया ने लिया। इस दौरान शोध सामग्री और अकादमिक प्रकाशनों तक पहुंच बनाने के विभिन्न तरीकों की जानकारी दी गई।
कार्यशाला के दूसरे दिन जेस्टोर, टर्नइटिन फीडबैक स्टूडियो, ईबीएसको होस्ट और मैनुपत्रा के संबंध में सत्र आयोजित किए गए। जेस्टोर का सत्र ग्लोब पब्लिकेशन प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्ली के उत्तर क्षेत्र के क्षेत्रीय प्रबंधक श्री विनीत भारद्वाज ने लिया। उन्होंने जेस्टोर पर उपलब्ध शोध पत्रिकाओं और पुरानी अकादमिक सामग्री के बारे में जानकारी दी।
टर्नइटिन फीडबैक स्टूडियो पर सत्र दक्षिण एशिया की कस्टमर ऑनबोर्डिंग कंसल्टेंट श्रीमती आशिता खंडेलवाल ने लिया। उन्होंने अकादमिक लेखन और फीडबैक के लिए डिजिटल साधनों के उपयोग के बारे में जानकारी दी।
इसके बाद ईबीएसको इन्फॉर्मेशन सर्विसेज के उत्तर भारत के वरिष्ठ प्रशिक्षण प्रबंधक श्री रितेश कुमार झा ने ईबीएसको होस्ट पर सत्र लिया। यह सत्र विशेष रूप से सीबीएमई और कृषि विज्ञान से संबंधित शिक्षकों, शोधार्थियों तथा स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के लिए उपयोगी रहा। अंतिम तकनीकी सत्र मैनुपत्रा के वरिष्ठ प्रबंधक श्री संजय शर्मा ने लिया, जिसमें कानून और कानूनी अध्ययन से संबंधित संसाधनों के बारे में जानकारी दी गई।
समापन समारोह के दौरान यूनिवर्सिटी के वाईस चांसलर प्रो. (डॉ.) मनोज कुमार ने सभी संसाधन वक्ताओं को सम्मानित किया। उन्होंने लाइब्रेरी एडवाइजरी कमेटी और इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस सेल के सदस्यों द्वारा कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को विभिन्न अकादमिक डेटाबेस और डिजिटल प्लेटफॉर्म की व्यावहारिक जानकारी दी गई। इससे उन्हें शोध सामग्री, ई-किताबों, शोध पत्रिकाओं, शोध प्रकाशनों तथा अन्य विशेष अकादमिक संसाधनों का उपयोग करने का अवसर मिला। कार्यशाला में पारंपरिक पुस्तकालय अध्ययन के साथ-साथ डिजिटल शोध कौशल विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
प्रो. (डॉ.) के. एन. कौल, डीन, साइंसेज एवं चेयरमैन, लाइब्रेरी एडवाइजरी कमेटी ने कार्यशाला को सफल बनाने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन, संसाधन वक्ताओं और प्रतिभागियों का धन्यवाद किया। उन्होंने कुलपति एवं रजिस्ट्रार द्वारा दिए गए सहयोग और प्रोत्साहन के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय पुस्तकालय में उपलब्ध ई-संसाधनों का अधिक से अधिक और प्रभावी उपयोग करने के लिए प्रेरित किया।


