पंजाबशिक्षा और संस्कृति

गणित के विभिन्न क्षेत्रों में नवीन प्रगति एवं अनुप्रयोगों पर राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित

हंस राज महिला महाविद्यालय के पोस्ट ग्रेजुएट डिपार्टमेंट ऑफ मैथेमेटिक्स द्वारा ‘रिसेंट एडवांसमेंट्स एंड एप्लिकेशंस ऑफ़ प्योर एंड अप्लाइड मैथेमेटिक्स इन वेरियस फील्ड्सÓ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन प्रिंसिपल डॉ. (श्रीमती) एकता खोसला के कुशल मार्गदर्शन में किया गया। सेमिनार का उद्देश्य फैकल्टी सदस्यों, विद्यार्थियों एवं गणित विषय में रुचि रखने वाले प्रतिभागियों को एक ऐसा अकादमिक मंच प्रदान करना था, जहाँ गणित के क्षेत्र में हो रहे नवीन विकास एवं इसके विभिन्न क्षेत्रों में अनुप्रयोगों पर विचार-विमर्श किया जा सके। गणित विभागाध्यक्षा डॉ. गगनदीप सेमिनार की कन्वीनर थीं। रिसोर्स पर्सन्स के रूप में प्रो. जी. महादेवन, प्रोफेसर एवं गणित विभागाध्यक्ष, गांधिग्राम रूरल इंस्टीट्यूट डीड टू बी यूनिवर्सिटी, तमिलनाडु; प्रो. एन. अनबझगन, सीनियर प्रोफेसर एवं गणित विभागाध्यक्ष, अलगप्पा यूनिवर्सिटी, तमिलनाडु तथा डॉ. एम. श्रीनिवासन, एसोसिएट प्रोफेसर, गणित विभाग, अन्नामलाई यूनिवर्सिटी, तमिलनाडु ने सहभागिता की। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. दीपाली द्वारा स्वागत संबोधन से हुआ। उद्घाटन सत्र में डॉ. गगनदीप ने तमिलनाडु से आए तीनों रिसोर्स पर्सन्स का संक्षिप्त परिचय दिया। प्रिंसिपल डॉ. एकता खोसला ने समकालीन अनुसंधान एवं तकनीकी विकास में गणित के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला। सेमिनार का पहला व्यायान डॉ. जी. महादेवन द्वारा ‘एप्लिकेशंस ऑफ़ ग्रास इन द मेडिकल ईराÓ विषय पर दिया गया। उन्होंने ग्राफ थ्योरी के माध्यम से वास्तविक जीवन की समस्याओं को गणितीय मॉडल में परिवर्तित करने की प्रक्रिया को रोचक ढंग से समझाया। उन्होंने जालंधर शहर में सिक्योरिटी पर्सनल की तैनाती की समस्या को ग्राफ थ्योरी मॉडल के माध्यम से समझाते हुए ग्राफ के डोमिनेशन नंबर के उपयोग पर प्रकाश डाला। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्रों के साथ-साथ मेडिकल क्षेत्र में ग्राफ थ्योरी के विभिन्न अनुप्रयोगों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डॉक्टर वास्तविक जीवन की विभिन्न परिस्थितियों में निर्णय लेने के लिए ग्राफ मॉडल्स का उपयोग कर सकते हैं। दूसरा व्यायान प्रो. एन. अनबझगन द्वारा ‘मार्कोव प्रॉसेस एंड रियल -वर्ल्ड मैथमेटिकल माडलिंगÓ विषय पर दिया गया। उन्होंने बैक्टीरियल ग्रोथ से संबंधित गणितीय समस्या से अपने व्यायान की शुरुआत की तथा समय के साथ बैक्टीरिया की वृद्धि को रिकरेंस इक्यूएशनस के माध्यम से समझाया। उन्होंने लाइनर एवं नॉन -लाइनर समस्याओं सहित विभिन्न क्लासीकल रिकरेंस इक्यूएशनस पर चर्चा की। अंत में उन्होंने तीन स्टेट्स के माध्यम से मार्कोव प्रोसेस तथा ट्रांजीशन मैट्रिक्स की अवधारणा स्पष्ट की। तीसरा व्यायान डॉ. एम. श्रीनिवासन द्वारा ‘प्रोबबिलिटी थ्यूरी इन रियल -वर्ल्ड ऐप्लीकेशंस Ó विषय पर दिया गया। उन्होंने वास्तविक जीवन में प्रोबेबिलिटी थ्यूरी के महत्वपूर्ण अनुप्रयोगों पर प्रकाश डाला। उन्होंने जेनरेटिंग सेट्स, प्रोबेबिलिटी जेनरेटिंग सेट्स, डेरिवेटिवस आफ प्रोबेबिलिटी जेनरेटिंग फंक्शनस तथा वन-स्टेप से एम-स्टेप तक ट्रांजीशन प्रोबेबिलिटीज़ जैसी अवधारणाओं को विस्तार से समझाया। इसके अतिरिक्त बर्थ एंड डेथ प्रोसेसेस, इमीग्रेशन प्रोसेसेस , प्योर बर्थ प्रोसेसेस , टेलीकयुनिकेशन नेटवर्कस , इन्वेंटरी सिस्टस, रिलायबिलिटी इंजीनियरिंग , कंप्यूटर सिस्टस तथा क्यूइंग सिस्टस में प्रोबबिलिटी थ्योरी के अनुप्रयोगों को उदाहरणों के साथ समझाया। तमिलनाडु से आए पाँच फैकल्टी सदस्यों—डॉ. आर. श्रीनिवासन, डॉ. के. पट्टाभिरामन, डॉ. आर. रमेश, डॉ. आर. विजयकुमार तथा डॉ. जे. जयराज—ने भी राष्ट्रीय सेमिनार में सहभागिता की। डिपार्टमेंट ऑफ मैथेमेटिक्स के 80 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सेमिनार में भाग लिया तथा रिसोर्स पर्सन्स के साथ सक्रिय रूप से संवाद किया। विद्यार्थियों ने सभी व्यायानों में गहरी रुचि दिखाई और विषय से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त कीं। कार्यक्रम के अंत में डॉ. गौरव वर्मा ने वोट ऑफ थैंक्स प्रस्तुत किया। इस अवसर पर डिपार्टमेंट ऑफ मैथेमेटिक्स के अन्य फैकल्टी सदस्य डॉ. दीपली, मिस सिमरदीप कौर एवं मिस नैन्सी भी उपस्थित रहीं।

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