

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में माना है कि अस्पताल मरीजों से दवाओं और मेडिकल सामानों के लिए बहुत ज्यादा कीमत वसूलते हैं। कैंसर की दवाओं पर तो 170% से लेकर 700% या उससे भी ज्यादा का मार्कअप लगाया जाता है।दवाओं और मेडिकल सामानों की कीमतों को नियंत्रित करने से जुड़े एक मामले में, रसायन और उर्वरक मंत्रालय ने कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया। इसमें सरकार ने इस चलन को “गलत तरीका” बताया और कहा कि मरीजों और अस्पतालों के बीच मोलभाव करने की ताकत में बहुत बड़ा अंतर है।हलफनामे में कहा गया है कि “अस्पतालों के मुकाबले मरीजों की मोलभाव करने की स्थिति बहुत कमजोर होती है।” साथ ही, उन्हें दवाओं, उनके विकल्पों और उनकी कीमतों के बारे में भी बहुत कम जानकारी होती है। सरकार का यह बयान ऐसे समय में आया है जब कोर्ट जरूरी दवाओं की कीमतों में भारी अंतर और अस्पतालों व दवा कंपनियों द्वारा बहुत ज्यादा मुनाफा कमाने के आरोपों की जांच कर रहा है।केंद्र ने कैंसर की उन दवाओं ट्रेड मार्जिन को 30% तक सीमित करने का प्रस्ताव दिया है। सरकार का कहना है कि इस कदम से इन दवाओं की कीमतें 20% से 70% तक कम हो सकती हैं और मरीजों के सालाना लगभग 2,500 करोड़ रुपये बच सकते हैं।



