Sliderपंजाब

लुधियाना स्टेशन पर वेंडर धरपकड अभियान की आढ़ में चल रहा उगाही का खेल, मंथली में देरी होते ही वेडर बन जाते हैं अवैध*

लुधियाना, 26 अक्टूबर :
तुम्हारे वेंडर नाजायज और हमारे सेवादार जायज। भारतीय रेल को हर साल लाखों रूपये का राजस्व देने वाले ठेकेदार का कोई वेडर अगर स्टेशन परिसर या ट्रेन में सामान बेचते पकडा जाए तो वो अपराध है और अगर यही काम कानून के रखवाले खुद करवाएं तो ये गरीब को रोजगार है।
लुधियाना स्टेशन पर आजकल यही सबकुछ चल रहा है। यही वो दाेहरे मापदंड हैं जो वेेंडराें की चेकिंग करते समय अपनाए जा रहे हैं। लुधियाना जंक्शन पर वर्तमान समय पर 150 से ज्यादा वेंडर चलते हैं। इनमें से अधिकतर अवैध वेंडर हैं। इनकी तादाद रात को तथा सुबह के समय और ज्यादा बढ़ जाती है।
स्टाल संचालकों ने बताया कि इनकाे स्टेशन परिसर और ट्रेनों में सामान बेचने की छूट देने के बदले सादे कपड़ों में घूमते घूसखोर रोजाना प्रति वेंडर के हिसाब से अवैध वसूली करते हैं। वहीं बड़े ठेकेदारों से महीने के हिसाब से मंथली वसूली की जाती है। इस काराेबार से हर महीने लाखाें रुपये की मंथली एकत्रित होती है, जिसे सभी घूसखोर मिल-बांटकर डकार जाते हैं।
दूसरी तरफ पकड़े सिर्फ वही वेंडर जाते हैं जिनके ठेकेदार मंथली देने में देरी करते हैं या फिर त्योहारी दिनों में मांग के मुताबिक मंथली नहीं बढ़ाते हैं। ऐसे ठेकेदार के वेंडर तुरंत नाजायज बन जाते हैं और फिर उनको किसी अंतरराष्ट्रीय अपराधी की तरह चुन-चुनकर बंद किया जाता है। ये वेंडर तबतक टारगेट पर रहते हैं जबतक उनका ठेकेदार घुटने न टेक दे।
लुधियाना स्टेशन पर हाल ही में हुए विवाद के पीछे की वजह भी यही है और इस सच्चाई से स्टेशन परिसर की दीवारें तक वाकिफ हैं। ऐसे में सवाल ये उठता है कि जो ठेकेदार या रिफ्रेशमेंट रूम संचालक पिछले 10-15 साल से सलाना लाखों रूपये का राजस्व भरकर काम कर रहा है, वह एक ही झटके में ग़लत कैसे हो गया है। अगर वो ग़लत तरीके से वेंडर चला रहा था तो पहले उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जाती थी।
नियमानुसार देखा जाए तो अवैध वेंडरों को पकड़ने और उनके खिलाफ रेलवे एक्ट के तहत कार्रवाई करने का अधिकार भी आरपीएफ के पास है। ऐसे में किसी दूसरी एजेंसी को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर रेलवे एक्ट के वेंडर पकड़ने में अचानक इतनी रूची कैसे पैदा हो गई। वहीं रेलवे एक्ट के लिए अधिकृत आरपीएफ जब सीधे तौर पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही है तो कोई दूसरी एजेंसी किसी एक चुनिंदा व्यक्ति को ही क्यों टारगेट कर रही है।
इससे साफ है कि लुधियाना स्टेशन पर वेंडिंग की छूट देने के बदले लगभग पिछले एक साल से अवैध वसूली का बहुत बड़ा रैकेट चल रहा है और इसके किंगपिन 5 से 6 गिने-चुने कर्मचारी हैं, जिनकी संदिग्ध कारगुजारी से पूरे विभाग की छवी खराब हो रही है।
इस स्टेशन पर वेंडरों के अलावा करीब 50 से 60 सेवादार भी चल हैं, जो रात के समय सरेआम अवैध वेंडिंग करते हैं। ये दिन में मुलाजिमों की रिहायश पर खाना बनाने से लेकर उनके अन्य काम करते हैं। इसके बदले उनको रात के समय अवैध वेंडिंग की छूट मिलती है। इनमें से एक सेवादार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वह दिन में साहब लोग और उनके वसूली गैंग के लिए खाना बनाने, रिहायश पर कपड़े धोने व साफ-सफाई जैसे काम करते हैं और रात को ट्रेनों में सामान बेचते हैं।
वहीं एक अन्य सेवादार ने बताया कि उनके गैस सिलेंडर, स्टोव और चाय व खाना बनाने का सामान जीआरपी थाने के पीछे कंडम क्वार्टरों में रखा हुआ है, जहां से सभी सेवादार रात को बंटे व लिफाफे लेकर चाय व खाना बेचने निकलते हैं।
सेवादारों ने बताया कि उनके ऊपर अपने परिवार को पालने के साथ-साथ अपने आकाओं को रोजाना के हिसाब से पैसे देने और उनका राशन, मीट मुर्गा और दारू तक का खर्च उठाने की जिम्मेदारी है। इसलिए उनकी पहचान सार्वजनिक न की जाए, अन्यथा उनपर कोई फर्जी केस बनाकर जेल भेज दिया जाएगा।
उधर स्टाल संचालकों ने भी किसी एक चुनिंदा कारोबारी या खान-पान विक्रेता को टारगेट करने की कार्रवाई को ग़लत ठहराया है। उन्होंने मांग की है कि अधिकृत ठेकेदारों या स्टाल संचालकों को तंग करने से पहले अफसरों व सुरक्षा कर्मियों के सेवादार बंद किए जाएं और इन सेवादारों की काल डिटेल निकलवाकर इनको संरक्षण देने वालों पर कानूनी कार्रवाई करके नौकरी से बर्खास्त किया जाए। तभी व्यवस्था में कुछ सुधार हो सकता है। अन्यथा किसी एक चुनिंदा स्टाल या कैंटीन संचालक को अवैध वेंडिंग का जिम्मेदार ठहराना गलत है।

Related Articles

Back to top button