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डी.ए.वी. महाविद्यालय जालंधर में विद्यालयी विद्यार्थियों के लिए ‘नेक्स्ट-जेन जेनेटिक्स’ (Next-Gen Genetics) विषय पर कार्यशाला का आयोजन

डी.ए.वी. महाविद्यालय, जालंधर के स्नातकोत्तर जूलॉजी विभाग ने ‘डार्विन जूलॉजिकल सोसाइटी’ (DZS) के तत्वावधान में तथा भारत सरकार के ‘बायोटेक्नोलॉजी विभाग’ (DBT) के सहयोग से महाविद्यालय की सीनियर जूलॉजी लैब में ‘नेक्स्ट-जेन जेनेटिक्स’ (Next-Gen Genetics) विषय पर व्याख्यान एवं प्रयोगशाला कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया।
इस कार्यशाला में स्टेट पब्लिक स्कूल, जालंधर छावनी; एमजीएन विद्यालय, कपूरथला; सैन दास ए.एस. वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, जालंधर तथा आनंद पब्लिक स्कूल, कपूरथला के बारहवीं कक्षा के चिकित्सा विज्ञान संकाय के विद्यार्थियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः पंजीकरण के साथ हुआ। इसके पश्चात आयोजन समिति की सदस्य प्रो. पूजा शर्मा ने स्वागत एवं परिचयात्मक वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए दिनभर आयोजित होने वाली गतिविधियों की रूपरेखा, कार्यशाला के विषय-क्षेत्र तथा इसके शैक्षणिक महत्त्व पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अनूप कुमार ने स्नातकोत्तर जूलॉजी विभाग तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग की कार्यशाला के आयोजन हेतु सराहना की। उन्होंने विद्यार्थियों के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण पर आधारित शिक्षण गतिविधियाँ विकसित करने, उन्हें महाविद्यालय की उन्नत प्रयोगशालाओं से परिचित करवाने तथा जैविक अनुसंधान के क्षेत्र में भविष्य निर्माण के लिए प्रेरित करने के विभाग के सतत प्रयासों की प्रशंसा की।
शैक्षणिक सत्रों का आरंभ ‘ ‘क्लासिकल जेनेटिक्स’ विषय पर एक ज्ञानवर्धक मुख्य व्याख्यान से हुआ। यह व्याख्यान डॉ. पुनीत पुरी ने प्रस्तुत किया, जो सह-आचार्य एवं विभागाध्यक्ष होने के साथ-साथ अलेक्जेंडर वॉन हम्बोल्ट फेलो, जर्मनी स्थित हम्बोल्ट विश्वविद्यालय में अतिथि वैज्ञानिक तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग की समग्र कार्ययोजना के समन्वयक भी हैं। उनके व्याख्यान ने विद्यार्थियों को आधुनिक जीनोम अनुसंधान की मूलभूत अवधारणाओं से परिचित करवाते हुए विषय की सुदृढ़ सैद्धांतिक समझ विकसित करने में सहायता प्रदान की।
इसके पश्चात विद्यार्थियों ने दो विशेष व्यावहारिक सत्रों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रथम सत्र ‘बहुधारी गुणसूत्रों का निष्कर्षण’ विषय पर आधारित था, जिसका संचालन डार्विन जूलॉजिकल सोसाइटी’ के अध्यक्ष एवं सह-आचार्य डॉ. दीपक वधावन ने किया। इस सत्र के दौरान विद्यार्थियों ने उन्नत सूक्ष्मदर्शी तकनीकों की सहायता से विशाल लार-ग्रंथि गुणसूत्रों को पृथक करने, उन्हें अभिरंजित करने तथा उनका सूक्ष्म निरीक्षण करने की विधियों का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया।
द्वितीय सत्र ‘त्वचा-रेखांकन विज्ञान’ विषय पर आयोजित किया गया, जिसका संचालन सहायक आचार्य डॉ. कपिला महाजन ने किया। इस सत्र में विद्यार्थियों को त्वचा की बाह्य परत पर उपस्थित उभरी हुई रेखाओं के प्रतिरूपों को अभिलिखित करने तथा उनका विश्लेषण करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही, इन प्रतिरूपों के चिकित्सकीय एवं आनुवंशिक महत्त्व की जानकारी भी प्रदान की गई।
कार्यशाला का समापन औपचारिक समापन समारोह के साथ हुआ। संपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन समिति ने कुशलतापूर्वक संचालन किया। समिति में प्रो. पूजा शर्मा, डॉ. ऋषि कुमार, डॉ. अभिनय ठाकुर तथा डॉ. पंकज बग्गा सम्मिलित थे। इसके अतिरिक्त, तकनीकी प्रभारी श्री अभिषेक तथा सहयोगी कर्मचारी श्री हैप्पी जॉन, श्री विकास एवं सुश्री नीतू ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।
इस कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों को आनुवंशिकी की आधुनिक अवधारणाओं, प्रयोगशाला तकनीकों तथा जैविक अनुसंधान की व्यावहारिक प्रक्रियाओं से परिचित होने का महत्त्वपूर्ण अवसर प्राप्त हुआ।

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