
हंसराज महिला महाविद्यालय, जालंधर में तीन दिवसीय यूएचवी (सार्वभौमिक मानवीय मूल्य) विषय पर प्राचार्या डॉ. एकता खोसला के दिशानिर्देशन अधीन फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का आयोजन आल इंडिया कौंसिल फ़ॉर टेक्निकल एजुकेशन के अनुमोदन से आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ डीएवी गान के साथ हुआ, जिसने वातावरण को सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया। इसके बाद अतिथियों का स्वागत ग्रीन प्लांटर भेंट कर किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में डॉ. रमनीता सैनी शारदा (लोकल प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर) ने अवधारणा नोट प्रस्तुत करते हुए यूएचवी के महत्व, उद्देश्य तथा इसके शैक्षणिक व सामाजिक प्रभाव पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के सह-समन्वयक श्री सुमित शर्मा ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस अवसर पर डीन यूथ वैलफेयर डॉ. नवरूप की गरिमामयी उपस्थिति रही। मुय अतिथियों में श्री जतिंदर नरूला (लोकल कॉर्डिनेटर एआईसीटीई सार्वभौमिक मानवीय मूल्य), श्रीमती रजनीश (सह-कॉर्डिनेटर), श्रीमती मंगलदीप तथा श्री विक्रम अरोड़ा उपस्थित रहे, जिन्होंने अपने प्रेरणादायक विचारों से कार्यक्रम को समृद्ध किया। कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. ज्योति गोगिया द्वारा अत्यंत प्रभावशाली ढंग से किया गया। महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. एकता खोसला ने सर्वप्रथम एफडीपी लोकल प्रोग्राम कॉर्डिनेटर डॉ. रमनीता सैनी शारदा एवम श्री सुमित शर्मा को बधाई दी एवम अपने संदेश में कहा कि यूएचवी जैसे कार्यक्रम शिक्षकों को केवल विषयगत ज्ञान तक सीमित नहीं रखते, बल्कि उन्हें जीवन मूल्यों, नैतिकता और मानवीय संवेदनाओं से भी जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि मूल्य-आधारित शिक्षा ही विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का आधार है और ऐसे आयोजन शिक्षकों को इस दिशा में सशक्त बनाते हैं। मुय वक्ता श्री जतिंदर नरूला एवं श्रीमती रजनीश ने अपने विचारों में मानव जीवन के मूल प्रश्नों : क्यों जीना है और कैसे जीना है : पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बताया कि क्यों जीना है का अर्थ है जीवन का उद्देश्य समझना—एक ऐसा जीवन जीना जिसमें सुख, शांति, संतोष और समाज के प्रति सकारात्मक योगदान हो। वहीं कैसे जीना है का संबंध जीवन जीने की सही दिशा और तरीकों से है, जिसमें सही सोच, नैतिक मूल्यों, आपसी संबंधों में विश्वास और संतुलित जीवनशैली का विशेष महत्व है। उन्होंने जोर दिया कि जब व्यक्ति इन दोनों प्रश्नों के उत्तर स्पष्ट रूप से समझ लेता है, तब वह एक सार्थक, संतुलित और मूल्य-आधारित जीवन जी सकता है। इस एफडीपी का उद्देश्य शिक्षकों में मानवीय मूल्यों, नैतिक जागरूकता एवं समग्र विकास को बढ़ावा देना है, ताकि वे विद्यार्थियों को मूल्य-आधारित शिक्षा प्रदान कर सकें। कार्यक्रम के विभिन्न सत्रों में प्रतिभागियों को जीवन मूल्यों, आत्म-समझ और सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों से अवगत कराया गया। समस्त कार्यक्रम को विभिन्न सत्रों में विभक्त किया गया। इस अवसर पर अन्य संस्थाओं डेवियट, सेट सोल्जर से भी प्रतिभागी उपस्थित रहे। सह-कॉर्डिनेटर श्री सुमित शर्मा ने समस्त गणमान्य सदस्यों हेतु आभार व्यक्त किया गया। महाविद्यालय द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम शिक्षा में मूल्यों के समावेश की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं सराहनीय पहल है।