
एपीजे कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट्स, जालंधर में आत्महत्या रोकथाम सप्ताह के तहत विभिन्न गतिविधियों का आयोजन

एपीजे कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट्स, जालंधर के साइकोलॉजी फोरम और ‘द लिसनिंग रूम’ द्वारा आत्महत्या रोकथाम सप्ताह का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस वर्ष की मुहिम का केंद्रीय विषय “Every Story Deserves a Tomorrow” रहा। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में भावनात्मक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता पैदा करना, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर खुले संवाद को प्रोत्साहित करना तथा विद्यार्थियों को अपनी भावनाओं की रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए मंच प्रदान करना था।
इस अवसर पर कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. नीरजा ढींगरा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी भावनाओं को दबाने के बजाय उनके बारे में खुलकर बात करनी चाहिए तथा आवश्यकता पड़ने पर परिवार, शिक्षकों या विशेषज्ञों से सहायता लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी की कहानी महत्वपूर्ण है और समाज को ऐसा संवेदनशील वातावरण बनाने की आवश्यकता है, जहाँ प्रत्येक व्यक्ति स्वयं को सुना, समझा और समर्थित महसूस करे।सप्ताह की शुरुआत पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता से हुई। विद्यार्थियों ने पारंपरिक और डिजिटल पोस्टरों के माध्यम से आशा, साहस, सहयोग तथा जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण जैसे विषयों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में प्रथम स्थान मेघा ठाकुर (बी. डिजाइन, सेमेस्टर 5) ने प्राप्त किया। द्वितीय स्थान साहिब प्रीत सिंह (बी.वोक. एच.सी.एम., सेमेस्टर 1) और तानिया (बी.वोक. एच.सी.एम., सेमेस्टर 5) ने संयुक्त रूप से प्राप्त किया, जबकि तृतीय स्थान सुहानी (बी.ए., सेमेस्टर 5) ने हासिल किया।
डिजिटल पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में प्रथम स्थान जसनीत कौर रंधावा (बी.ए., सेमेस्टर 3), द्वितीय स्थान नवनीत कौर ढिल्लों (बी.ए., सेमेस्टर 5) तथा तृतीय स्थान मेघा ठाकुर (बी. डिजाइन, सेमेस्टर 5) ने प्राप्त किया।
इस अवसर पर स्लोगन लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने आत्महत्या रोकथाम, सहानुभूति, सहयोग और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता को प्रभावशाली स्लोगनों के माध्यम से व्यक्त किया। इस प्रतियोगिता में मेघा ठाकुर (बी. डिजाइन, सेमेस्टर 5) और नीलाक्षी महाजन (बी.ए., सेमेस्टर 3) ने संयुक्त रूप से प्रथम स्थान प्राप्त किया। स्नेहा दुबे (बी.ए., सेमेस्टर 5) ने द्वितीय तथा हरसिमर कौर आहूजा (बी.ए., सेमेस्टर 3) ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। यशिका चौहान (बी.ए., सेमेस्टर 5) को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया।
तीन दिवसीय कार्यक्रम का समापन ‘ओपन माइक’ सत्र के साथ हुआ। इस अवसर पर साइकोलॉजी फोरम के सदस्यों और विद्यार्थियों ने अपनी रचनाएँ एवं विचार साझा किए। कार्यक्रम में साइकोलॉजी फोरम की पूर्व पदाधिकारी सुश्री कृतज्ञा गाबा, पूर्व अध्यक्ष; सुश्री अनुरीत खंडपुर, पूर्व प्रशासनिक प्रमुख; तथा श्री सुखनजोत सिंह जौहल, पूर्व महासचिव विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए।
कार्यक्रम का एक अन्य महत्वपूर्ण आकर्षण मनोविज्ञान आधारित काव्य-संग्रह ‘The Science of Feeling’ का लोकार्पण रहा। इस पुस्तक का लोकार्पण सुश्री निहारिका मजूमदार, प्रमुख, मनोविज्ञान विभाग एवं एक्सप्रेसिव आर्ट्स थेरेपिस्ट द्वारा किया गया। इस काव्य-संग्रह में मानवीय भावनाओं की जटिलता, कठिन परिस्थितियों से निपटने के तरीकों तथा आंतरिक उपचार और भावनात्मक स्वास्थ्य की प्रक्रिया को कविताओं के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया है।
इस अवसर पर प्रिंसिपल डॉ. नीरजा ढींगरा ने मनोविज्ञान विभाग की प्राध्यापिका सुश्री निहारिका मजूमदार एवं मैडम हरजस कौर के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियाँ विद्यार्थियों को अपनी भावनाओं को रचनात्मक रूप से व्यक्त करने, एक-दूसरे को समझने तथा मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील बनने में सहायता करती हैं।
समग्र रूप से इस तीन दिवसीय आयोजन ने विद्यार्थियों में आशा, संवेदनशीलता, सहयोग और भावनात्मक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।



