

जालंधर:- मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में श्री शनि देव महाराज जी के निमित्त सामुहिक निशुल्क दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया।
सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमान सुनीता शर्मा से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन ,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई।
सिद्ध माँ बगलामुखी धाम में आयोजित दिव्य हवन यज्ञ के दौरान यज्ञ कुंड में प्रज्वलित पावन अग्नि की दिव्य आभा से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया। वैदिक मंत्रोच्चारण और श्रद्धा के बीच धाम के पीठ उपासक नवजीत भारद्वाज जी ने भगवान गणेश जी के स्वरूप में छिपे जीवन के गूढ़ संदेशों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गणपति महाराज केवल विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता ही नहीं, बल्कि उनका स्वरूप स्वयं मनुष्य को जीवन जीने की कला सिखाता है।
उन्होंने कहा कि पिछले कई दिनों से देशभर में गणेश उत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। जगह-जगह गणपति पंडाल सजे हुए हैं और पूरा वातावरण गणपति बप्पा की भक्ति में रंगा नजर आ रहा है। ऐसे पावन अवसर पर यदि हम केवल गणेश जी की पूजा तक सीमित न रहें, बल्कि उनके स्वरूप में छिपे संदेश को अपने जीवन में उतारें, तो यही सच्ची भक्ति होगी।
नवजीत भारद्वाज जी ने प्रभु भक्तों को बताया कि गणेश जी के स्वरूप से इंसान को बहुत बातें सीखने को मिलती हैं। जैसे कि
*विशाल पेट- सारी अच्छाइयों-बुराइयों को पचा जाने की क्षमता*
गणेश जी का बड़ा पेट उनकी सहनशीलता और सभी बातों को पचा लेने की क्षमता का प्रतीक है। यह हमें सिखाता है कि जीवन में सुख-दु:ख, सफलता-विफलता, प्रशंसा-आलोचना सब आते रहेंगे। एक विवेकवान व्यक्ति का काम है इन सभी बातों से सीख लेना और जीवन में आगे बढऩा। बड़ा पेट एक सीख यह भी देता है कि हमें किसी की चुगली नहीं करनी चाहिए। हर किसी को बात को हमें पचा लेना चाहिए और एक व्यक्ति की बात दूसरे से नहीं कहनी चाहिए।
*लंबी और नर्म सूंड- विवेक और लचीलेपन का महत्व*
गणेश जी की सूंड बेहद शक्तिशाली भी है और बेहद नर्म भी। वह एक विशाल वृक्ष को उखाड़ सकती है और एक सूई भी उठा सकती है। यह हमारे विवेक का प्रतीक है। जीवन में सफलता के लिए यह जरूरी है कि हमारी बुद्धि इतनी पैनी और संवेदनशील हो कि छोटी-से-छोटी बात को समझ सके और इतनी शक्तिशाली भी हो कि बड़े-से-बड़े संकट का सामना कर सके। सूंड का लचीलापा हमें यह सीख देता है कि परिस्थितियों के अनुसार ढलना ही बुद्धिमानी है। जिद्दी और कठोर रवैया अक्सर समस्याएं खड़ी करता है, जबकि लचीला और विवेकपूर्ण व्यवहार हर समस्या का हल निकाल लेता है।
*बड़े कान- सुनने की कला और सुझाव ग्रहण करना*
गणेश जी के बड़े-बड़े कान सुनने के महत्व को दर्शाते हैं। यह संदेश है कि ज्ञान हासिल करने के लिए हमें ज्यादा सुनना चाहिए और कम बोलना चाहिए। बड़े कान दुनिया की सभी बातों-अच्छी और बुरी को सुनने की क्षमता रखते हैं, लेकिन उन्हें ग्रहण करने का काम विवेक करता है। यह हमें सिखाता है कि हमें दूसरों की बातों को धैर्यपूर्वक सुनना चाहिए, चाहे वह प्रशंसा हो या आलोचना। इससे न केवल ज्ञान बढ़ता है, बल्कि फैसला लेने की क्षमता भी विकसित होती है।
*टूटे हुए दांत- अच्छाई को समेटकर रखना*
गणेश जी के टूटे हुए दांत इस बात का प्रतीक हैं कि जीवन में जो भी अच्छा है, उसे सहेजकर रखें और जो बुरा है या आपके काम का नहीं है, उसे जाने देना चाहिए। साथ ही, इससे यह भी सीख मिलती है कि हमें हमारी सभी अच्छाइयों और खामियों को स्वीकार करना चाहिए।
*छोटी आंखें- सूक्ष्मता पर ध्यान*
गणेश जी आंखें बेहद छोटी होती हैं। ये हमें संदेश देती हैं कि जीवन की छोटी-छोटी बातों पर हमें गौर करना चाहिए और उनसे सीखने की कोशिश करनी चाहिए। जरूरी नहीं कि हर चीज हमें बोलकर सिखाई जाए। कुछ चीजें हमें दूसरों में देखकर भी सीखनी चाहिए। यहीं जीवन में आगे बढऩे का मंत्र है।
*बड़ा सिर- बुद्धि का प्रतीक*
गणेश जी को बुद्धि का देवता कहा जाता है। माना जाता है कि वे सबसे विवेकवान और ज्ञानी हैं। इसका प्रतीक उनका सिर है। गणेश जी का विशाल सिर बुद्धिमानी, गहरी सोच और ज्ञान का प्रतीक है। इससे हमें सीख मिती है कि हमें जीवन में जहां से भी मिले, ज्ञान बटोरते रहना चाहिए।
प्रवचन के अंत में नवजीत भारद्वाज जी ने कहा कि गणेश उत्सव केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर झांकने का भी अवसर है। उन्होंने कहा कि यदि गणेश जी को सच्चे अर्थों में अपने जीवन में स्थापित करना है तो उनके स्वरूप से मिलने वाली सीख को अपने आचरण में उतारना होगा। बड़े कानों से सुनो, छोटी आंखों से सूक्ष्मता को देखो, बड़े सिर से गहराई से सोचो, सूंड की तरह परिस्थितियों में संतुलन रखो, विशाल पेट की तरह जीवन की परिस्थितियों को पचाओ, और जो गलत है उसे छोडक़र अपने लक्ष्य की ओर निरंतर बढ़ते रहो। *गणपति बप्पा के स्वरूप को समझ लेना ही अपने जीवन को समझने की शुरुआत है।*
इस अवसर पर रोहित गौतम, राकेश प्रभाकर,पूनम प्रभाकर ,सरोज बाला,विक्की अग्रवाल,रोहित भाटिया,जानू थापर,नरेश,कोमल,वेद प्रकाश, मुनीष मैहरा, जगदीश डोगरा, ऋषभ कालिया,बलजिंदर सिंह,अजीत कुमार , नरेंद्र,राकेश शर्मा,नवीन , प्रदीप, सुधीर, सुमीत, मनीष शर्मा,दानिश, रितु, कुमार,सौरभ ,शंकर, संदीप,रिंकू,गोरव गोयल, मनी ,नरेश,अजय शर्मा,दीपक , किशोर,प्रदीप , प्रवीण,राजू, गुलशन शर्मा,संजीव शर्मा,अमनदीप शर्मा, गुरप्रीत सिंह, विरेंद्र सिंह, अमन शर्मा,दीलीप, लवली, लक्की,मोहित,विशाल,रवि भल्ला, प्रिंस कुमार,नरेंद्र, सौरभ,दीपक कुमार, नरेश सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।



