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दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान , नूरमहल में 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति के पावन अवसर पर भव्य आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संगत ने अत्यंत श्रद्धा एवं उत्साह के साथ दिव्य सरोवर में स्नान किया।

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान , नूरमहल में 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति के पावन अवसर पर भव्य आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संगत ने अत्यंत श्रद्धा एवं उत्साह के साथ दिव्य सरोवर में स्नान किया।

दिव्य सरोवर में स्नान उपरांत समस्त संगत ने शबद-कीर्तन का आनंद लिया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो गया।

इस अवसर पर स्वामी चिन्मयानंद जी ने अपने प्रेरणादायक सत्संग में माघ स्नान, संगत और साधु-संतों की धूलि के गूढ़ आध्यात्मिक रहस्य को सरल शब्दों में समझाया। सत्संग के दौरान उन्होंने गुरुवाणी की इन पंक्तियों के माध्यम से गहन आध्यात्मिक सत्य को उजागर किया—

*ਮਾਘਿ ਮਜਨੁ ਸੰਗਿ ਸਾਧੂਆ ਧੂੜੀ ਕਰਿ ਇਸਨਾਨੁ*

स्वामी जी ने समझाया कि जीवन में सबसे पहले आत्मा का स्नान आवश्यक है। यह आत्मिक स्नान केवल बाहरी सरोवर में जल-स्नान से संभव नहीं होता। जब पूर्ण गुरु के द्वारा ब्रह्म ज्ञान की दीक्षा दी जाती है, तभी जीवात्मा अमृतरूपी आंतरिक सरोवर में स्नान करती है और उसी क्षण उसका जीवन सफल होता है।

स्वामी जी ने आगे बताया कि जब जीवात्मा उस बाहरी सरोवर में स्नान करती है, जिसकी नींव स्वयं ब्रह्मज्ञानी द्वारा रखी गई हो, तो वह “सोने पर सुहागा” सिद्ध होता है। इस प्रकार आंतरिक आत्मिक शुद्धि और बाह्य धार्मिक कर्म—दोनों का समन्वय ही मानव जीवन को पूर्णता प्रदान करता है।

कार्यक्रम के अंत में संगत ने गुरु-कृपा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की और मकर संक्रांति के इस पावन आयोजन को आत्मिक जागरण एवं आध्यात्मिक उन्नति का सशक्त माध्यम बताया।

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