

जालंधर:- मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में मां बगलामुखी जी के निमित्त साप्ताहिक सामुहिक निशुल्क दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया।
सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमान जतिन कलसी से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन ,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई।
सिद्ध माँ बगलामुखी धाम, गुलमोहर सिटी जालंधर में आयोजित दिव्य हवन यज्ञ के दौरान वातावरण उस समय आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा, जब यज्ञ कुंड में प्रज्वलित पावन अग्नि के समक्ष माँ भक्तों को जीवन का गहरा आध्यात्मिक रहस्य समझाते हुए नवजीत भारद्वाज ने कहा कि इंसान चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो जाए, लेकिन परमात्मा की इच्छा के बिना संसार में एक पत्ता तक नहीं हिला सकता।
उन्होंने प्रसिद्ध दोहे का अनुसरण करते हुए कहा कि
*‘‘हरि इच्छा बिनु सृष्टि में, हिले न एको पात।*
*अहंकार मूरख करे, कर्ता दीनानाथ॥’’*
नवजीत भारद्वाज जी ने कहा कि ये केवल दो पंक्तियां नहीं, बल्कि मनुष्य के पूरे जीवन का आईना हैं। संसार में जो कुछ घट रहा है, उसके पीछे एक अदृश्य शक्ति की व्यवस्था है। सूरज का उदय, चंद्रमा का प्रकाश, ऋतुओं का परिवर्तन, नदियों का बहना और पेड़ों के पत्तों का हिलना सब एक निश्चित व्यवस्था के अनुसार हो रहा है।
उन्होंने माँ भक्तों से सवाल किया कि जब प्रकृति का इतना विशाल संसार अपने आप नहीं चल रहा, तो फिर इंसान किस बात का अहंकार करता है? नवजीत भारद्वाज जी ने कहा कि जरा अपने जीवन पर नजर डालिए। हम कहते हैं, मैंने घर बनाया। मैंने व्यापार खड़ा किया। मैंने बच्चों को पढ़ाया। मैंने बहुत पैसा कमाया। मैंने बड़ी सफलता हासिल की।
लेकिन कभी शांत होकर सोचिए जिस शरीर से आपने मेहनत की, वह शरीर किसने दिया? जिस बुद्धि से आपने निर्णय लिया, वह बुद्धि किसने दी? जिस सांस के सहारे आप आज यह सब कर रहे हैं, वह सांस किसने दी? जिस हृदय को आपने कभी चलाया नहीं, वह दिन-रात अपने आप कौन चला रहा है?
नवजीत भारद्वाज जी ने माँ भक्तों को बड़ी गहराई से समझाते हुए कहा कि हम सो जाते हैं, लेकिन सांस चलती रहती है। हम सो जाते हैं, लेकिन हृदय धडक़ता रहता है। हम कहते हैं ‘‘मैं सब कुछ करता हूं।’’ लेकिन रात को सोने के बाद हमारा ‘‘मैं’’ कहां चला जाता है? तब भी कोई शक्ति हमारे भीतर काम कर रही होती है। *वही शक्ति परमात्मा की है।* अहंकार सबसे बड़ा भ्रम है।
नवजीत भारद्वाज जी माँ भक्तों को चेताते हुए कहते है कि धन का अहंकार हो सकता है, पद का अहंकार हो सकता है, ज्ञान का अहंकार हो सकता है, सुंदरता का अहंकार हो सकता है। लेकिन *सबसे सूक्ष्म अहंकार है ‘‘मैं’’ ही कर्ता हूं। यही अहंकार मनुष्य को परमात्मा से दूर करता है।*
मनुष्य को लगता है कि उसके नियंत्रण में सब कुछ है। लेकिन जीवन एक क्षण में हमें बता देता है कि हमारा नियंत्रण कितना सीमित है। एक स्वस्थ व्यक्ति सुबह घर से निकलता है और उसे पता नहीं होता कि शाम तक परिस्थितियां क्या होंगी।
नवजीत भारद्वाज जी ने बड़ी सुंदर उदाहरण देते हुए कहा कि संसार की वस्तुओं पर अधिकार का भ्रम मत पालो। कर्म करो, लेकिन कर्तापन का अहंकार मत करो। वृक्ष पत्ते हमें क्या सिखाते है? किसी वृक्ष के नीचे बैठकर एक पत्ते को ध्यान से देखिए। वह पत्ता पेड़ से जुड़ा है। हवा चलती है तो वह हिलता है। हवा रुकती है तो वह शांत हो जाता है। वह हवा से लड़ता नहीं। वह यह नहीं कहता, मैं अपनी मर्जी से हिलूंगा। वह प्रकृति की गति के साथ चलता है। मनुष्य भी अगर इसी भाव को अपने जीवन में उतार ले तो उसके भीतर बहुत शांति आ सकती है।
नवजीत भारद्वाज जी ने प्रवचन के अंत में कहा कि यह बात बहुत महत्वपूर्ण है कि हरि इच्छा में विश्वास रखने का अर्थ यह नहीं कि मनुष्य आलसी हो जाए। भगवान ने हमें कर्म करने के लिए हाथ दिए हैं। इसलिए अपना कर्तव्य पूरी निष्ठा से निभाइए। *इसलिए मनुष्य का अधिकार कर्म पर हो परिणाम पर नहीं। हमारे हिस्से में प्रयास है परिणाम की अंतिम व्यवस्था परमात्मा की है।*
इस अवसर पर श्वेता भारद्वाज, राकेश प्रभाकर,पूनम प्रभाकर ,सरोज बाला, समीर कपूर, प्रदीप , दिनेश सेठ,रोहित भाटिया,जानू थापर,दिनेश,नरेश,कोमल,वेद प्रकाश, मुनीष मैहरा,ऋषभ कालिया,रिंकू सैनी, कमलजीत,बलजिंदर सिंह,अजीत कुमार , नरेंद्र,राकेश शर्मा, नवीन , प्रदीप, सुधीर, मनीष शर्मा, परमजीत सिंह, दानिश, रितु, कुमार,गौरी केतन शर्मा,सौरभ ,शंकर, संदीप,रिंकू, गोरव गोयल, मनी ,नरेश,अजय शर्मा,दीपक , किशोर,प्रदीप , प्रवीण,राजू, संजीव शर्मा, वरुण, नितिश,रोमी, भोला शर्मा,दीलीप, लवली, लक्की, मोहित , विशाल ,अश्विनी शर्मा,रवि भल्ला, भोला शर्मा, जगदीश, निर्मल,अनिल,सागर,प्रिंस कुमार, पप्पू ,नरेंद्र, सौरभ,दीपक कुमार, नरेश,दिक्षित, अनिल सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।



