मानसा, 17 जून 2026: केंद्रीय समेकित नाशीजीव प्रबंधन केंद्र (सीआईपीएमसी), जालंधर द्वारा पंजाब राज्य कृषि विभाग, मानसा के जिला कृषि अधिकारियों के सहयोग से 16–17 जून 2026 के दौरान पंजाब के मानसा जिले में कपास फसल में कीट एवं रोगों की वर्तमान स्थिति का आकलन करने हेतु संयुक्त क्षेत्रीय सर्वेक्षण किया गया।
संयुक्त सर्वेक्षण दल ने जिले के प्रमुख कपास उत्पादक क्षेत्रों का भ्रमण किया, किसानों से संवाद स्थापित किया तथा फसल में कीट एवं रोगों की वर्तमान स्थिति का आकलन करने के लिए व्यवस्थित क्षेत्रीय निगरानी (सर्विलांस) की।
सर्वेक्षण के दौरान कपास फसल में किसी भी प्रमुख कीट अथवा रोग का प्रकोप नहीं पाया गया। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में सफेद मक्खी (Whitefly) की उपस्थिति दर्ज की गई, जिसकी संख्या आर्थिक क्षति स्तर (Economic Threshold Level-ETL) से कम पाई गई। किसानों को प्रमुख कीटों एवं रोगों की प्रारम्भिक पहचान के बारे में जागरूक किया गया तथा सतर्क रहने की सलाह दी गई। साथ ही, किसी भी असामान्य कीट अथवा रोग के प्रकोप की सूचना तत्काल स्थानीय कृषि अधिकारियों को देने हेतु प्रेरित किया गया, ताकि समय रहते आवश्यक नियंत्रण उपाय किए जा सकें।
किसानों को अपने खेतों की नियमित निगरानी करने तथा आवश्यकता आधारित एवं समयानुकूल समेकित नाशीजीव प्रबंधन (Integrated Pest Management-IPM) उपाय अपनाने की सलाह दी गई, जिससे कीट एवं रोगों के प्रकोप को प्रारम्भिक अवस्था में ही नियंत्रित किया जा सके। सर्वेक्षण दल ने केंद्रीय कीटनाशी बोर्ड एवं पंजीकरण समिति (CIB&RC) द्वारा अनुशंसित कीटनाशकों का केवल निर्धारित मात्रा, समय एवं विधि के अनुसार विवेकपूर्ण उपयोग करने तथा प्रभावी, किफायती एवं पर्यावरण-अनुकूल फसल संरक्षण के लिए आईपीएम तकनीकों को अपनाने पर विशेष बल दिया।
संयुक्त सर्वेक्षण दल में डॉ. हरविंदर सिंह, मुख्य कृषि अधिकारी, मानसा; श्री विजयकुमार एम., सहायक पादप संरक्षण अधिकारी, केंद्रीय समेकित नाशीजीव प्रबंधन केंद्र (सीआईपीएमसी), जालंधर; श्री गुरप्रीत सिंह, कृषि विकास अधिकारी, मानसा; श्री मनप्रीत सिंह, कृषि विकास अधिकारी, मानसा; श्री नवकरण सिंह, कृषि विकास अधिकारी, झुनीर; श्री अमृतपाल सिंह, कृषि विकास अधिकारी, झुनीर; श्री बलजिंदर सिंह, कृषि उप निरीक्षक; तथा श्री दीपक, तकनीकी सहायक, सीआईपीएमसी, जालंधर शामिल थे।