
विज्ञान और आध्यात्मिकता का समन्वय: डी.ए.वी. कॉलेज, जालंधर में संवादात्मक कार्यशाला का आयोजन

वैज्ञानिक अन्वेषण और आध्यात्मिक ज्ञान के मध्य संबंधों की गहन समझ विकसित करने के उद्देश्य से डी.ए.वी. कॉलेज, जालंधर के स्नातकोत्तर रसायन विज्ञान विभाग द्वारा ‘डीबीटी स्टार महाविद्यालय योजना’ के अंतर्गत ‘विज्ञान और आध्यात्मिकता’ विषय पर एक संवादात्मक सत्र एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर थापर अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, पटियाला के प्रोफेसर मनमोहन छिब्बर ने मुख्य वक्ता के रूप में सहभागिता की।
यह कार्यक्रम प्राचार्य डॉ. अनूप कुमार के नेतृत्व तथा वरिष्ठ उप-प्राचार्य एवं भौतिक विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. कुँवर राजीव के मार्गदर्शन और सहयोग से आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ डी.ए.वी. गान से हुआ, जिसके पश्चात अतिथियों का पर्यावरण-अनुकूल ढंग से स्वागत किया गया। प्राचार्य डॉ. अनूप कुमार ने मुख्य वक्ता का हार्दिक स्वागत करते हुए उन्हें स्मृतिचिह्न भेंट कर सम्मानित किया। रसायन विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रोफेसर शीतल अग्रवाल ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का औपचारिक स्वागत किया। उन्होंने मुख्य वक्ता का परिचय देते हुए उनकी शैक्षणिक विशेषज्ञता तथा व्यावसायिक उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला।
संवादात्मक सत्र के दौरान प्रोफेसर मनमोहन छिब्बर ने विज्ञान और आध्यात्मिकता के मध्य विद्यमान रोचक संबंधों पर विस्तारपूर्वक विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक तर्कशीलता और आध्यात्मिक दृष्टिकोण किस प्रकार हमारे आसपास के संसार को समझने में एक-दूसरे के पूरक सिद्ध हो सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को जिज्ञासु बनने, परंपरागत मान्यताओं का विवेकपूर्ण परीक्षण करने तथा तार्किक चिंतन, सूक्ष्म निरीक्षण और अनुभव-आधारित अधिगम के महत्त्व को समझने के लिए प्रेरित किया। उनके ज्ञानवर्धक विचारों ने विद्यार्थियों को वैज्ञानिक ज्ञान, मानवीय चेतना और जीवन के व्यापक आयामों के पारस्परिक संबंधों पर चिंतन करने का अवसर प्रदान किया।
संवादात्मक सत्र के उपरांत एक प्रायोगिक कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य वक्ता ने रसायन विज्ञान से संबंधित अनेक रोचक प्रयोगों का प्रदर्शन किया। ये प्रयोग देखने में जादुई प्रतीत हो रहे थे, जिससे विद्यार्थी अत्यंत आकर्षित हुए और उनमें विशेष उत्साह का संचार हुआ। प्रोफेसर छिब्बर ने प्रयोगों तथा उनकी वैज्ञानिक व्याख्याओं के माध्यम से स्पष्ट किया कि रासायनिक अभिक्रियाएँ और वैज्ञानिक सिद्धांत किस प्रकार अद्भुत दृश्य प्रभाव उत्पन्न कर सकते हैं। इन प्रयोगों ने विद्यार्थियों को रसायन विज्ञान की अद्भुत संभावनाओं से परिचित कराया तथा जिज्ञासा जागृत करने और आश्चर्यजनक प्रतीत होने वाली घटनाओं के पीछे निहित वैज्ञानिक कारणों को समझने के लिए प्रेरित किया।
यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए एक उत्कृष्ट शैक्षणिक अनुभव सिद्ध हुआ, जिसमें बौद्धिक विमर्श के साथ-साथ प्रायोगिक गतिविधियों का भी समावेश रहा। इसने विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रहकर वैज्ञानिक अवधारणाओं को व्यावहारिक दृष्टि से समझने के लिए प्रोत्साहित किया। साथ ही, वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने में जिज्ञासा, आलोचनात्मक चिंतन और अनुभव-आधारित अधिगम के महत्त्व को भी रेखांकित किया।
कार्यक्रम का समापन एस. एस. भटनागर रासायनिक परिषद् की प्रभारी डॉ. ईशा बहल द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने मुख्य वक्ता, प्राचार्य तथा रसायन विज्ञान विभागाध्यक्ष के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने विभाग की डीबीटी समन्वयक डॉ. तनु महाजन सहित कार्यक्रम के सफल आयोजन में योगदान देने वाले सभी सहयोगियों का विशेष रूप से धन्यवाद किया। इस अवसर पर रसायन विज्ञान विभाग की डॉ. सवनीत, डॉ. पूजा, डॉ. शिल्पा, डॉ. सोनिका और डॉ. अमनदीप भी उपस्थित रहीं। उन्होंने सत्र में सहभागिता करते हुए शैक्षणिक विचारों के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित किया।



