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भारतीयों के लिए यूरोप का वीजा लेना हुआ मुश्किल

दिल्ली: भारतीय यात्रियों के लिए यूरोप के 29 देशों का शेनजेन वीजा प्राप्त करना दिनों-दिन जटिल होता जा रहा है। 2013 से 2023 के बीच शेनजेन जोन में वीसा अर्जियों के रद्द होने की दर 5% से बढ़कर 16% हो गई है। इस बढ़ती कठिनाई के कारण भारतीय यात्रियों को यात्रा योजनाओं में कई बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। शेनजेन वीजा के लिए सामान्य फीस ₹6000 है, लेकिन भारतीयों को अतिरिक्त ₹1900 चुकाने पड़ते हैं। जबकि ब्रिटिश वीजा ₹12,700 और अमेरिकी वीसा ₹15,600 में मिलता है। विशेष सुविधाओं, जैसे लाउंज या ऑफ-ऑवर आवेदन, के लिए अतिरिक्त ₹2500-₹16,000 तक का खर्च होता हैवीजा प्रक्रिया का लगभग 40% हिस्सा प्राइवेट कंपनियों के जरिए आउटसोर्स किया जाता है। वीएफएस ग्लोबल, टीएलएस कॉन्टैक्ट और बीएलएस इंटरनेशनल जैसी कंपनियों का इस क्षेत्र में 70% नियंत्रण है। इन्वेस्टमेंट फर्म नुवामा ग्रुप के अनुसार, वीसा आउटसोर्सिंग इंडस्ट्री हर साल 9% की दर से बढ़ रही है और 2030 तक इसका मूल्य ₹42,000 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है। यूरोप जाने वाले यात्रियों को बैंक स्टेटमेंट, पे स्लिप, टैक्स रिटर्न जैसी कई दस्तावेज़ी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। आवेदन के बाद भी कई बार अर्जियां अस्वीकृत हो जाती हैं, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है। खास बात यह है कि यूरोप जाने के लिए अमीर देशों के लिए वीजा में छूट है लेकिन विकासशील देशों पर बोझ डाला गयाहै।

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