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मुक्त होने की तीव्र इच्छा ही सबसे बड़ा बंधन-नवजीत भारद्वाज*

जालंधर:- मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में श्री शनिदेव महाराज जी के निमित सामुहिक निशुल्क दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया।
सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमान बावा जोशी से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन ,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई।

सिद्ध मां बगलामुखी धाम के प्रेरक प्रवक्ता नवजीत भारद्वाज प्रभु भक्तों को संत कबीर दास जी के दोहे का अनुसरण करते हुए कहते है कि *माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर, कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर॥* अर्थात् समझाते है कि वो उस माला की बात नहीं कर रहें हैं जो हाथ में फेरी जाती है, माला से अर्थ है वो, जो गोल-गोल लगातार दौड़ चल ही रही है, युगों से चल रही है कि कुछ मिल जाएगा, लगातार मन की कोशिश चल ही रही है, माला केवल हाथ में घुमाए जाने वाले दानों का प्रतीक नहीं है। हम बाहरी क्रियाकांड (माला फेरना) तो बदलते रहते हैं, लेकिन उसे फेरने वाला कर्ता (अहंकार और अशांत मन) वैसा ही बना रहता है।
नवजीत भारद्वाज जी कहते है कि मन का मनका फेर का अर्थ है उस अंतहीन इच्छाओं के चक्रव्यूह से बाहर निकलना। मनुष्य शांति की खोज में जितना हाथ-पांव मारता है, वह उतना ही उलझता जाता है।
नवजीत भारद्वाज जी प्रभु भक्तों को समझाते हुए कहते है कि मुक्त होने की तीव्र इच्छा ही सबसे बड़ा बंधन है। जब तक आप स्वयं के प्रयास से मुक्त होना चाहते हैं, तब तक मैं (अहंकार) जीवित रहता है। मुक्ति बाहर दौडऩे में नहीं, बल्कि शांत होकर बैठ जाने और इस सत्य को स्वीकार करने में है। जब कर्ता भाव और पाने की व्याकुलता समाप्त होती है, तभी वास्तविक आध्यात्मिक रूपांतरण होता है।
इस अवसर पर श्वेता भारद्वाज, नवीन कुमार,राकेश प्रभाकर,पूनम प्रभाकर ,सरोज बाला, समीर कपूर, अमरेंद्र कुमार शर्मा, मुनीष मैहरा, अजीत कुमार , नरेंद्र ,रोहित भाटिया,बावा जोशी,राकेश शर्मा, प्रदीप, सुधीर,प्रदीप वर्मा, गोरव ,रोहित भाटिया,मुकेश, रजेश महाजन ,अमनदीप शर्मा, लवली, दीपक कुमार, नरेंद्र, सौरभ,दीपक कुमार, प्रिंस सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।
हवन यज्ञ उपरांत लंगर भंडारे का आयोजन किया गया।

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