
दिल्ली: भारतीय रिज़र्व बैंक ने कमर्शियल बैंकों द्वारा लोन रिकवरी की प्रक्रिया को अधिक ट्रांसप्रेंट और जिम्मेदार बनाने के लिए एक नया व्यापक फ्रेमवर्क जारी किया है। इसमें रिकवरी एजेंटों के लिए सख़्त नियम, उधार लेने वालों की सुरक्षा के बेहतर उपाय और टेक्नोलॉजी-आधारित रिकवरी सिस्टम पर कड़ी निगरानी जैसे बदलाव शामिल हैं। ये नए नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे।रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया चौथा संशोधन निर्देश, 2026′ के तहत जारी यह फ्रेमवर्क पुराने दिशा-निर्देशों की जगह लेगा। इसमें लोन रिकवरी, रिकवरी एजेंसियों की नियुक्ति और उधारकर्ताओं के अधिकारों से जुड़े सभी नियमों को एक ही दस्तावेज में समाहित किया गया है नए फ़्रेमवर्क के तहत, बैंकों को लोन रिकवरी के लिए एक डिटेल्ड पॉलिसी बनानी होगी। इस पॉलिसी में रिकवरी शुरू करने की शर्तें, आगे की कार्रवाई के तरीके, आर्थिक तंगी के मामलों में उधार लेने वालों से बातचीत, रिकवरी एजेंसियों के लिए ज़रूरी जांच-पड़ताल के नियम, परफ़ॉर्मेंस की निगरानी और नियमों के उल्लंघन वाले रिकवरी तरीकों से हुए नुकसान के लिए उधार लेने वालों को दिए जाने वाले मुआवज़े जैसी बातें साफ़ तौर पर बताई जानी चाहिए रिकवरी एजेंटों के पास पहचान पत्र और ऑथराइज़ेशन लेटर होना ज़रूरी होगा। वे उधार लेने वालों से सिर्फ़ सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे के बीच ही मिल सकेंगे और उन्हें तमीज़ से बात करनी होगी। उन्हें शोक, मेडिकल इमरजेंसी या दूसरे संवेदनशील मौकों पर उधार लेने वालों से संपर्क करने से बचना चाहिए।