
यू.वी-विजिबल स्पेक्ट्रोस्कोपी: सिद्धांत, उपकरण एवं अनुप्रयोग’ विषय पर कार्यशाला का आयोजन

डी.बी.टी. स्टार महाविद्यालय योजना के अंतर्गत डी.ए.वी. कॉलेज, जालंधर के स्नातकोत्तर फिजिक्स विभाग ने ‘’फिजिक्स एसोसिएशन’ तथा ‘अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ’ के सहयोग से ‘यू.वी-विजिबल स्पेक्ट्रोस्कोपी : सिद्धांत, उपकरण एवं अनुप्रयोग’ विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में डी.ए.वी. विश्वविद्यालय, जालंधर के भौतिक विज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. संदीप कुमार विशेषज्ञ वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।
यह कार्यक्रम प्राचार्य डॉ. अनूप कुमार के नेतृत्व तथा वरिष्ठ उपप्राचार्य एवं भौतिक विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. कुँवर राजीव के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ डी.ए.वी. गान से हुआ। इसके पश्चात् विशेषज्ञ वक्ता का पर्यावरण-अनुकूल ढंग से स्वागत किया गया तथा उन्हें स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। अपने उद्घाटन संबोधन में वरिष्ठ उपप्राचार्य एवं विभागाध्यक्ष डॉ. कुँवर राजीव ने विशेषज्ञ वक्ता का हार्दिक स्वागत किया। उन्होंने विद्यार्थियों को पराबैंगनी-दृश्य स्पेक्ट्रमिकी के संबंध में व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करने तथा वैज्ञानिक अनुसंधान में इसके विविध अनुप्रयोगों को समझने के लिए प्रेरित किया। भौतिक परिषद् की प्रभारी डॉ. रीना देवी ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का औपचारिक स्वागत किया तथा विशेषज्ञ वक्ता का परिचय प्रस्तुत किया।
तकनीकी सत्र के दौरान डॉ. संदीप कुमार ने विद्यार्थियों को ‘यू.वी-विजिबल स्पेक्ट्रमिकी के मूलभूत सिद्धांतों से परिचित करवाया। उन्होंने परमाणु संरचना के ऐतिहासिक विकास, प्रकाश की प्रकृति तथा विद्युतचुंबकीय वर्णक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए विषय का परिचय दिया। इसके पश्चात् उन्होंने बीयर-लैम्बर्ट नियम की व्याख्या की तथा पराबैंगनी-दृश्य स्पेक्ट्रममापी में प्रयुक्त होने वाले विभिन्न प्रकाश स्रोतों के विषय में विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की। उन्होंने विद्यार्थियों को उपकरण के विभिन्न घटकों, उसके कार्यकारी सिद्धांत, कार्यप्रणाली तथा विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में उसके व्यापक अनुप्रयोगों से अवगत करवाया। इस सत्र के माध्यम से विद्यार्थियों को वैज्ञानिक अनुसंधान एवं पदार्थों के गुणधर्मों के विश्लेषण में पराबैंगनी-दृश्य स्पेक्ट्रमिकी के महत्त्व को समझने का अवसर मिला। इसके साथ ही प्रयोगशाला में उपकरण का प्रायोगिक प्रदर्शन भी किया गया, जिसमें प्रतिभागियों को स्वयं उपकरण का संचालन करने का अवसर प्राप्त हुआ। इससे उन्हें उपकरण की कार्यप्रणाली तथा उसके व्यावहारिक अनुप्रयोगों को अधिक प्रभावी ढंग से समझने में सहायता मिली।
कार्यक्रम का समापन अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ की अधिष्ठाता डॉ. शरणजीत संधू द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने विशेषज्ञ वक्ता तथा कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले सभी व्यक्तियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर उपप्राचार्या प्रो. सोनिका दानिया, शैक्षणिक अधिष्ठाता डॉ. नवजीत शर्मा, जैव प्रौद्योगिकी विभाग के डीबीटी समन्वयक डॉ. संजय शर्मा, भौतिक विज्ञान विभाग की डीबीटी समन्वयक डॉ. रविंदर कौर, डॉ. प्रीति, डॉ. रितु पाल, डॉ. सुनील ठाकुर, प्रो. राहुल सेखरी, डॉ. शिवानी, डॉ. सुमित, डॉ. पूजा तथा डॉ. शिल्पा सेठिया उपस्थित रहे।
इस कार्यशाला ने प्रतिभागियों को ज्ञानवर्धक एवं अनुभवपरक शिक्षण का अवसर प्रदान किया तथा उन्हें कक्षागत अध्ययन से आगे बढ़कर भौतिक विज्ञान के व्यावहारिक अनुप्रयोगों को समझने और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रेरित किया।



