
स्वामी संत दास पब्लिक स्कूल, जालंधर में 41वाँ वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह ‘कल, आज और कल’ हर्षोल्लास एवं भव्यता के साथ संपन्न

स्वामी संत दास पब्लिक स्कूल, जालंधर में 5 नवंबर 2026 को 41वाँ वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह ‘कल, आज और कल’ अत्यंत हर्षोल्लास एवं भव्यता के साथ आयोजित किया गया। इस शुभ अवसर पर विद्यालय के अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी शांतानंद जी महाराज, उपाध्यक्ष बाबा राम दास जी, सचिव बाबा चरण दास जी, प्रबंधक डॉ. अजीत सिंह राजपाल, सी.ए. श्री आर.एस. कालरा, श्रीमती अंजू मेहता, श्रीमती टी.पी. कौर, सुश्री मोनिका चोपड़ा, श्री दर्शन चावला, ए.सी.पी. नॉर्थ श्री आतिश भाटिया, विद्यालय के गौरवशाली पूर्व छात्र डॉ. रिभव पसरीचा तथा विशिष्ट मुख्य अतिथि सी.ए. डॉ. अमरजीत चोपड़ा ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से समारोह की शोभा बढ़ाई।
समारोह का मुख्य विषय ‘कल, आज और कल’ अर्थात् ‘समय के साथ बदलती पीढ़ियाँ’ था। इस विषय के माध्यम से विभिन्न दशकों में पीढ़ियों के बीच बढ़ती दूरी तथा जीवनशैली, तकनीक और व्यवहार में आए परिवर्तनों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। विद्यालय की हेड गर्ल रीवा धवन ने सभी गणमान्य अतिथियों एवं उपस्थित जनसमूह का हार्दिक स्वागत किया। इसके पश्चात् विद्यालय के शबद गायन द्वारा सर्वशक्तिमान परमात्मा का आशीर्वाद प्राप्त किया गया। शास्त्रीय नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति में भगवान शिव, गणेश एवं माता पार्वती के जीवन की सुंदर झलकियाँ प्रस्तुत की गईं।
विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. सोनिया मागो ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए शैक्षणिक, खेलकूद, सांस्कृतिक एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों के क्षेत्र में विद्यालय की गौरवशाली उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। इसके पश्चात् पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि सी.ए. डॉ. अमरजीत चोपड़ा ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया। साथ ही वर्षभर के श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए भाई वीर सिंह हाउस को सर्वश्रेष्ठ सदन तथा स्वच्छता क्लब को सर्वश्रेष्ठ क्लब की ट्रॉफी प्रदान की गई।
इसके पश्चात् प्रस्तुत पंजाबी नाटक में युवा कलाकारों ने तकनीक के बढ़ते प्रभाव से जीवन में आए बदलावों और बदलते मूल्यों को दर्शाया। साथ ही विभिन्न पीढ़ियों के बीच की दूरी को कम करने तथा आपसी समझ विकसित करने का संदेश दिया।
‘अनस्टॉपेबल शी’ नामक कठपुतली शो ने राजस्थानी लोककथा के वातावरण को जीवंत कर दिया। इसमें परंपराओं और सामाजिक रूढ़ियों के कारण महिलाओं के दमन तथा शिक्षा, सुधार और सशक्तिकरण के माध्यम से उनमें आई जागरूकता की प्रेरक गाथा प्रस्तुत की गई।
अंग्रेज़ी नाटक ‘द ऑनेस्टी एक्सपेरिमेंट’ के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी ईमानदारी का दामन नहीं छोड़ना चाहिए तथा सफलता और विकास की दौड़ में अपने नैतिक मूल्यों एवं ईमानदारी से समझौता नहीं करना चाहिए।
‘म्यूज़िकल मोज़ेक’ के अंतर्गत भारत के विभिन्न राज्यों के संगीत का अद्भुत संगम देखने को मिला। गायन एवं वाद्य-संगीत की सुंदर प्रस्तुति ने भारतीय सांस्कृतिक विविधता के रंग बिखेर दिए।
मनोरंजक समाचार बुलेटिन ‘खबरों की खिचड़ी’ में मिलेनियल्स, बूमर्स, जनरेशन ज़ेड तथा जनरेशन अल्फा के बीच विचारों एवं दृष्टिकोणों के अंतर को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया। इस प्रस्तुति ने अंततः एक-दूसरे के विचारों और भावनाओं का सम्मान करने की आवश्यकता को रेखांकित किया।
‘विज्ञान आज कल’ नामक नृत्य-संयोजन के माध्यम से कृषि एवं तकनीक के क्षेत्र में हो रहे विकास को दर्शाया गया। साथ ही बेहतर एवं हरित भविष्य के निर्माण के लिए सतत विकास पर ध्यान केंद्रित करने का संदेश दिया गया।
मुख्य अतिथि सी.ए. डॉ. अमरजीत चोपड़ा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उनके प्रयासों एवं प्रतिभा की सराहना की। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर बल दिया कि हमें अपने पारंपरिक नैतिक मूल्यों एवं संस्कारों से जुड़े रहते हुए बदलती दुनिया को सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ अपनाना चाहिए।
इसके पश्चात् ‘रंग, राग और रिवाज़’ की ऊर्जावान प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसमें मध्य प्रदेश के पारंपरिक लोकनृत्य ‘अहीर’ और जोश, उमंग एवं उत्साह से भरपूर भांगड़ा का मनमोहक संगम देखने को मिला।
समारोह के मुख्य अतिथि एवं अन्य गणमान्य अतिथियों ने ‘कौशल मेला’ प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। इस प्रदर्शनी में मिडल स्तर के विद्यार्थियों ने सी.बी.एस.ई. की कौशल शिक्षा पहल के अंतर्गत अर्जित अपने व्यावहारिक कौशल का शानदार प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों द्वारा स्वयं तैयार किए गए तथा एकत्रित किए गए विरासत एवं संस्कृति से संबंधित वस्तुओं के संग्रहालय, पुनर्चक्रित सामग्री से निर्मित उपयोगी वस्तुएँ, हस्तनिर्मित कला एवं शिल्प की रंग-बिरंगी कलाकृतियाँ, प्रयोगशाला द्वारा प्रमाणित फलों के पाउडर, नाम-पर्ची स्टिकर, आकर्षक पोस्टर तथा अद्भुत होम ऑटोमेशन उपकरण विशेष आकर्षण का केंद्र रहे।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के हेड बॉय पृथमेय नूर सिंह ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए सभी गणमान्य अतिथियों, पदाधिकारियों एवं अधिकारियों के प्रति उनके प्रोत्साहन और सहयोग के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया।
अंततः राष्ट्रगान के साथ इस भव्य एवं यादगार समारोह का समापन हुआ।



