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अपने भीतर के त्रिगुणों पर विजय ही जीवन की सच्ची जीत-नवजीत भारद्वाज*

जालंधर:- मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में श्री शनिदेव महाराज जी के निमित सामुहिक निशुल्क दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया।
सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमान रितु से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन ,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई।

सिद्ध मां बगलामुखी धाम में दिव्य हवन की पावन अग्नि प्रज्वलित थी। वैदिक मंत्रोच्चार से संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठा। इस पावन अवसर पर प्रेरक आध्यात्मिक प्रवक्ता नवजीत भारद्वाज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को ओजस्वी एवं भावपूर्ण प्रवचनों का रसपान करवाया। उन्होंने कहा कि मनुष्य का सबसे बड़ा संघर्ष बाहरी संसार से नहीं, बल्कि अपने ही भीतर मौजूद सतोगुण, रजोगुण और तमोगुण के बीच चलता है। जो इस आंतरिक युद्ध में विजय प्राप्त कर लेता है, वही जीवन की वास्तविक सफलता को प्राप्त करता है।
प्रवचन की शुरुआत करते हुए उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा, “आज मैं आपको कोई कथा नहीं सुनाऊँगा, बल्कि आपके सामने आपका अपना दर्पण रखूँगा।” इसके बाद उन्होंने सभी से आत्ममंथन करने का आग्रह करते हुए प्रश्न किया— “क्या मैं वही हूँ, जिसे संसार देखता है, या वह हूँ, जिसे केवल परमात्मा देख रहा है?” उन्होंने कहा कि यदि यह प्रश्न हृदय को स्पर्श कर जाए, तो समझ लेना चाहिए कि अध्यात्म की यात्रा प्रारंभ हो चुकी है।
नवजीत भारद्वाज ने भगवद गीता का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक मनुष्य प्रकृति के *तीन गुणों— सतोगुण, रजोगुण और तमोगुण* से प्रभावित होता है, लेकिन आत्मा इन तीनों से परे और शुद्ध है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक साधना का उद्देश्य इन्हीं गुणों को समझकर आत्मा के वास्तविक स्वरूप तक पहुँचना है।
*तमोगुण की व्याख्या* करते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल आलस्य का नाम नहीं है। “जब सत्य सामने हो और मन उसे स्वीकार न करे, जब हम दूसरों की कमियाँ गिनते रहें लेकिन अपनी आत्मा की धूल न देखें, जब मंदिर जाकर भी मन द्वेष और अहंकार से भरा रहे— वही तमोगुण है।” उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा, “अंधेरा कभी प्रकाश को नहीं हराता, अंधेरा तभी दिखाई देता है जब भीतर का दीपक बुझ जाता है। आपके भीतर का वही दीपक विवेक है, उसे सदैव प्रज्वलित रखें।”
*रजोगुण पर* प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि यह मनुष्य को निरंतर दौड़ाता रहता है— “और धन कमा लो, और नाम कमा लो, और आगे निकल जाओ।” लेकिन उन्होंने चेताया कि जीवन की अंतिम घड़ी में न धन साथ जाता है, न पद और न प्रतिष्ठा। सिर्फ कर्म, संस्कार और प्रभु के प्रति समर्पण ही मनुष्य की वास्तविक पूँजी होते हैं। उन्होंने कहा कि आज का सबसे बड़ा दुर्भाग्य यही है कि मनुष्य पूरी जिंदगी ईंट-पत्थरों का घर बनाने में लगा रहता है, लेकिन अपने भीतर भगवान का मंदिर बनाना भूल जाता है।
*सतोगुण की महिमा* का वर्णन करते हुए नवजीत भारद्वाज ने कहा कि सतोगुण केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है। सतोगुण तब प्रकट होता है जब किसी की सफलता देखकर मन से आशीर्वाद निकले, अपमान मिलने पर भी प्रतिशोध के स्थान पर क्षमा और प्रार्थना जन्म ले, भूखे को भोजन कराते समय उसमें भगवान के दर्शन हों और किसी के आँसू देखकर अपना हृदय भी द्रवित हो जाए। उन्होंने कहा कि जहाँ सतोगुण का वास होता है, वहाँ भगवान को बुलाना नहीं पड़ता, वे स्वयं कृपा बरसाने आ जाते हैं।
प्रवचन के समापन पर उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आत्मपरिवर्तन का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “आइए, आज प्रण करें कि हम अपने भीतर के तमस को पहचानेंगे, रजस को सेवा और सद्कर्म में लगाएंगे तथा सतोगुण को इतना विकसित करेंगे कि हमारा जीवन स्वयं भगवान का मंदिर बन जाए। क्योंकि जिस दिन मनुष्य स्वयं को बदल लेता है, उसी दिन उसकी दुनिया बदल जाती है, और जिस दिन वह स्वयं को परमात्मा को समर्पित कर देता है, उसी दिन उसका जन्म सफल हो जाता है।”
*धाम के सेवादार नवजीत ने बताया की मां बगलामुखी जी के निमित मासिक हवन यज्ञ का आयोजन 28 जून दिन रविवार को सुबह 8:30 बजे से 11 बजे तक म॔दिर परिसर में किया जा रहा है, सभी मां भक्ततजन सादर सपरिवार आमंत्रित हैं।*
इस अवसर पर सरोज बाला, समीर कपूर, विक्की अग्रवाल, अमरेंद्र कुमार शर्मा,प्रदीप , दिनेश सेठ,सौरभ भाटिया,जानू थापर,दिनेश चौधरी,नरेश,कोमल,वेद प्रकाश, मुनीष मैहरा, ऋषभ कालिया,रिंकू सैनी, उदय ,अजीत कुमार , नरेंद्र ,रोहित भाटिया,बावा जोशी,राकेश शर्मा,नवीन , प्रदीप, सुधीर, सुमीत ,जोगिंदर सिंह, मनीष शर्मा,गौरी केतन शर्मा,सौरभ ,शंकर, संदीप,रिंकू,प्रदीप वर्मा, गोरव गोयल, मनी ,नरेश,अजय शर्मा,संजीव शर्मा, रोहित भाटिया,मुकेश,वरुण, नितिश,रोमी, भोला शर्मा,दीलीप, लवली, लक्की, मोहित , विशाल , अश्विनी शर्मा , रवि भल्ला, जगदीश, नवीन कुमार, निर्मल,अनिल,सागर,दीपक, प्रिंस कुमार,दीपक कुमार, नरेंद्र, सौरभ,दीपक कुमार, नरेश,दिक्षित, अनिल सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।
हवन यज्ञ उपरांत लंगर भंडारे का आयोजन किया गया।

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