
डी.ए.वी. कॉलेज जालंधर में ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ का आयोजन

वर्ष 1947 में भारत के विभाजन के दौरान अपने प्राण गंवाने वाले लाखों लोगों तथा उस समय लोगों द्वारा झेली गई असहनीय पीड़ा और त्रासदी को स्मरण करने के उद्देश्य से डी.ए.वी. कॉलेज, जालंधर में ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ मनाया गया।
इस अवसर पर हरियाणा के पी.जी. कॉलेज, रोहतक के सेवानिवृत्त प्राचार्य प्रो. जगदीश चंद्र जोशी ने विशेषज्ञ व्याख्यान प्रस्तुत किया। वे सुप्रसिद्ध इतिहासकार, शिक्षाविद्, लेखक, शोधकर्ता एवं अनुवादक हैं। वरिष्ठ उप-प्रधानाचार्य डॉ. कुँवर राजीव, उप-प्रधानाचार्या प्रो. सोनिका डानिया, राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. दिनेश अरोड़ा तथा राजनीति विज्ञान फोरम के अध्यक्ष प्रो. कुलदीप खुल्लर ने मुख्य वक्ता का स्मृति-चिह्न, पौधा एवं शॉल भेंट कर औपचारिक अभिनंदन किया।
वरिष्ठ उप-प्रधानाचार्य डॉ. कुँवर राजीव ने अपने संबोधन में कहा कि प्रतिष्ठित विशेषज्ञ प्रो. जगदीश चंद्र जोशी का स्वागत करना उनके लिए हर्ष का विषय है। उनका समृद्ध अनुभव एवं विषय-विशेषज्ञता निश्चित रूप से इस कार्यक्रम को ज्ञानवर्धक बनाएगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह सत्र विद्यार्थियों को इतिहास के महत्वपूर्ण पक्षों से परिचित कराने के साथ-साथ उनके लिए एक सार्थक एवं ज्ञानवर्धक अनुभव सिद्ध होगा।
कार्यक्रम का शुभारंभ डी.ए.वी. गान से हुआ। विभाजन के दौरान अपने प्राण गंवाने वाले लोगों की स्मृति में दो मिनट का मौन धारण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके पश्चात राजनीति विज्ञान फोरम के अध्यक्ष प्रो. कुलदीप खुल्लर ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। उन्होंने मुख्य वक्ता प्रो. जे.सी. जोशी, वरिष्ठ उप-प्रधानाचार्य डॉ. कुँवर राजीव, उप-प्रधानाचार्या प्रो. सोनिका दानिया, राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. दिनेश अरोड़ा, विभिन्न विभागों के सभी प्राध्यापकों तथा विद्यार्थियों का स्वागत किया।
कार्यक्रम का मंच-संचालन एम.ए. एवं बी.ए. की छात्राओं मुस्कान शर्मा और फराह खान ने क्रमशः किया।
मुख्य वक्ता प्रो. जगदीश चंद्र जोशी ने अपने व्याख्यान में वर्ष 1947 में भारत के विभाजन से संबंधित विभिन्न पहलुओं तथा उसके प्रमुख कारणों पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। विद्यार्थियों ने अत्यंत ध्यानपूर्वक व्याख्यान सुना। विभाजन की ऐतिहासिक त्रासदी से संबंधित विषय ने विद्यार्थियों की विशेष रुचि उत्पन्न की। व्याख्यान के उपरांत विशेषज्ञ एवं विद्यार्थियों के मध्य एक संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने विभाजन से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे और विशेषज्ञ से उनके उत्तर प्राप्त किए।
इस अवसर पर प्रो. शरद मनोचा ने भी विद्यार्थियों के साथ अपने विचार सांझा किए तथा उन्हें नियमित रूप से पुस्तकों के अध्ययन के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विद्यार्थियों के बौद्धिक एवं व्यक्तित्व विकास में पठन-पाठन के महत्व पर विशेष बल दिया।
कार्यक्रम के अंत में राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. दिनेश अरोड़ा ने औपचारिक धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए मुख्य वक्ता, कॉलेज प्रबंधन, प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।
अंततः राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इस अवसर पर डॉ. ईशा, प्रो. अमृतपाल सिंह, प्रो. चंदन माहे सहित विभिन्न विभागों के प्राध्यापक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।


