

जालंधर : 10 सितंबर 2026
वज्र कोर ने असल उत्तर के युद्ध (8–10 सितंबर 1965) की स्मृति में उन वीर भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने 1965 के भारत-पाक युद्ध के इस निर्णायक संग्राम में अदम्य साहस, कुशल रणनीति और दृढ़ संकल्प का परिचय देते हुए पाकिस्तान के शक्तिशाली बख्तरबंद आक्रमण को निर्णायक रूप से परास्त किया।
यह ऐतिहासिक युद्ध खेमकरण सेक्टर के असल उत्तर क्षेत्र में लड़ा गया, जहां भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तान के बड़े बख्तरबंद आक्रमण का सामना किया, जिसमें उसके अत्याधुनिक माने जाने वाले पैटन टैंक बड़ी संख्या में शामिल थे। भारतीय सेना ने भूभाग का प्रभावी उपयोग करते हुए सुनियोजित रक्षात्मक रणनीति अपनाई और आगे बढ़ते पाकिस्तानी टैंकों को अपने चुने हुए युद्धक्षेत्र में उलझा दिया। तीन दिनों तक चले भीषण संघर्ष में भारतीय सैनिकों ने दुश्मन की बढ़त को निर्णायक रूप से रोकते हुए उसके बख्तरबंद दस्तों को भारी क्षति पहुंचाई।
युद्ध के बाद यह क्षेत्र बड़ी संख्या में नष्ट, क्षतिग्रस्त और छोड़े गए पाकिस्तानी पैटन टैंकों के कारण ‘पैटन नगर’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ। असल उत्तर की विजय ने न केवल इस क्षेत्र में पाकिस्तान की आक्रामक योजना को विफल किया, बल्कि यह युद्ध भारतीय सेना की रणनीतिक सूझबूझ, साहस और दृढ़ प्रतिरोध का एक गौरवशाली अध्याय बन गया।
इस युद्ध के महानायकों में कंपनी क्वार्टर मास्टर हवलदार अब्दुल हमीद, परमवीर चक्र (मरणोपरांत) का नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित है। दुश्मन के टैंकों का सामना करते हुए उन्होंने अपने रिकॉयलेस गन से असाधारण वीरता का परिचय दिया और भीषण गोलाबारी के बीच अंतिम क्षण तक लड़ते रहे। उनका सर्वोच्च बलिदान और अद्वितीय शौर्य आज भी भारतीय सैनिकों की पीढ़ियों को प्रेरित करता है।
इस ऐतिहासिक विजय और वीरों के बलिदान को स्मरण करते हुए 09 सितंबर 2026 को असल उत्तर युद्ध स्मारक पर एक गरिमामय पुष्पचक्र अर्पण समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर पूर्व सैनिकों, सेवारत सैन्यकर्मियों और स्थानीय ग्रामीणों ने एक साथ वीर शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किए। उनकी सहभागिता ने सशस्त्र सेनाओं, पूर्व सैनिकों और स्थानीय समुदाय के बीच उस अटूट संबंध को पुनः रेखांकित किया, जिसके हृदय में इस ऐतिहासिक युद्ध की स्मृतियां आज भी जीवंत हैं।
इस अवसर पर वज्र कोर ने असल उत्तर के वीरों की गौरवशाली विरासत को संरक्षित रखने तथा उनके साहस, रणकौशल, बलिदान और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण से सदैव प्रेरणा लेने के अपने संकल्प को दोहराया।



