
दिल्ली: पासपोर्ट रिन्यू करने को लेकर एक बडी़ खबर सामने आई है। दरअसल, अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ पुलिस में कोई FIR दर्ज है, तो भी उसका पासपोर्ट जारी करने या रिन्यू करने से मना नहीं किया जा सकता। आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के जस्टिस सुब्बा रेड्डी सट्टी ने एक मामले की सुनवाई के दौरान यह बड़ी कानूनी व्यवस्था दी है। अदालत ने साफ किया कि जब तक कोई निचली अदालत किसी आपराधिक मामले पर औपचारिक रूप से संज्ञान नहीं ले लेती, तब तक उस मामले को पासपोर्ट कानून के तहत ‘लंबित न्यायिक कार्यवाही’ नहीं माना जाएगा।यह फैसला एक 16 साल के नाबालिग युवक की याचिक पर आया है। याचिकाकर्ता ने अपना पासपोर्ट रिन्यू कराने के लिए आवेदन किया था। हालांकि, Police Verification के दौरान पासपोर्ट दफ्तर को पता चला कि युवक का नाम एक आपराधिक मामले में शामिल है। इस रिपोर्ट के आधार पर पासपोर्ट कार्यालय ने स्पष्टीकरण मांगते हुए उसका पासपोर्ट रिन्यू करने से इनकार कर दिया था, जिसके खिलाफ युवक ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटायासुनवाई के दौरान आंध्र प्रदेश सरकार ने अदालत को सूचित किया कि पुलिस ने संबंधित मामले में अभी तक कोर्ट के सामने अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट पेश नहीं की है और न ही अदालत ने इस मामले पर कोई संज्ञान लिया है। इस पर जस्टिस सुब्बा रेड्डी सट्टी ने पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की कानूनी बारीकियों को समझाते हुए कहा, केवल पुलिस में एफआईआर दर्ज होने का मतलब यह नहीं है कि मामला अदालत में लंबित है। जब तक मजिस्ट्रेट या जज उस पर कानूनी संज्ञान नहीं लेते, तब तक पासपोर्ट अधिनियम 1967 की धारा 6(2)(f) के तहत पासपोर्ट रोकने का कोई कानूनी आधार नहीं बनता। कानून का एक बुनियादी नियम है कि जब तक किसी व्यक्ति का दोष अदालत में साबित नहीं हो जाता, तब तक उसे निर्दोष ही माना जाएगा। सिर्फ आरोपी होने के कारण किसी के अधिकारों को छीना नहीं जा सकता।