

लुधियाना: जिले में धान की थ्रेशिंग का काम रफ्तार पकड़ने के साथ ही शहर की फिजाओं में धुआं और प्रदूषण घुलने लगा है। आसपास के जिलों में पराली जलाने की घटनाओं के चलते औद्योगिक नगरी लुधियाना की हवा लगातार खराब होकर ‘येलो जोन’ में बनी हुई है। 26 अक्तूबर को शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स 126 दर्ज किया गया। हवा में घुले इस जहर का सीधा असर आम जनता, खासकर बुजुर्गों, दिल के मरीजों और सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों की सेहत पर पड़ने लगा है।कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट की रिपोर्ट के अनुसार, जिले में कुल 2.83 लाख हेक्टेयर रकबे में से अब तक करीब 35 प्रतिशत हिस्से में धान की कटाई पूरी हो चुकी है। प्रशासन सेटेलाइट मॉनिटरिंग के जरिए हर गतिविधि पर पैनी नजर रख रहा है। जगराओं इलाके में सैटेलाइट के जरिए पराली जलाने की लोकेशन ट्रेस हुई, जिसके बाद प्रशासनिक टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर मुआयना किया, जहां खेत के आसपास घास-फूस जली पाई गई। गौरतलब है कि पिछले साल जिले में पराली जलाने के कुल 219 मामले सामने आए थे। प्रशासन का दावा है कि किसानों को जागरूक करने के लिए लगातार कैंप लगाए जा रहे हैं और सब्सिडी पर मशीनें उपलब्ध करवाई जा रही हैं


