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AAP ने पंजाब को दिल्ली के रिमोट कंट्रोल से चलाने की गलत परंपरा डाली : एस. आर. लद्धड़

चंडीगढ़, 25 सितंबर 2026:

भाजपा नेता एवं पूर्व IAS अधिकारी एस. आर. लद्धड़ ने कहा कि GMADA में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हालिया कार्रवाई ने पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार के कामकाज और दिल्ली से उसके कथित प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

लद्धड़ ने कहा कि पंजाब के इतिहास में शायद पहली बार ऐसी स्थिति देखने को मिली है, जब दिल्ली से आए राजनीतिक नेताओं और पदाधिकारियों का प्रभाव पंजाब के प्रशासनिक निर्णयों तक पहुंचने की बात सामने आ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल और उनके राजनीतिक सहयोगियों ने पंजाब में लगभग 200 लोगों को विभिन्न जिम्मेदारियों के साथ भेजकर ऐसा तंत्र खड़ा किया, जिसमें वरिष्ठ अधिकारियों और मंत्रियों के ऊपर भी दिल्ली से निर्देश देने वाले राजनीतिक “बॉस” दिखाई देने लगे।

उन्होंने कहा कि शुरुआत में AAP नेताओं के माध्यम से पोस्टिंग और ट्रांसफर को प्रभावित करने के प्रयासों की चर्चा होती थी, लेकिन धीरे-धीरे यह राजनीतिक हस्तक्षेप पंजाब की शासन व्यवस्था पर व्यापक पकड़ में बदल गया।

“जो बात पहले धीरे-धीरे हो रही थी, वह अब प्रशासनिक व्यवस्था पर एक समानांतर नियंत्रण की तरह दिखाई देने लगी है। यह पंजाब की संवैधानिक और प्रशासनिक स्वायत्तता के लिए गंभीर चिंता का विषय है,” लद्धड़ ने कहा।

उन्होंने कहा कि 24–25 सितंबर 2026 को सामने आई ED की GMADA कार्रवाई इस पूरे विवाद को और गंभीर बनाती है। ED ने आरोप लगाया है कि सत्येंद्र जैन और मनीष सिसोदिया GMADA अधिकारियों के साथ अनौपचारिक बैठकें करते थे और मास्टर प्लान, भूमि अधिग्रहण, मुआवजे तथा संपत्ति की नीलामी जैसे महत्वपूर्ण मामलों पर चर्चा होती थी। AAP ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उसके नेताओं की GMADA के कामकाज में कोई भूमिका नहीं थी। (The Tribune⁠)

लद्धड़ ने कहा, “यदि ED के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह केवल भ्रष्टाचार का मामला नहीं होगा, बल्कि पंजाब की प्रशासनिक व्यवस्था को समानांतर राजनीतिक नियंत्रण के माध्यम से चलाने का गंभीर प्रश्न होगा।”

उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब सरकार द्वारा ED की कार्रवाई को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना और हाईकोर्ट द्वारा वॉरंट अधिकारी नियुक्त करके GMADA परिसर की स्थिति की निगरानी करवाना अपने आप में महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। बाद में वॉरंट अधिकारी की रिपोर्ट में GMADA अधिकारियों ने कहा कि उन्हें अवैध रूप से हिरासत में नहीं रखा गया और उन पर अनुचित दबाव नहीं डाला गया। इसके बाद पंजाब सरकार ने अपनी याचिका वापस ले ली। (The Times of India⁠)

लद्धड़ ने कहा कि AAP द्वारा हर जांच को राजनीतिक कार्रवाई बताकर खारिज करना उचित नहीं है।

“जांच एजेंसी केंद्र की हो या राज्य की—यदि आरोप हैं तो जांच होनी चाहिए। दोषी है तो कानून के अनुसार कार्रवाई हो और निर्दोष है तो उसे भी कानून के अनुसार संरक्षण मिले। लेकिन सत्ता में बैठे लोगों को जांच से ऊपर नहीं रखा जा सकता,” उन्होंने कहा।

उन्होंने निलंबित DIG हरचरण सिंह भुल्लर के मामले का भी उल्लेख करते हुए कहा कि 2025 में CBI कार्रवाई के बाद उनके विरुद्ध ED की मनी-लॉन्ड्रिंग जांच में भी बड़ी मात्रा में नकदी और अन्य संपत्तियों से संबंधित कार्रवाई सामने आई है। अप्रैल 2026 में ED ने 11 परिसरों पर तलाशी के दौरान ₹1.4 करोड़ की नकदी जब्त किए जाने की जानकारी दी थी। (The Tribune⁠)

लद्धड़ ने कहा:

“इसका अर्थ यह नहीं है कि पिछली सरकारों में भ्रष्टाचार नहीं था। भ्रष्टाचार पहले भी था और उसके विरुद्ध भी कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन आज जो सबसे गंभीर चिंता है, वह है राजनीतिक सत्ता, प्रशासन और आर्थिक हितों के बीच संभावित गठजोड़ का बढ़ना।”

उन्होंने कहा कि पंजाब में यदि कोई अधिकारी, मंत्री या राजनीतिक व्यक्ति कानून के विरुद्ध काम करता है तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।

“पंजाब की जनता को यह अधिकार है कि सरकारी कार्यालयों में फैसले संविधान, कानून और नियमों के अनुसार हों—किसी दिल्ली के राजनीतिक ‘बॉस’ के मौखिक निर्देश पर नहीं।”

उन्होंने कहा कि पंजाब को “दिल्ली के रिमोट कंट्रोल” से चलाने की परंपरा ने प्रशासनिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े किए हैं और आने वाली सरकारों को ऐसी व्यवस्था को समाप्त कर संवैधानिक जवाबदेही, पारदर्शिता और नियम आधारित प्रशासन सुनिश्चित करना होगा।

“पंजाब किसी राजनीतिक पार्टी की जागीर नहीं है। पंजाब तीन करोड़ पंजाबियों का है। सरकारें आती-जाती हैं, लेकिन संस्थाएं स्थायी होती हैं। इसलिए किसी भी सरकार को प्रशासनिक संस्थाओं को राजनीतिक नियंत्रण का माध्यम बनाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए,” लद्धड़ ने कहा।

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