दिल्ली; भारत के खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने हाई कैफीन वाले पेय पदार्थ बेचने वाली कंपनियों को अपने उत्पादों पर एनर्जी ड्रिंक शब्द का इस्तमाल करने पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। रेगुलेटर का कहना है कि भारत में इस तरह के उत्पादों के लिए कोई आधिकारिक मानक तय नहीं है, इसलिए ऐसे दावे ग्राहकों को गुमराह कर सकते हैं।FSSAI ने कंपनियों को “शरीर और दिमाग को ऊर्जा देता है” या “कमजोरी दूर करता है” जैसे दावे नहीं करने को कहा है। इस फैसले का पेप्सी के साथ- साथ कई कंपनियों ने विरोध किया। उनका कहना है कि इससे उनके ब्रांड और बिक्री पर असर पड़ेगा। हालांकि, एफएसएसएआई के सीईओ रजित पुनहानी ने साफ कर दिया कि अगर कंपनियां असहमत हैं तो वे अदालत जा सकती हैं।सरकारी सूत्रों के मुताबिक, कंपनियों ने आखिरकार नियम मानने पर सहमति जताई है और एफएसएसएआई ने लेबल बदलने के लिए 90 दिन का समय दिया है।दुनियाभर में हाई-कैफीन वाले पेय पदार्थों को लेकर स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं बढ़ रही हैं। इनमें कैफीन, चीनी और टॉरिन की मात्रा ज्यादा होती है। इसी कारण इंग्लैंड में अगले साल अप्रैल से 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को ऐसे पेय बेचने पर रोक लग जाएगी। वहीं, पाकिस्तान के कुछ क्षेत्रों में इन्हें “स्टिमुलेंट ड्रिंक” के नाम से बेचा जाता है।