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*दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान, नूरमहल में श्रद्धा एवं उल्लास से मनाया गया श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव*

नूरमहल (पंजाब), 5 सितंबर 2026: दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान, नूरमहल आश्रम में शुक्रवार, 4 सितंबर को श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव श्रद्धा, भक्ति एवं उल्लास के साथ मनाया गया। भव्य रूप से सजे कार्यक्रम स्थल में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। कार्यक्रम का शुभारंभ ब्रह्मज्ञानी शिष्यों द्वारा वेद मंत्रों के उच्चारण से हुआ।

साध्वी सुमेधा भारती जी एवं साध्वी भाग्यश्री भारती जी ने मंच संचालन संभालते हुए भगवान श्री कृष्ण की अनंत दिव्य लीलाओं को अध्यात्म एवं विज्ञान के समन्वय से समझाया।

साध्वी सुमेधा भारती जी ने गाय के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने गाय को मां का स्थान दिया। हमारे शास्त्रों में भी कहा गया है— “गावो विश्वस्य मातरः”। उन्होंने बताया कि आज वैज्ञानिक भी Animal Assisted Interaction पर शोध कर रहे हैं, जिसके अनुसार गाय जैसे शांत पशुओं के साथ समय बिताना तनाव, अकेलेपन एवं चिंता को कम करने में सहायक हो सकता है। इसी कारण विदेशों में Cow Cuddling जैसी गतिविधियां भी लोकप्रिय हो रही हैं।

साध्वी भाग्यश्री भारती जी ने श्री कृष्ण की बांसुरी का उदाहरण देते हुए कहा कि बांसुरी में छेद थे, लेकिन उसकी धुन ने हृदय के बंद द्वार खोल दिए। आज हमें विचार करना चाहिए कि हमारे द्वारा सुना जाने वाला संगीत और देखा जाने वाला मनोरंजन हमारे भीतर प्रेम, करुणा एवं संस्कार के द्वार खोल रहा है या वासना, क्रूरता एवं अभद्रता के।

उन्होंने कहा कि जन्माष्टमी पर हम एक दिन मटकियां फोड़कर आनंद मनाते हैं, लेकिन हमारे भीतर काम, क्रोध, अभिमान और ईर्ष्या की जो मटकियां भरी हैं, उनका क्या? वास्तविक जन्माष्टमी तभी है जब भगवान श्री कृष्ण का प्राकट्य हमारे हृदय में हो—तब हर दिन उत्सव और हर दिन मंगलमय हो जाता है।

भक्तों ने भजन-कीर्तन के साथ श्री कृष्ण जन्मोत्सव का आनंद लिया और भक्तिभाव में भावविभोर होकर उत्सव मनाया। अंत में भगवान श्री कृष्ण की आरती के साथ कार्यक्रम का विधिवत समापन हुआ।

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